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स्वच्छ विद्यालय योजना से शिक्षक धर्म संकट में, पढ़ाना छोड़ कर पानी की जांच के लिए दर-दर भटक रहे

Updated at : 17 Oct 2019 7:53 AM (IST)
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स्वच्छ विद्यालय योजना से शिक्षक धर्म संकट में, पढ़ाना छोड़ कर पानी की जांच के लिए दर-दर भटक रहे

सुनील कुमार झा रांची : सरकारी शिक्षक इन दिनों पढ़ाना-लिखाना छोड़ कर स्कूल के पानी की जांच कराने के लिए भटक रहे हैं. वे पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के पानी जांच कार्यालय से लेकर जल सहिया तक का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन पानी की जांच नहीं हो पा रही है. दरअसल ‘मुख्यमंत्री स्वच्छ विद्यालय […]

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सुनील कुमार झा
रांची : सरकारी शिक्षक इन दिनों पढ़ाना-लिखाना छोड़ कर स्कूल के पानी की जांच कराने के लिए भटक रहे हैं. वे पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के पानी जांच कार्यालय से लेकर जल सहिया तक का चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन पानी की जांच नहीं हो पा रही है. दरअसल ‘मुख्यमंत्री स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार योजना’ के तहत पंजीयन कराने के लिए स्कूलों को पानी की जांच रिपोर्ट जमा करनी है.
पर, पानी जांच की समुचित व्यवस्था नहीं होने से विद्यालय पंजीयन नहीं करवा पा रहे हैं. इधर, शिक्षा विभाग पंजीयन नहीं करानेवाले विद्यालयों को कार्रवाई की चेतावनी दे रहा है, सो अलग.
जांच का आदेश दिया, पैसे नहीं दिये : शिक्षकों ने पानी जांच के लिए पहले इंदिरा पैलेस स्थित कार्यालय का चक्कर लगाया. यहां उनसे पानी की जांच के लिए 1600 रुपये मांगे गये. मजे की बात यह है कि पानी की जांच का शुल्क देने के लिए विद्यालयों को कोई राशि नहीं दी गयी और न ही इस संबंध में कोई दिशा-निर्देश दिया गया.
विद्यालयों ने इसकी जानकारी जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय को दी. इसके बाद उप विकास आयुक्त द्वारा प्रोग्राम मैनेजमेंट यूनिट पेयजल स्वच्छता विभाग को पत्र लिखा गया. पत्र में कहा गया कि विद्यालयों द्वारा स्वच्छ विद्यालय पुरस्कार से संबंधित प्रश्नावली ऑनलाइन भरी जा रही है.
प्रश्नावली में वाटर टेस्ट संबंधित विवरणी भी संलग्न करनी है. इसके लिए विद्यालयों में उपयोग किये जानेवाले जल की जांच की जानी है. उप विकास आयुक्त ने नि:शुल्क वाटर टेस्ट करने का अनुरोध किया.
जल सहिया स्तर से जांच कराने का जारी किया पत्र
पानी की जांच के लिए पेयजल एवं स्वच्छता विभाग प्रोग्राम मैनेजमेंट यूनिट के उप निदेशक ने पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल डोरंडा व नेपाल हाउस के कार्यपालक अभियंता को पत्र लिखा है. पत्र में कहा गया है कि इतने कम समय में उपलब्ध मैन पावर एवं उपलब्ध रसायन द्वारा राज्य स्तरीय जल जांच प्रयोगशाला रांची द्वारा जल की जांच कर पाना संभव नहीं है.
अत: अनुरोध है कि जिला व प्रखंड स्तर पर एफटीके के माध्यम से कैमिस्ट, कनीय अभियंता व जल सहिया द्वारा निर्धारित समयावधि में पानी की जांच कर विद्यालयों को रिपोर्ट उपलब्ध करा दी जाये. इधर, शिक्षक जब पानी की जांच के लिए लिए जल सहिया के पास जा रहे हैं, तो अधिकतर जल सहिया कह रही हैं कि उनके पास जांच किट ही नहीं है.
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