रांची रिम्स: डॉक्टर मरीजों को लिखते हैं एक दर्जन दवा, सेटिंग की दुकान पर ही मिलती है
Updated at : 09 Jun 2019 8:10 AM (IST)
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न्यूरो सर्जरी विभाग के आेपीडी मेेें परामर्श लेने पर मरीजों की जेब हो जाती है खाली रांची : रिम्स के न्यूरो सर्जरी विभाग में डॉक्टरी परामर्श के बाद दवा खरीदने में मरीजों की जेब ढीली हो जाती है. डॉक्टर मरीज को लगभग एक दर्जन दवा लिख देते हैं, जिसकी कीमत नौ से 10,000 रुपये होती […]
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न्यूरो सर्जरी विभाग के आेपीडी मेेें परामर्श लेने पर मरीजों की जेब हो जाती है खाली
रांची : रिम्स के न्यूरो सर्जरी विभाग में डॉक्टरी परामर्श के बाद दवा खरीदने में मरीजों की जेब ढीली हो जाती है. डॉक्टर मरीज को लगभग एक दर्जन दवा लिख देते हैं, जिसकी कीमत नौ से 10,000 रुपये होती है.
दवाओं की लिस्ट में तीन से चार प्रकार के टॉनिक भी शामिल होते हैं, जिसे मरीज को तीन से चार माह तक खाना पड़ता है. टॉनिक के अलावा मरीज को प्रोटीन पाउडर भी लिखा जाता है, जिसकी कीमत बहुत अधिक होती है. डॉक्टर द्वारा लिखी गयी सारी दवाएं कुछ खास दवा दुकानों पर ही मिलती हैं.
सेटिंग वाले दवा दुकानदार के दलाल ओपीडी के बाहर खड़े रहते हैं और जो मरीज को सीधे उक्त दवा दुकान में भेजते हैं. न्यूरो सर्जरी विभाग के डाॅक्टराें द्वारा ज्यादा दवाएं लिखने की जानकारी रिम्स प्रबंधन को भी है, लेकिन कोई ठोस पहल नहीं की जाती है. हालांकि प्रबंधन द्वारा कई बार डॉक्टरों को अनावश्यक दवा नहीं लिखने का निर्देश दिया गया है, फिर भी इसका असर डॉक्टरों पर नहीं पड़ रहा है.
जेनेरिक दवाएं लिखी जाती, तो मरीजों को मिलती राहत
न्यूरो सर्जरी विभाग के आेपीडी में डॉक्टरों द्वारा लिखी गयी दवाएं अगर जेनेरिक होती, तो मरीजों को काफी राहत मिलती. जानकार बताते हैं कि जिन मरीजों को ओपीडी या वार्ड से लिखी गयी दवाओं को खरीदने में नौ से 10,000 रुपये का खर्च आता है.वही दवा जेनेरिक में 1500 से 2,000 रुपये में मिल जाती.
पर्ची देख भेज देते हैं सेटिंग वाली दुकान
न्यूरो सर्जरी विभाग के ओपीडी में लिखी गयी दवाओं को खरीदने जब मरीज व उसके परिजन जाते हैं, तो मेडिकल चौक स्थित दवा दुकानदार भी बता देते हैं उक्त दवा कौन सी खास दुकान पर मिलेगी.
केस स्टडी
न्यूरो सर्जरी विभाग के ओपीडी में परामर्श के बाद सरजू कुमार काे वार्ड में भर्ती कर लिया गया. करीब एक सप्ताह तक मरीज अस्पताल मेें भर्ती रहा. छुट्टी के समय डॉक्टरों ने उसे करीब 11 दवाएं लिखी. उक्त दवा को खरीदने में नौ हजार रुपये खर्च हो गये. दवा की सूची में तीन सिरप व एक प्रोटीन पाउडर शामिल था. मरीज को ये दवाएं सिर्फ एक माह की दी गयी थी. एक माह बाद दोबारा मरीज को बुलाया गया.
इमरजेंसी में दवाओं की कमी, मरीजों को हो रही परेशानी
रांची : रिम्स की इमरजेंसी व वार्ड में जरूरी दवा नहीं होने का खामियाजा मरीजाें का उठाना पड़ रहा है. शनिवार को इमरजेंसी आनेवाले गंभीर मरीजों को भी परेशानी हुई.
