आदिवासी भाषाओं के संरक्षण पर जोर
Updated at : 10 Aug 2019 7:32 AM (IST)
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दिल्ली/रांची : साहित्य अकादमी, दिल्ली के तत्वावधान में दो दिवसीय अखिल भारतीय आदिवासी लेखक उत्सव नौ अगस्त को शुरू हुआ. इसमें झारखंड सहित देशभर के 60 लेखक और कवि में भाग ले रहे हैं. उद्घाटन ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित ओड़िया कवि सीताकांत महापात्र ने किया. उन्होंने आदिवासी भाषाओं की विशिष्टता पर प्रकाश डाला. भाषाविद उदय […]
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दिल्ली/रांची : साहित्य अकादमी, दिल्ली के तत्वावधान में दो दिवसीय अखिल भारतीय आदिवासी लेखक उत्सव नौ अगस्त को शुरू हुआ. इसमें झारखंड सहित देशभर के 60 लेखक और कवि में भाग ले रहे हैं. उद्घाटन ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित ओड़िया कवि सीताकांत महापात्र ने किया. उन्होंने आदिवासी भाषाओं की विशिष्टता पर प्रकाश डाला.
भाषाविद उदय नारायण सिंह ने आदिवासी भाषाओं के तथाकथित संहार पर चिंता जतायी. साथ ही इसके संरक्षण पर जोर दिया. साहित्य अकादमी में संथाली परामर्श मंडल के संयोजक मदन मोहन सोरेन ने झारखंड में जनजातीय भाषाअों के चिंताजनक पहलुअों को रेखांकित किया.
अकादमी के अध्यक्ष चंद्रशेखर कंबार ने आश्वस्त किया कि अकादमी द्वारा आदिवासी साहित्य के विकास के लिए आगे भी कार्य किये जाते रहेंगे. इससे पहले भारत की आदिवासी भाषाएं -विशिष्टता, मुद्दे, वर्तमान स्थिति एवं चुनौतियां विषय पर डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विवि, रांची के उप कुलपति सह लेखक व कवि महादेव टोप्पो ने अपने विचार रखे.
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