रांची : उदघाटन के बाद भी शुरू नहीं हुआ रिम्स का ट्रॉमा सेंटर

Updated at : 16 Jul 2019 5:50 AM (IST)
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रांची : उदघाटन के बाद भी शुरू नहीं हुआ रिम्स का ट्रॉमा सेंटर

नहीं हुई है ऑक्सीजन की व्यवस्था, एक सप्ताह बाद ही भर्ती हो पायेंगे मरीज रांची : मुख्यमंत्री रघुवर दास ने 14 जुलाई को रिम्स के ट्रॉमा सेंटर सह सेंट्रल इमरजेंसी का उदघाटन तो कर दिया, लेकिन यह मरीजों को भर्ती कर उनका इलाज करने के लिए अब भी तैयार नहीं है. ऑक्सीजन प्लांट के लिए […]

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नहीं हुई है ऑक्सीजन की व्यवस्था, एक सप्ताह बाद ही भर्ती हो पायेंगे मरीज
रांची : मुख्यमंत्री रघुवर दास ने 14 जुलाई को रिम्स के ट्रॉमा सेंटर सह सेंट्रल इमरजेंसी का उदघाटन तो कर दिया, लेकिन यह मरीजों को भर्ती कर उनका इलाज करने के लिए अब भी तैयार नहीं है.
ऑक्सीजन प्लांट के लिए निविदा प्रक्रिया की पूरी होने तक प्रबंधन ने ऑक्सीजन सिलिंडर से संचालन की तैयारी की थी. अॉक्सीजन सप्लाई करनेवाली एजेंसी को 100 ऑक्सीजन सिलिंडर उपलब्ध कराने को कहा गया था, लेकिन एजेंसी ने सोमवार को सिर्फ 10 ऑक्सीजन ही ट्रॉमा सेंटर के लिए मुहैया कराये. ऐसे में कम ऑक्सीजन सिलिंडर के कारण सोमवार से मरीजों को भर्ती नहीं किया गया.
ऑक्सीजन सिलिंडर की कम आपूर्ति की जानकारी मिलने पर निदेशक डॉ दिनेश कुमार सिंह ने एजेंसी को कह दिया है कि यही हाल रहा, तो इस पर विचार करना पड़ेगा कि भविष्य में आपको काम दिया जाये या नहीं. निदेशक ने सोमवार को ट्रॉमा सेंटर के डॉ प्रदीप कुमार भट्टाचार्या व अन्य फैकल्टी के साथ बैठक कर ट्राॅमा सेंटर के संचालन की रणनीति बनायी. निदेशक ने फैकल्टी को कहा कि एक सप्ताह के अंदर ट्रॉमा सेंटर का संचालन हर हाल में करना है.
हो रही मैन पावर की व्यवस्था, 40 पारा मेडिकल ने दिया योगदान : ट्रॉमा सेंटर को संचालित करने के लिए रिम्स में पारा मेडिकल कोर्स की परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके 40 छात्र-छात्राओं को एक वर्ष के लिए नियुक्त कर लिया गया है. इन्हें 10,000 रुपये के मानदेय पर रखा गया है. पारा मेडिकल स्टाफ में एनेस्थेसिया टेक्नीशियन, डायलिसिस टेक्नीशियन, इसीजी टेक्नीशियन, एक्स-रे टेक्नीशियन, ओटी असिस्टेंट व डेंटल चेयर असिस्टेंट आदि शामिल है.
रेडियोलॉजी उपकरण और पैथोलॉजी भी नहीं है : ट्राॅमा सेंटर में सीटी स्कैन, एक्सरे, अल्ट्रासाउंड सहित कई जांच उपकरण की व्यवस्था नहीं है. यह वजह है कि फिलहाल मरीजों को भर्ती नहीं लिया जा रहा है. इमरजेंसी में आये गंभीर मरीज की जांच के लिए यहां पैथोलॉजी भी नहीं है. रिम्स प्रबंधन को जल्द से जल्द इनकी भी व्यवस्था करनी होगी.
बेपटरी हो गयी है रिम्स की व्यवस्था
रांची. पूर्व विधायक उदय शंकर सिंह ने कहा है कि रिम्स की व्यवस्था बेपटरी हो गयी है. यहां वार्ड में पंखा तक नहीं है. मरीज खुद से पंखा झल रहे हैं. बाथरूम इतना गंदा है कि वहां जाने से व्यक्ति बीमार हो सकता है. वह सोमवार को आॅर्थो वार्ड में भर्ती एक मरीज से मिलने आये थे. उन्होंने कहा कि वह जिस मरीज को देखने आये हैं, उसका बुखार नापने के लिए कोई सिस्टर नहीं है. डेढ़ घंटे तक कोई डॉक्टर तक नहीं आया. पूर्व विधायक ने रिम्स अधीक्षक डॉ विवेक कश्यप से इसकी शिकायत की.
इंटरनेट फेल, हाथ से बनायी पर्ची, मरीज परेशान
रांची : रिम्स में सोमवार को इंटरनेट का लिंक फेल हो गया. इस कारण पंजीयन काउंटर पर बैठे कर्मचारियों ने मरीजों की मैनुअल पर्ची बनायी. इसमें काफी वक्त लग रहा था, जिससे मरीजों को परेशानी हुई. कई बार मरीजों और कर्मचारियों के बीच नोकझाेंक की स्थिति भी बनी. हालांकि, रिम्स के निजी सुरक्षाकर्मियों और सैप के जवानों ने मामले को शांत करा लिया. सबसे ज्यादा परेशानी दूर-दराज से आये मरीजों को हुई जो सुबह से ही पर्ची के लिए लाइन में खड़े थे.
इधर, कार्डियोलॉजी, यूरोलॉजी, पेडिएट्रिक सर्जरी, आंकोलॉजी व डेंटल कॉलेज में आॅनलाइन निबंधन के तहत पर्ची काटने का काम पूरी तरह ठप हो गया. इस वजह से लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ा. इसके बाद पुरानी बिल्डिंग में इन मरीजों की मैनुअल पर्ची काटी गयी. सोमवार को भीड़ होने के कारण लगभग 150 मरीज ओपीडी में बिना इलाज कराये लौट गये.
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