बाइक एंबुलेंस व मोहल्ला क्लिनिक सहित चार योजनाओं को स्वीकृति

Updated at : 29 Jun 2019 1:36 AM (IST)
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बाइक एंबुलेंस व मोहल्ला क्लिनिक सहित चार योजनाओं को स्वीकृति

रांची : मुख्यमंत्री ने जिन छह योजनाअों का जिक्र 2019-20 के बजट भाषण में किया था, उनमें से चार को राज्य योजना प्राधिकृत समिति की स्वीकृति मिल गयी है. इनमें नवजात शिशुअों के लिए बेबी किट की योजना, कॉमन सर्विस सेंटर द्वारा टेली मेडिसिन के माध्यम से होमियोपैथिक उपचार की योजना, शहरी झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों में […]

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रांची : मुख्यमंत्री ने जिन छह योजनाअों का जिक्र 2019-20 के बजट भाषण में किया था, उनमें से चार को राज्य योजना प्राधिकृत समिति की स्वीकृति मिल गयी है. इनमें नवजात शिशुअों के लिए बेबी किट की योजना, कॉमन सर्विस सेंटर द्वारा टेली मेडिसिन के माध्यम से होमियोपैथिक उपचार की योजना, शहरी झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों में मोहल्ला क्लिनिक की योजना तथा दुर्गम इलाके के लिए बाइक एंबुलेंस योजना शामिल हैं. इसकी जानकारी स्वास्थ्य मंत्री रामचंद्र चंद्रवंशी ने सूचना भवन में प्रेस वार्ता में दी.

उन्होंने बताया कि 23 मानकों के आधार पर नीति आयोग द्वारा झारखंड को राजस्थान व हरियाणा के साथ देश भर में पहली रैकिंग मिलना गर्व की बात है. विभागीय सचिव नितिन मदन कुलकर्णी, रिम्स निदेशक डॉ डीके सिंह, एमडी एनएचएम शैलेंद्र कुमार चौरसिया, झारखंड एड्स कंट्रोल सोसाइटी के परियोजना निदेशक मृत्युंजय कुमार वर्णवाल की मौजूदगी में मंत्री ने बताया कि चार प्रमंडलीय मुख्यालय हजारीबाग, दुमका, पलामू व चाईबासा में राजकीय फार्मेसी संस्थान की स्थापना के लिए करीब 48.20 करोड़ रु की स्वीकृति दी गयी है.
गौरतलब है कि अभी रांची में ही राज्य का अकेला राजकीय फार्मेसी कॉलेज है. रिम्स में निजी प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सकों के संबंध में पूछे गये सवाल पर निदेशक रिम्स डॉ डीके सिंह ने बताया कि अाठ चिकित्सकों को इसके लिए नोटिस किया गया है, एक को यूनिट इंचार्ज के पद से हटाया गया है तथा एक का इंक्रीमेंट रोका गया है.
इस मुद्दे पर मंत्री ने कहा कि खुद सीएम ही अब इस मामले को देख रहे हैं. प्रेस वार्ता के दौरान मंत्री व विभागीय अधिकारियों ने विभाग की उपलब्धि की चर्चा की. वहीं सीएम के संज्ञान के लिए रिम्स से संबंधित कुछ मुद्दे भी बताये गये.
मुख्यमंत्री के संज्ञान के लिए रिम्स संबंधी मुद्दे
मरीजों व नये विभागों के मद्देनजर 2.5 लाख वर्ग फीट अोपीडी एरिया का निर्माण करायें. इसके लिए 100 करोड़ की जरूरत होगी.
एमसीआइ के मापदंड के अनुसार प्राध्यापक व सह प्राध्यापकों के लिए 40 फ्लैट (मल्टीस्टोरी ब्लॉक) का निर्माण हो.
क्षेत्रीय नेत्र संस्थान के लिए विभिन्न पदों के सृजन का प्रस्ताव भेजा गया है, जो अब तक लंबित है.
कुछ आवश्यक विभाग गैसट्रोइंट्रोलॉजी, इंडोक्रिनोलॉजी, पीएमआर व न्यूक्लियर मेडिसिन जेनेटिक डिजीज के लिए पद सृजित किया जाना है.
रिम्स में एमबीबीएस की सीटें 150 से बढ़ा कर 250 की जानी है. इसके लिए कुछ विभागों में चिकित्सकों व अन्य तकनीकी कर्मियों के पद सृजन की आवश्यकता है.
रिम्स की चहारदीवारी का निर्माण व अतिक्रमण मुक्त कराना जरूरी है.
गेट नंबर दो से ही एंबुलेंस व मरीजों का आना-जाना होता है. यहां से दवाई व अन्य दुकानों को शिफ्ट करने की जरूरत है.
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