रांची : ये कैसा शहर है जहां पार्किंग तक नहीं

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 12 Jun 2019 9:16 AM

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अजय दयाल राजधानी के बाजारों में वाहन खड़ा करने की व्यवस्था नहीं, परेशान होते हैं लोग रांची : राजधानी रांची में वाहनों के लिए कोई भी स्थायी पार्किंग नहीं है. ऐसे में सड़कों पर ही पार्किंग बना दी गयी है. शहर की कई सड़कें ऐसी हैं, जहां वाहन पार्क किये जाने की वजह से लोगों […]

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अजय दयाल
राजधानी के बाजारों में वाहन खड़ा करने की व्यवस्था नहीं, परेशान होते हैं लोग
रांची : राजधानी रांची में वाहनों के लिए कोई भी स्थायी पार्किंग नहीं है. ऐसे में सड़कों पर ही पार्किंग बना दी गयी है. शहर की कई सड़कें ऐसी हैं, जहां वाहन पार्क किये जाने की वजह से लोगों को चलने के लिए जगह नहीं मिलती है. मेन रोड समेत शहर के कई हिस्सों में स्थित मॉल के सामने पार्किंग तो है, लेकिन यहां पार्किंग शुल्क नगर निगम वसूलता है.
अपरा बाजार राजधानी का सबसे व्यावसायिक केंद्र है, लेकिन यहां भी पार्किंग की कोई व्यवस्था नहीं है. यहां बहुमंजिली इमारतों में हर प्रकार की दुकानें है. लेकिन, कहीं भी दोपहिया या चारपहिया वाहनों के लिए पार्किंग नहीं है. दुकानदार और उनके कर्मचारी दुकान के सामने ही वाहन खड़ा कर देते हैं, जिसकी वजह से खरीदारों को वाहन खड़ा करने की जगह नहीं मिल पाती है. ऐसे में लोग जहां-तहां वाहन खड़ा कर देते हैं, जिससे अपर बाजार की हर गली अक्सर जाम ही रहती है.
शहीद चौक से महावीर चौक के बीच तो हमेशा जाम की स्थिति देखी जा सकती है. हालांकि, झारखंड चेंबर की पहल नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस ने अपर बाजार की कई सड़कों को वन-वे करने की योजना बनायी है. उम्मीद है कि इस व्यवस्था से लोगों को थोड़ी-बहुत राहत जरूर मिलेगी.
संत जेवियर्स कॉलेज और काली मंदिर के पास रोड पर ही ऑटो स्टैंड
संत जेवियर्स काॅलेज के सामने नामकुम और कांटाटोली से मेन रोड चलने वाले पेट्रोल ऑटो का स्टैंड बना दिया गया है. वहां से नगर निगम द्वारा पार्किंग शुल्क वसूला जाता है.
वहां की बंदोबस्ती की गयी है. वहां ठेकेदार के लोगों द्वारा पार्किंग शुल्क लिया जाता है़ उसी प्रकार मेन रोड के काली मंदिर(चर्च रोड) के पास डोरंडा हिनू चलने वाले ऑटो का स्टैंड बना हुआ है. जबकि, उनका स्टैंड संकटमोचन मंदिर के बगल में है. लेकिन रोड पर ऑटो स्टैंड बने होने के कारण लोगाें को परेशानी का सामना करना पड़ता है. वाहन चालकों को ही नहीं पैदल चलने वाले लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है.
मेन रोड के आधे हिस्से पर वाहनों का कब्जा
वर्तमान में कई जगह रोड को ही पार्किंग बना दी गयी है. मेन रोड में अलबर्ट एक्का चौक के सामने रोड पर ही कार व बाइक पार्किंग बनी हुई है. अलबर्ट एक्का चौक से ओवरब्रिज जानेवाले रास्ते पर रोड केबांयी ओर कार और बाइक पार्किंग बनी हुई है. यहां बाइक से दस व कार से 20 रुपये पार्किंग शुल्क वसूला जाता है.
जी नाॅस्टिक को दिया गया था 1़ 10 करोड़ का ठेका
