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विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष : झारखंड में वायु प्रदूषण से हर साल 30 हजार लोगों की मौत

Updated at : 05 Jun 2019 7:57 AM (IST)
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विश्व पर्यावरण दिवस पर विशेष : झारखंड में वायु प्रदूषण से हर साल 30 हजार लोगों की मौत

मनोज सिंह रांची : झारखंड के कई जिलों में वायु प्रदूषण का व्यापक असर है. खनन क्षेत्र होने के कारण यहां के लोगों को वायु प्रदूषण से होनेवाली बीमारियां भी ज्यादा होती हैं. इससे स्थायी विकलांगता का भी खतरा बना रहता है. पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के आंकड़े बताते हैं कि राज्य में औसतन […]

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मनोज सिंह
रांची : झारखंड के कई जिलों में वायु प्रदूषण का व्यापक असर है. खनन क्षेत्र होने के कारण यहां के लोगों को वायु प्रदूषण से होनेवाली बीमारियां भी ज्यादा होती हैं. इससे स्थायी विकलांगता का भी खतरा बना रहता है.
पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के आंकड़े बताते हैं कि राज्य में औसतन करीब 25 लाख लोग हर साल वायु प्रदूषण के कारण मौत, बीमार या विकलांगता के शिकार होते हैं. यह कुल आबादी का करीब 8.5 फीसदी है. वर्ष 1990 की तुलना में आज की स्थिति में करीब एक फीसदी सुधार हुआ है. इसके बावजूद यह आंकड़ा काफी बड़ा है. इससे अधिक मौत और विकलांगता कुपोषण और सफाई संबंधी बीमारियों से होती है. ब्रिटिश जर्नल लैनसेट कमीशन के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2017 में एक लाख में 100 लोगों की मौत वायु प्रदूषण से हुई थी.
राज्य की वर्तमान आबादी के हिसाब से करीब 30 हजार लोगों की मौत वायु प्रदूषण से हर साल हो रही है. देश में करीब 1.2 मिलियन की मौत वायु प्रदूषण से भारत सरकार ही मानती है कि देश में कुल मौत का करीब 13 फीसदी का कारण वायु प्रदूषण है. यह संख्या करीब 1.2 मिलियन होती है. यह देश में मौत का तीसरा सबसे बड़ा कारण है. वायु प्रदूषण से क्रोनिक अॉब्सट्रेक्टिव प्लोमनरी डिजिज (सीओपीडी) होने की संभावना 49 फीसदी रहती है.
करीब 33 फीसदी फेफड़े के कैंसर का कारण वायु प्रदूषण ही है. 22 फीसदी डायबिटिक का कारण भी यही है. करीब 22 फीसदी हृदय रोग संबंधी बीमारी भी वायु प्रदूषण के कारण होता है. 15 फीसदी हार्ट अटैक का कारण भी वायु प्रदूषण है.
राज्य के सात शहरों को एनएएमपी में शामिल किया है भारत सरकार ने भारत सरकार ने झारखंड के सात शहरों को नेशनल एयर मॉनिटरिंग प्रोग्राम (एनएएमपी) में शामिल किया है. इस कार्यक्रम का संचालन भारत सरकार का प्रदूषण नियंत्रण पर्षद कर रहा है. इन शहरों में वायु प्रदूषण मापनेवाले 10 यंत्र लगाये गये हैं.
धनबाद में दो, जमशेदपुर में दो, रांची, झरिया, सरायकेला और पश्चिमी सिंहभूम में एक-एक यूनिट लगायी गयी है. वायु प्रदूषण पर काम करनेवाली संस्था सीड की अंकिता ज्योति बताती हैं कि झारखंड के कई शहरों की स्थिति खतरनाक हो गयी है. कुछ शहर खतरनाक स्तर की ओर हैं. इसको लेकर कम से कम राज्य के कुछ प्रमुख शहरों को लेकर ग्रास रूट स्तर पर योजना तैयार होनी चाहिए. इससे आनेवाले कुछ दिनों में रांची को दिल्ली बनने से रोका जा सकता है.
स्टैंडर्ड लिमिट से दोगुना अधिक प्रदूषित है रांची की आबोहवा
रांची की आबोहवा पीएम-10 के स्टैंडर्ड लिमिट से करीब डेढ़ गुना अधिक प्रदूषित है.
वर्ष 2017 में पीएम-10 रांची में 150 मिलीग्राम से अधिक पाया गया. इसका स्टैंडर्ड लिमिट 60 होना चाहिए. सबसे खराब स्थिति झारखंड में झरिया की है. यहां करीब 225 एमजी से अधिक स्टैंडर्ड लिमिट पाया गया है. इसके अतिरिक्त धनबाद व जमशेदपुर की स्थिति भी स्टैंडर्ड लिमिट से अधिक है.
25 लाख लोग औसतन हर साल वायु प्रदूषण के कारण मौत या विकलांगता के शिकार होते हैं राज्य में
-पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया
वर्ष 2017 में एक लाख में
100 लोगों की
मौत वायु प्रदूषण से हुई थी
8% प्रभावित हैं कुल आबादी के
60 होना चाहिए पीएम-10 का स्टैंडर्ड लिमिट
सबसे खराब स्थिति
झरिया : 225 एमजी से अधिक स्टैंडर्ड लिमिट है
धनबाद व जमशेदपुर की स्थिति भी स्टैंडर्ड लिमिट से अधिक है
स्टैंडर्ड लिमिट से दोगुना अधिक प्रदूषित है रांची
13% मौत कारण वायु प्रदूषण है पूरे देश में
पर्यावरण दिवस पर आज प्रभात खबर की संगोष्ठी
रांची : प्रभात खबर द्वारा 05 जून को पर्यावरण दिवस के मौके पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया है. जल संकट व उसके निदान विषय पर पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता विचार रखेंगे. मंत्री व पर्यावरणविद् सरयू राय मुख्य वक्ता होंगे. इसमें जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के निदेशक पंकज कुमार व पर्यावरणविद् एवं भूतत्ववेत्ता डॉ अनल सिन्हा भी रहेंगे.
इसमें विभिन्न सामाजिक संगठन व केंद्र व राज्य सरकार के संस्थाओं के प्रमुख भी हिस्सा लेंगे. कार्यक्रम में चेंबर के पूर्व अध्यक्ष विकास सिंह भी मौजूद रहेंगे.
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