रांची : आज सुबह 10 बजे से 12 बजे तक आधे शहर को नहीं मिलेगी बिजली
Updated at : 12 Oct 2019 5:49 AM (IST)
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रांची : हटिया ग्रिड को अपग्रेड करने के लिए शनिवार को सुबह 10 से 12 बजे तक चार पावर सब स्टेशन को बिजली आपूर्ति पूरी तरह से बंद रहेगी. केंद्र सरकार की नोडल एजेंसी नेशनल लोड डिस्पैच सेंटर के तहत पावर सिस्टम डेवलपमेंट फंड से ग्रिड अपग्रेडेशन का कार्य पूरा किया जाना है. इसके तहत […]
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रांची : हटिया ग्रिड को अपग्रेड करने के लिए शनिवार को सुबह 10 से 12 बजे तक चार पावर सब स्टेशन को बिजली आपूर्ति पूरी तरह से बंद रहेगी. केंद्र सरकार की नोडल एजेंसी नेशनल लोड डिस्पैच सेंटर के तहत पावर सिस्टम डेवलपमेंट फंड से ग्रिड अपग्रेडेशन का कार्य पूरा किया जाना है. इसके तहत पुराने और जर्जर उपकरणों को चरणबद्ध तरीके से बदला जायेगा.
ग्रिड के अंदर 132-33 केवी हाफ मेन बस शटडाउन के चलते राजधानी के धुर्वा, आरएंडडी, अरगोड़ा और कांके सबस्टेशन को कोई बिजली नहीं मिलेगी. ग्रिड के 50 एमवीए के दो ट्रांसफार्मर नंबर तीन और चार बंद रहने से करीब 60 मेगावाट की कमी हो जायेगी. मेंटेनेंस के चलते दो घंटे तक करीब डेढ़ दर्जन फीडर बंद रहेंगे. पावर ब्लाक के चलते राजधानी का पश्चिमोत्तर हिस्सा पर इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा.
ज्यूडिशियल ऐकेडमी, डैम साइड, तिरिल बस्ती, एचइसी, बालालौंग चौक, इससे सटे ग्रामीण इलाके, पुंदाग, अशाेक नगर, अरगोड़ा, हरमू, एयरपोर्ट, हटिया, तुपुदाना से सटे इलाके को बिजली संकट झेलनी होगी. हालांकि, कांके ग्रिड से बिजली की उपलब्धता रहने से कांके, अरसंडे, बोड़या इलाके को बिजली मिलती रहेगी. इसके पूर्व अगस्त में हटिया-2 ग्रिड में पावर ब्लॉक लेकर खराब उपकरणों को बदला गया था.
अगले साल तक पूरा होगा आधुनिकीकरण
हटिया ग्रिड का निर्माण साल 1962 में बिजली की जरूरतों को देखते हुए किया गया था. तब 20 एमवीए के ट्रांसफार्मर से पूरे रांची को सप्लाई दी जाती थी. आज ग्रिड में 50 एमवीए के चार बड़े ट्रासंफार्मर से आधे शहर को बिजली दी जाती है. केंद्र सरकार की ग्रिड अपग्रेडेशन स्कीम के तहत दिसंबर तक पावर ब्लॉक लेकर काम पूरा किया जाना था. सूत्रों की मानें, तो कार्य की अधिकता के चलते यह काम एक साल तक लंबा खिंच सकता है.
किस तरीके के होंगे तकनीकी बदलाव
मेगा पावर ब्लॉक लेने के बाद ग्रिड के अंदर पुराने और खराब उपकरणों को बदला जायेगा. इसके लिए 15 से 20 बार पावर ब्लॉक की जरूरत पड़ेगी. पहले एक आइसोलेटर बदलने के लिए ब्रेकर ऑफ करा कर हाथ से इंटरलॉकिंग का काम पूरा किया जाता था, जिसमें हर वक्त एक्सीडेंट का खतरा बना रहता था. ग्रिड अपग्रेडेशन के बाद सेंसर पर फाॅल्ट का पता जल्दी चलेगा. पूरा सिस्टम एक मॉर्डन सिस्टम के तहत एक ही जगह से ऑपरेट किया जा सकेगा.
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