20 वर्ष पूर्व हुई थी बरवाडीह मेगालिथ में खगोल की खोज, 22 व 23 सितंबर को सूरज दोनों खड़े पत्थरों के बीच से उगता दिखेगा

Updated at : 23 Sep 2019 6:21 AM (IST)
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20 वर्ष पूर्व हुई थी बरवाडीह मेगालिथ में खगोल की खोज, 22 व 23 सितंबर को सूरज दोनों खड़े पत्थरों के बीच से उगता दिखेगा

मेगालिथ शोधकर्ता शुभाशीष दास ने 20 वर्ष पूर्व की थी पंकरी बरवाडीह मेगालिथ में खगोल की खोज रांची : झारखंड के हजारीबाग निवासी मेगालिथ शोधकर्ता व लेखक शुभाशीष दास के अनुसार मेगालिथ असल में आदिवासियों के बेरिअल हैं, जिन्हें झारखंड में हरगढ़ी नाम से जाना जाता है. यहां के विभिन्न मेगालिथ ससंदिरी, बिरदीरी या बुरुदीरी […]

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मेगालिथ शोधकर्ता शुभाशीष दास ने 20 वर्ष पूर्व की थी पंकरी बरवाडीह मेगालिथ में खगोल की खोज
रांची : झारखंड के हजारीबाग निवासी मेगालिथ शोधकर्ता व लेखक शुभाशीष दास के अनुसार मेगालिथ असल में आदिवासियों के बेरिअल हैं, जिन्हें झारखंड में हरगढ़ी नाम से जाना जाता है. यहां के विभिन्न मेगालिथ ससंदिरी, बिरदीरी या बुरुदीरी के नाम से जाने जाते हैं. पर दुनिया के कई मेगालिथ की तरह झारखंड के करीब 500-600 मेगालिथ ऐसे हैं, जो हरगढ़ी नहीं हैं. इन खास मेगालिथों को प्राचीन आदिवासियों ने खगोल व गणितीय सटीकता के साथ बनाया है.
इन्हीं में से एक है पंकरी बरवाडीह का मेगालिथ समूह. इन खास मेगालिथों का जिक्र शुभाशीष दास ने अपनी नवीनतम पुस्तक द आकेस्ट्रॉनोमी अॉफ ए फ्यू मेगालिथ साइट्स अॉफ झारखंड में किया है. यह पुस्तक आज देश में बेस्ट सेलर का दर्जा हासिल कर चुकी है. पंकरी बरवाडीह देश में इक्विनॉक्स देखने का एकमात्र मेगालिथ है. प्राचीन आदिवासियों ने पंकरी बरवाडीह मेगालिथ में दो मेन्हीर (खड़े पत्थर) इतनी सटीकता से लगाया है कि 20 व 21 मार्च तथा 22 व 23 सितंबर को सूरज दोनों खड़े पत्थरों के बीच से उगता दिखायी देता है.
श्री दास का अनुमान है कि जब सूरज ऐसा करता होगा, तब प्राचीन लोगों को इस दिन की जानकारी हो जाती होगी. इसका अर्थ यह हुआ की पंकरी बरवाडीह मेगालिथ एक तरह की प्राचीन वेधशाला थी, जिससे सूर्य के पारगमन का अध्ययन किया जाता था. प्राचीन काल में इक्विनॉक्स को दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण दिन माना जाता था. श्री दास ने अपने अध्ययन के दौरान इस स्थल पर एक प्रस्तर वृत्त (स्टोन सर्कल) भी चिह्नित किया था. इसे वह प्राचीन कब्र समझते थे.
यहां खुदाई हो, तो प्राचीन काल से जुड़ी कई जानकारियां मिल सकती हैं. श्री दास ने पंकरी बरवाडीह मेगालिथ में खगोल की खोज 20 वर्ष पूर्व की थी. भारत में पंकरी बरवाडीह ही ऐसा मेगालिथ है, जहां आज भी लोग इक्विनॉक्स का सूर्योदय देख सकते हैं. अब खनन व अन्य कारणों से पंकरी बरवाडीह के मेगालिथ नष्ट हो रहे हैं.
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