रांची : तेजस्विनी योजना के तहत किशोरियों को फिर मिलेगा पढ़ने-बढ़ने का मौका

Updated at : 04 Jul 2019 7:49 AM (IST)
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रांची : तेजस्विनी योजना के तहत किशोरियों को फिर मिलेगा पढ़ने-बढ़ने का मौका

समाज कल्याण विभाग की ओर से की जा रही है पहल दो के बाद अब अन्य 15 जिलों में की गयी लांच, मंत्री ने कहा – ईमानदारीपूर्वक करें योजना का संचालन रांची : 14 से 24 वर्ष तक की जिन किशोरियों और युवतियों ने किसी कारणवश पढ़ाई छोड़ दी है, उन्हें आगे पढ़ने और बढ़ने […]

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समाज कल्याण विभाग की ओर से की जा रही है पहल
दो के बाद अब अन्य 15 जिलों में की गयी लांच, मंत्री ने कहा – ईमानदारीपूर्वक करें योजना का संचालन
रांची : 14 से 24 वर्ष तक की जिन किशोरियों और युवतियों ने किसी कारणवश पढ़ाई छोड़ दी है, उन्हें आगे पढ़ने और बढ़ने के अवसर मिलेंगे. वह भी अपने आसपास ही. इसके लिए महिला, बाल विकास व सामाजिक सुरक्षा (समाज कल्याण) वित्तीय वर्ष 2017-18 से तेजस्विनी योजना का संचालन (पायलट) कर रहा है. 17 जिलों की करीब 10 लाख किशोरियों व युवतियों को इस योजना से जोड़ने का लक्ष्य है.
पहले चरण में दुमका व रामगढ़ जिले के बाद तीन जुलाई को अन्य 15 जिलों में इसे लांच किया गया. होटल कैपिटोल हिल में आयोजित कार्यक्रम में समाज कल्याण मंत्री डॉ लुइस मरांडी ने विभागीय अधिकारियों, जिला समाज कल्याण पदाधिकारियों तथा योजना की कार्यान्वयन एजेंसियों से कहा कि वह इस योजना काे संचालित करें.
योजना की क्लोज मॉनिटरिंग करें : विभागीय सचिव अमिताभ कौशल ने कहा कि इस योजना की क्लोज मॉनिटरिंग करनी होगी. देखना होगा कि इसके संचालन के दौरान व बाद में बालिका शिक्षा को कितना बढ़ावा मिला. किशोरियों व युवतियों के पलायन पर इसका क्या प्रभाव पड़ा तथा महिलाअों के पोषण स्तर में क्या बदलाव आया.
इन सब पर नजर रखकर ही हम इस योजना के उद्देश्य की पूर्ति कर सकेंगे. इससे पहले तेजस्विनी के परियोजना निदेशक डीके सक्सेना ने योजना तथा इसके क्रियान्वयन के बारे में विस्तार से बताया. इस अवसर पर समाज कल्याण निदेशक मनोज कुमार तथा कौशल विकास मिशन के महानिदेशक रवि रंजन के अलावा अन्य विभागीय पदाधिकारी, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी आदि उपस्थित थे.
इन जिलों में चलेगी योजना
रामगढ़ व दुमका (पहले से संचालित)
नये जिले : खूंटी, चतरा, देवघर, बोकारो, धनबाद, पलामू, गोड्डा, लातेहार, कोडरमा, जामताड़ा, लोहरदगा, सरायकेला-खरसावां, सिमडेगा, पाकुड़ व पूर्वी सिंहभूम.
पांच वर्षों तक योजना संचालन की कुल लागत : 540 करोड़ रुपये (विश्व बैंक से ऋण 378 करोड़ तथा राज्य का अंशदान 162 करोड़).
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