इमरजेंसी में आवश्यक दवाआें की कमी होने पर भी डॉक्टर बाहर की दवा नहीं लिख रहे हैं. डॉक्टरों ने बाहर की दवा नहीं लिखने का फैसला लिया है. हालांकि मरीज के परिजनों द्वारा अनुरोध करने पर जूनियर डॉक्टर दवा लिख कर बाहर से मंगा रहे है. परिजनों से कहा जा रहा है कि दवा आपके आग्रह पर मंगाया जा रहा है. एक मरीज को पेट में असहाय दर्द था, लेकिन डॉक्टर उसके लिए बाहर से दवा नहीं मंगा रहे थे. काफी आग्रह पर दवा लिखी गयी. दवा देने के बाद मरीज को राहत मिली.
ट्रॉप टी किट नहीं होने से हो रही परेशानी
इमरजेंसी में हार्ट अटैक की जांच के उपयोग में आने वाला ट्रॉप टी किट नहीं है. इससे डॉक्टरों के साथ-साथ मरीजों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. परिजनों के अनुरोध पर डाॅक्टर ट्रॉप टी किट बाहर से मंगा रहे हैं.
बदले जा सकते हैं रिम्स के डीन डॉ आरके श्रीवास्तव
रांची. रिम्स के डीन डॉ आरके श्रीवास्तव को बदलने की तैयारी चल रही है. सूत्रों की मानें तो प्रबंधन ने इसकी तैयारी कर ली है. शीघ्र इस संबंध में आदेश निर्गत कर लिया जायेगा. डॉ श्रीवास्तव विगत दो साल से डीन के पद पर कार्यरत हैं, इसलिए प्रशासनिक कारणों से उनको बदलने की तैयारी चल रही है. हालांकि इस संबंध में अभी कोई आदेश जारी नहीं किया गया है.
डॉ उमेश प्रसाद मामले में नहीं बनेगी जांच कमेटी
रांची. यूनिट इंचार्ज के पद से हटाये गये डॉ उमेश प्रसाद के मामले की जांच के लिए कमेटी गठित नहीं की जायेगी. निदेशक डॉ दिनेश कुमार सिंह ने कहा है कि जो जांच हुई है, वह पर्याप्त है. दोबारा जांच कमेटी गठित करने का कोई मतलब नहीं है. रिम्स टीचर्स एसोसिएशन ने निदेशक से मिल कर बिना जांच कमेटी की रिपोर्ट आने की बात कह डॉ उमेश प्रसाद पर की गयी कार्रवाई पर आपत्ति जतायी थी.
रांची : अधीक्षक कार्यालय की दीवार पर लगी घड़ी बतायेगी कि डॉक्टर समय से अस्पताल आ रहे या नहीं
रांची : रिम्स प्रबंधन ने डॉक्टर व कर्मचारियों को ड्यूटी का समय से पालन कराने के लिए अधीक्षक कार्यालय के सामने दीवार पर बड़ी घड़ी लगा दी है. वहीं अस्पताल परिसर में जगह-जगह पोस्टर चिपकाया गया है, जिसमें लिखा हुआ है कि कर्मचारी समय का पालन करें. घड़ी व पोस्टर लगाये जाने पर रिम्स के डॉक्टरों में नाराजगी है. डॉक्टरों ने शनिवार को टेलीमेडिसिन में बैठक कर इस पर विरोध प्रकट किया. डाॅक्टरों का कहना है कि उनको नीचा दिखाया जा रहा है.
हम अगर समय से अस्पताल नहीं आते हैं, तो रिम्स में लगातार मरीजों की संख्या कैसे बढ़ रही है. रिम्स पर लोगों का विश्वास कैसे बढ़ा है. सूत्र बताते हैं कि निदेशक डॉ दिनेश कुमार सिंह डॉक्टरों के समय पर आने की जानकारी के लिए सुबह एक घंटा अधीक्षक कार्यालय के गेट पर घूमते रहे. इसके बाद उन्होंने घड़ी लगाने का आदेश दिया.
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