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किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के फायदे बताने के लिए झारखंड के गांवों में खेती करेंगे कृषि विशेषज्ञ

Updated at : 07 Jun 2019 10:43 AM (IST)
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किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड के फायदे बताने के लिए झारखंड के गांवों में खेती करेंगे कृषि विशेषज्ञ

मिथिलेश झा रांची : जैसे-जैसे आबादी बढ़ रही है, देश और दुनिया में खेती योग्य जमीन (Agricultural Land) लगातार कम हो रही है. ऐसे में किसानों (Farmers) की आय (Income) बढ़ाना सरकार के सामने एक चुनौती है. नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की सरकार ने वर्ष 2022 तक किसानों की आय (Farmers Income) दोगुनी करने का […]

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मिथिलेश झा

रांची : जैसे-जैसे आबादी बढ़ रही है, देश और दुनिया में खेती योग्य जमीन (Agricultural Land) लगातार कम हो रही है. ऐसे में किसानों (Farmers) की आय (Income) बढ़ाना सरकार के सामने एक चुनौती है. नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की सरकार ने वर्ष 2022 तक किसानों की आय (Farmers Income) दोगुनी करने का लक्ष्य रखा है. इसके लिए कई उपाय किये जा रहे हैं. झारखंड सरकार इन उपायों को लागू करने में तेजी दिखा रही है. राज्य के गांवों की मिट्टी का डिजिटल नक्शा (Digital Map) तो बनाया ही जा रहा है, किसानों को विभागीय कर्मचारी मृदा स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Card) की सलाह के मुताबिक खेती करके बतायेंगे कि कैसे उसी जमीन से अधिक अनाज का उत्पादन कर सकते हैं.

इसे भी पढ़ें : किसान कल्याण योजना : गांवों की मिट्टी की सेहत का हाल बतायेगा डिजिटल नक्शा

इसके लिए कृषि विभाग (Agriculture Department) ने एक योजना बनायी है. योजना के मुताबिक, किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Card) के फायदे बताये जायेंगे. इसके तहत, जिले के हर प्रखंड (Block) के एक गांव में विभागीय कर्मचारी जायेंगे. गांव की हर खेत की मिट्टी का सैंपल (Soil Sample) लेंगे. उसकी जांच करेंगे. मिट्टी की जांच के बाद उसका जरूरी उपचार करेंगे. इसके बाद उस खेत में फसल की बुवाई होगी.

फसल कटने के बाद किसानों को बताया जायेगा कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Card) में विशेषज्ञ की सलाह के क्या फायदे हुए. उन्हें जांच के पहले की उपज और जांच के बाद की उपज के आधार पर इस कार्ड का महत्व समझाया जायेगा. स्टेट एग्रिकल्चरल मैनेजमेंट एंड एक्सटेंशन ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (SAMETI) के निदेशक सुभाष सिंह कहते हैं कि किसानों की आय बढ़ाने और बेहतर उत्पादन के लिए इस योजना पर काम होगा.

श्री सिंह ने बताया कि किसान अपने खेत की मिट्टी की जांच तो करवा लेते हैं, लेकिन उसकी रिपोर्ट नहीं देखते. खेत की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड में जो सलाह दी जाती है, उस पर वे अमल नहीं करते. उन्होंने कहा कि जिस तरह इन्सान का शरीर है, उसी तरह मिट्टी भी है. मिट्टी में कई पोषक तत्व होते हैं, जिनकी कमी या अधिकता से खेत की उत्पादकता घट जाती है.

इसलिए सॉयल हेल्थ कार्ड के अनुरूप खेतों का उपचार जरूरी है. किसानों को इसका प्रैक्टिकल करके दिखाया जायेगा. विभाग का मानना है कि बीज और मिट्टी के उपचार से जब फसल की उपज बढ़ी हुई मिलेगी, तो निश्चित ही किसान इसके महत्व को समझेंगे.

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