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हरतालिका तीज पर इन पतियों को सलाम, ऐसा सुहाग किसे नहीं चाहिए

Updated at : 02 Sep 2019 7:44 AM (IST)
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हरतालिका तीज पर इन पतियों को सलाम, ऐसा सुहाग किसे नहीं चाहिए

आज हरतालिका तीज है. पति की लंबी आयु के लिए सौभाग्यवती महिलाएं आज उपवास रखती हैं. तीज में गौरी-शंकर की पूजा होती है.पति की लंबी उम्र की कामना की जाती है. यह पर्व पति-पत्नी के बीच अटूट प्रेम को दर्शाता है. आज हरतालिका तीज के मौके पर ऐसी ही कहानियां शेयर की जा रही है, […]

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आज हरतालिका तीज है. पति की लंबी आयु के लिए सौभाग्यवती महिलाएं आज उपवास रखती हैं. तीज में गौरी-शंकर की पूजा होती है.पति की लंबी उम्र की कामना की जाती है. यह पर्व पति-पत्नी के बीच अटूट प्रेम को दर्शाता है. आज हरतालिका तीज के मौके पर ऐसी ही कहानियां शेयर की जा रही है, जो पति-पत्नी के बीच गहरे रिश्ते को बताने के लिए काफी है. चारों कहानियां यह बताने के लिए काफी है कि सिर्फ पत्नी ही नहीं, जरूरत पड़े तो पति भी अपने दायित्व से पीछे नहीं हटते. हर परिस्थिति में पत्नी के साथ खड़े रहते हैं.
पत्नी के इलाज में खर्च कर चुके हैं पूरी जमा पूंजी, अब घर में ही कर रहे सेवा
पिस्का मोड़ निवासी जयंती प्रसाद पोद्दार बालकृष्णा प्लस टू हाइस्कूल के सेवानिवृत्त शिक्षक (गणित)हैं. उनकी पत्नी रुना देवी चार साल से एमएनडी (मोटर न्यूरॉन डिजीज) से ग्रसित है़ं यह बीमारी सैंकड़ों लोगों में एक को होती है़ यह बीमारी इतनी बढ़ गयी है कि उनकी जीने की इच्छा तक खत्म हो गयी है. अकड़न से शुरू हुई यह बीमारी आगे चलकर बड़ी परेशानी का कारण बन गयी, लेकिन जयंती प्रसाद परेशान नहीं हुए. लगातार पत्नी की सेवा में जुटे हुए हैं. रांची और वेल्लोर में इलाज करा चुके हैं. अब तक पत्नी के इलाज पर 15-16 लाख रुपये खर्च कर चुके है़ं रुना देवी पूरी तरह से बेड पर है़ं
पूरी तरह से वेंटिलेटर पर. इसके बावजूद जयंती प्रसाद ने अपनी हिम्मत नहीं हारी है़ जीवन की पूरी जमा पूंजी लगा चुके हैं. वह कहते हैं : पत्नी को इस हालात में देखकर अच्छा नहीं लगता है. अब, तो पैसे के कारण इलाज भी नहीं करा पा रहे है़ं 30 नवंबर 2018 को रिटायर हुए, लेकिन अब तक पेंशन भी शुरू नहीं हुई है. इतना पैसा खर्च करने के बाद भी पत्नी की स्थिति दिन प्रतिदिन बिगड़ती चली गयी़
हर छोटा-छोटा काम करते हैं जयंती प्रसाद
जयंती प्रसाद ही पत्नी की देख-भाल करते हैं. खाना-पीना हो या दवा सबकुछ समय पर देते हैं. छोटा से छोटा काम खुद करते हैं. जयंती प्रसाद कहते हैं कि घर में ही ऑक्सीजन सिलेंडर से लेकर अन्य जरूरी मेडिकल इक्विपमेंट की सुविधा है. चार से पांच दिनों में खुद पाइप चेंज करते है़ं नाक से लिक्विड डायट देते हैं.
1997 से पत्नी की सेवा में जुटे हैं देवचंद मंडल
देवचंद मंडल मोरहाबादी में रहते है़ं उनकी पत्नी पुष्पा मंडल शादी के बाद से हार्ट की परेशानी से जूझ रही है़ं 1997 में हार्ट की परेशानी बढ़ी और पेश मेकर लगाना पड़ गया. इसके बाद लकवा मार दिया. यहां भी परेशानी खत्म नहीं हुई. दो-दो बार सड़क दुर्घटना हो गयी. इसमें भी पैर में गहरी चोट लग गयी. इतने हादसों के बाद दोनों का रिश्ता और प्रगाढ़ होता गया. अब देवचंद हर वक्त पत्नी के पास ही रहते है़ं
1997 से पत्नी की सेवा कर रहे हैं. घर का पूरा काम खुद करते हैं. देवचंद बताते हैं कि पत्नी स्वस्थ रहे, तो हम खुश हैं. उनकी सेवा करने से यदि वह अच्छी होती हैं, तो इससे बड़ी खुशी क्या होगी. वह कहते हैं कि यदि पत्नी हमारी सेवा कर सकती है, तो हमारा भी कर्तव्य है कि हम उनकी सेवा करें. उनका ख्याल रखें. आज प्यार और सेवा के कारण ही पुष्पा थोड़ी बहुत चल पा रही हैं. उनका छोटा-छोटा काम कर मुझे खुशी होती है.
पत्नी के नाम पर बना दी यूनिवर्सिटी
यह कहानी दिग्गज उद्योगपति घनश्याम दास बिड़ला के सबसे छोटे बेटे बसंत कुमार बिड़ला और उनकी पत्नी डॉ सरला देवी बिड़ला की है. सरला बिड़ला को शिक्षाविद् के रूप में भी जाना जाता है. वह हमेशा बच्चों की शिक्षा के प्रति गंभीर रहती थीं. उन्हें मदद करने को तत्पर दिखती थीं. इसी दौरान डॉ सरला बिड़ला का 28 मार्च 2015 को निधन हो गया, लेकिन उनकी इच्छा को बसंत बाबू (बीके बिड़ला) ने हमेशा आगे बढ़ाया.
बच्चों के बीच सांस्कृतिक और शैक्षणिक मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए ही बीके बिड़ला ने अपनी पत्नी के नाम पर देशभर में 45 शिक्षण संस्थान खोले. इन्हें नाम दिया गया सरला बिड़ला पब्लिक स्कूल और सरला बिड़ला यूनिवर्सिटी. यह दोनों शैक्षणिक संस्थान रांची में मौजूद हैं. 20 जनवरी 2010 को सरला बिड़ला पब्लिक स्कूल के उद्घाटन के समय दोनों ही साथ रांची पहुंचे थे. 2015 में डॉ सरला देवी बिड़ला के निधन के बाद रांची में 20 जुलाई 2017 को सरला बिड़ला यूनिवर्सिटी की नींव रखी गयी.
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