रांची : तो पाताल में क्यों न पहुंचे पानी
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 04 Jun 2019 8:35 AM
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राजधानी में है 1.88 लाख घर, रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम केवल 21 हजार घरों में रांची : हर साल गर्मी के मौसम में राजधानी रांची की कुल आबादी का बड़ा हिस्सा पानी की भयंकर किल्लत झेलता है. कुएं, चापाकल और बोरिंग जवाब दे जाते हैं, क्योंकि राजधानी का भू-जलस्तर दिनोदिन पाताल में जा रहा है. […]
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राजधानी में है 1.88 लाख घर, रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम केवल 21 हजार घरों में
रांची : हर साल गर्मी के मौसम में राजधानी रांची की कुल आबादी का बड़ा हिस्सा पानी की भयंकर किल्लत झेलता है. कुएं, चापाकल और बोरिंग जवाब दे जाते हैं, क्योंकि राजधानी का भू-जलस्तर दिनोदिन पाताल में जा रहा है.
वास्तव में इस संकट के लिए राजधानीवासी ही जिम्मेदार हैं. जानकारी के अनुसार रांची नगर निगम क्षेत्र में कुल 1.88 लाख मकान हैं, लेकिन इनमें से केवल 21 हजार मकानों में ही रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का निर्माण कराया गया है. यानी शेष 1.67 लाख मकानों में जल संरक्षण की कोई व्यवस्था नहीं है. ऐसे में सवाल यह उठाता है कि पानी पाताल में क्यों न जाये?
इधर, रांची नगर निगम ने यह व्यवस्था की है कि जिन घराें में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का निर्माण नहीं कराया जायेगा, उन घरों के मालिकों से डेढ़ गुना होल्डिंग टैक्स वसूला जायेगा. नगर निगम ने इसी नियम का प्रयोग करते हुए शहरवासियों से होल्डिंग टैक्स के रूप में 48 करोड़ रुपये की वसूली की है. लेकिन, रांची नगर निगम के अधिकारी राजधानी के भू-जलस्तर को रिचार्ज करने की व्यवस्था अब तक नहीं कर पाये हैं.
नगर निगम भी कम जिम्मेदार नहीं
राजधानी के गिरते भू-जलस्तर को देखते हुए वर्ष 2017 में नगर निगम ने निर्णय लिया था कि वह अपने डेड हो चुके चापाकलों को रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम में परिवर्तित करेगा. इसके लिए 150 से अधिक चापाकलों को चिह्नित भी किया गया था. इस निर्णय को दो साल हो चुके हैं, लेकिन एक भी डेड चापाकल को रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम में परिवर्तित नहीं किया गया.
एक साल पहले ही राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने निगम बोर्ड की बैठक में अधिकारियों को यह आदेश भी दिया था कि निगम इस मामले में शहरवासियों के बीच रोल मॉडल बने. निगम अपने डेड चापाकलों को रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम में बदल कर शहरवासियों के बीच एक उदाहरण पेश करे. लेकिन, सांसद के इस आग्रह का भी असर निगम पर नहीं हुआ.
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