कुछ दिन पहले रांची नगर निगम ने बेंगलुरु की कंपनी जी नॉस्टिक को मेन रोड से अोवरब्रीज तक का पार्किंग का ठेका दिया था.कंपनी घंटा के हिसाब से पार्किंग का चार्ज वसूलता थी, जिसके कारण हमेशा विवाद होता रहता था. कंपनी ने रांची में 45 से अधिक कर्मचारी रखे हुए थे, जिसके पास एक मशीन होती थी. उस मशीन के माध्यम से पार्किंग चार्ज काट कर वाहन चालक को दिया जाता था. बाइक से एक घंटे के लिए 20 तथा कार वालों से एक घंटे के लिए 40 रुपये वसूले जाते थे. बाद में नगर निगम ने कंपनी को हटा दिया और पार्किंग चार्ज स्वयं से वसूलने लगा.
मॉल में खरीदारी करने पहुंचे लोगों को होती है परेशानी
इन सभी जगहों पर अब रांची नगर निगम अपने स्तर से पार्किंग शुल्क वसूलता है. मॉल में खरीदारी करनेवाले कार चालक से 40 और बाइक चालक से 20 रुपये की वसूली की जाती है. इन जगहों पर नगर निगम के टिकट पर होमगार्ड जवानों द्वारा पार्किंग शुल्क लिया जाता है.
कई बार लोग कहते हुए निकलते हैं कि 100 रुपये का सामान खरीदने आये थे और 40 रुपये पार्किंग चार्ज ही लग गया. मॉल या शॉपिंग कॉम्प्लेक्स वालों को अपने स्तर से पार्किंग की व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि खरीदारी करने आनेवालों को परेशानी न हो. मॉल से खरीदारी का बिल दिखाने पर उनसे पार्किंग शुल्क नहीं लिया जाना चाहिए.
नो पार्किंग में लगे वाहनों को जब्त भी किया जाता था
जी नाॅस्टिक कंपनी के कर्मचारी नो पार्किग में लगे वाहनाें को जब्त भी कर लेते थे. कार को क्रेन से और दोपहिया वाहनों को ट्रक पर लाद कर जयपाल सिंह स्टेडियम में लाकर लगा देते थे.
जब लोग मॉल या अपने काम से बाहर निकलते थे तो नियत स्थान पर वाहन नहीं मिलती थी. उन्हें बताया जाता था कि आपका वाहन नो पार्किंग में लगा हुआ था, उसे जब्त कर लिया गया है. उसके बाद संबंधित वाहन चालक जयपाल सिंह स्टेडियम पहुंचते थे और वहां से पार्किंग चार्ज देकर अपने वाहन को ले जाते थे.
दोपहिया वाहन चालकों से पार्किंग शुल्क का दोगुना तिगुना चार्ज वसूला जाता था. जबकि कार मालिकों से क्रेन का भाड़ा के जोड़कर पार्किंग चार्ज वसूला जाता था. इससे कई बार झगड़ा झंझट भी हुआ था. इससे कानून-व्यवस्था पर भी असर पड़ता था. इन सारी बातों को देखते हुए निगम ने कंपनी को दोबारा ठेका नहीं दिया और स्वयं तथा ठेकेदार के माध्यम से पार्किंग शुल्क वसूलने की बात सोची.
फाइलों में ही दबी है मल्टी स्टोरेज पार्किंग बनाने की योजना
राजधानी के मुख्य बाजारों को जाम की समस्या से मुक्ति दिलाने के उद्देश्य से कई जगहों पर मल्टी स्टोरेज पार्किंग बनाने की योजना बनायी गयी थी. हालांकि, अब तक यह योजना फाइलों में ही दबी है, क्योंकि नगर विकास विभाग को निर्माण के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल पा रही है.
ऑटो स्टैंड के लिए होता रहा है
आंदोलन : झारखंड प्रदेश डीजल ऑटो चालक महासंघ के दिनेश सोनी व अर्जुन यादव गुट के द्वारा हमेशा आंदोलन होता रहा है. उनके आंदोलन की प्रमुख मांगों में ऑटो स्टैंड बनाने की मांग हमेशा आंदोलन का हिस्सा रहा है. झारखंड बने लगभग 19 वर्ष हो गये, लेकिन शहर में कहीं भी स्थायी अॉटो स्टैंड अब तक नहीं बना है.
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