जल है तो कल है : खाली कोयला खदान का पानी होता है बर्बाद

रांची : जल संरक्षण की दिशा में सरकार ध्यान दे रही है लेकिन अब भी कई ऐसे क्षेत्र हैं जिस पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है. शहर से लेकर गांवों तक पानी बचाने की दिशा में काम हो रहा है. बड़े-बड़े अपार्टमेंट्स में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की तरफ भी ध्यान देना होगा. अक्सर […]
रांची : जल संरक्षण की दिशा में सरकार ध्यान दे रही है लेकिन अब भी कई ऐसे क्षेत्र हैं जिस पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है. शहर से लेकर गांवों तक पानी बचाने की दिशा में काम हो रहा है. बड़े-बड़े अपार्टमेंट्स में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की तरफ भी ध्यान देना होगा.
अक्सर हमारे किचन और बाथरूम का पानी यूं ही बर्बाद हो जाता है. सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से पानी को फिल्टर कर किचन गार्डेन, कार वाशिंग एवं बाथरुम फ्लशिंग समेत अन्य कार्यों में उपयोग किया जा सकता है. पानी को रिसाइकिल करना बेहद जरूरी है. झारखंड में 5.99 बिलियन क्यूबिक मीटर पानी उपलब्ध है. गुमला जिले में सर्वाधिक और कोडरमा में सबसे कम भूगर्भ जल है.
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