सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के पूर्व मंत्री योगेन्‍द्र साव से कहा : तुम्हारी ‘दादागिरी'' दिखाने के पर्याप्त साक्ष्य

Updated at : 26 Jul 2019 8:42 PM (IST)
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सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड के पूर्व मंत्री योगेन्‍द्र साव से कहा : तुम्हारी ‘दादागिरी'' दिखाने के पर्याप्त साक्ष्य

नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को झारखंड के पूर्व मंत्री योगेन्द्र साव से कहा कि गवाहों की मौखिक गवाही ‘आपकी दादागिरी’ दिखाने के लिए काफी है. साव ने 2011 के एक जबरन वसूली के मामले में दोषी ठहराये जाने और इसमें दी गयी सजा को शीर्ष अदालत में चुनौती दे रखी है. न्यायमूर्ति […]

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नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को झारखंड के पूर्व मंत्री योगेन्द्र साव से कहा कि गवाहों की मौखिक गवाही ‘आपकी दादागिरी’ दिखाने के लिए काफी है. साव ने 2011 के एक जबरन वसूली के मामले में दोषी ठहराये जाने और इसमें दी गयी सजा को शीर्ष अदालत में चुनौती दे रखी है. न्यायमूर्ति ए एम स्प्रे और न्यायमूर्ति इन्दु मल्होत्रा की पीठ ने झारखंड उच्च न्यायालय के 26 अप्रैल के आदेश को चुनौती देने वाली साव की अपील पर सुनवाई के लिए सहमति देते हुये यह टिप्पणी की.

उच्च न्यायालय ने इस मामले में साव को ढाई साल की सजा सुनाने के निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दायर अपील खारिज कर दी थी. शीर्ष अदालत ने इस मामले में झारखंड सरकार को नोटिस जारी करके उसका जवाब मांगा है. साव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश शर्मा ने कहा कि मजिस्ट्रेट की अदालत को इस मामले में कथित अपराध की अवधि से संबंधित टेलीफोन का पूरा विवरण (सीडीआर) देखने का अवसर नहीं मिला था.

उन्होंने कहा कि, ‘आरोप है कि मैने एक फोन काल की और पैसा मांगा लेकिन पूरी सीडीआर पेश नहीं किया गया. अदालत में पेश की गयी सीडीआर मार्च तक की थी जबकि कथित अपराध 24 अप्रैल, 2011 और 25 अगस्त, 2011 को हुआ था.’ खन्ना ने कहा कि निचली अदालत ने अभियोजन पक्ष के गवाहों और मुखबिर, जो हितग्राही पक्ष है, की गवाही पर भरोसा किया इस पर पीठ ने टिप्पणी की, ‘मौखिक गवाही आपकी दादागिरी दिखाने के लिये पर्याप्त हैं. हम सारे साक्ष्य का फिर से अवलोकन नहीं कर सकते हैं. आपके खिलाफ दो-दो अदालतों के फैसले हैं.’

शीर्ष अदालत ने कहा कि वह इस मामले पर विचार करेगा और इसके साथ ही उसने राज्य सरकार से इस अपील पर दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है. उच्च न्यायालय ने 26 अप्रैल को अपने फैसले में निचली अदालत के 28 जनवरी, 2015 के निर्णय में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया था. निचली अदालत ने योगेन्द्र साव को ढाई साल की सश्रम कैद की सजा सुनायी थी.

पुलिस ने रामगढ़ स्पांज आयरन प्राइवेट लिमिटेड के एक प्रबंधक की शिकायत पर साव के खिलाफ वसूली करने के आरोप में 25 अगस्त, 2011 को मामला दर्ज किया था. कंपनी के प्रबंधक का आरोप था कि साओ ने फोन पर उसे धमकी दी और पांच लाख रुपये की मांग की थी. साव उस समय कांग्रेस पार्टी के विधायक और सदन की प्रदूषण नियंत्रण समिति के सदस्य थे.

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