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रिम्स में चक्कर काटता रहा दिल का मरीज, नहीं हुआ इलाज निजी अस्पताल में तोड़ा दम

Updated at : 13 May 2019 6:48 AM (IST)
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रिम्स में चक्कर काटता रहा दिल का मरीज, नहीं हुआ इलाज निजी अस्पताल में तोड़ा दम

रांची : रिम्स प्रबंधन दावा कर रहा है कि कार्डियोलॉजी विंग के इमरजेंसी में दिल के मरीजों को आपातकालीन सेवाएं मिलनी शुरू हो गयी हैं. यहां चार बेड हैं, जहां आपात स्थिति में आये मरीजों का तत्काल इलाज हो रहा है. लेकिन, प्रबंधन के इस दावे की पोल खुल गयी है. यहां पहुंचे एक मरीज […]

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रांची : रिम्स प्रबंधन दावा कर रहा है कि कार्डियोलॉजी विंग के इमरजेंसी में दिल के मरीजों को आपातकालीन सेवाएं मिलनी शुरू हो गयी हैं. यहां चार बेड हैं, जहां आपात स्थिति में आये मरीजों का तत्काल इलाज हो रहा है.
लेकिन, प्रबंधन के इस दावे की पोल खुल गयी है. यहां पहुंचे एक मरीज को तुरंत इलाज नहीं मिला. मरीज काफी देर तक सेंट्रल इमरजेंसी और कार्डियेक इमरजेंसी के बीच चक्कर काटता रहा. बाद में परिजन उसे शहर के निजी अस्पताल (मेडिका) में ले गये, जहां देर रात उसकी मौत हो गयी. परिजनों का आरोप है कि रिम्स में उनके मरीज को समय पर इलाज नहीं मिला, जिससे उसकी मौत हुई है.
शनिवार की शाम गया (बिहार) के रहनेवाले किशोरी मोहन को उनके परिजन लेकर रिम्स पहुंचे. उन्हें सीने में दर्द की शिकायत थी. रिम्स का एक एंबुलेंस चालक उनका परिचित था, उसकी सलाह पर उन्हें रिम्स लाया गया था. यहां परिजन उन्हें कार्डियेक इमरजेंसी में ले गये. परिजनों की मानें, तो उस वक्त कार्डियेक इमरजेंसी में डॉक्टर नहीं थे. केवल एक नर्स थी. वहां से मरीज को कार्डियक आइसीयू लाया गया.
यहां तैनात दो जूनियर डॉक्टरों ने भी मरीज को नहीं देखा. सेंट्रल इमरजेंसी के डॉक्टरों का कहना था कि जब कार्डियेक इमरजेंसी शुरू हो गयी है, तो वहीं भर्ती करायें.
निजी अस्पताल भी गये, पर नहीं लिया भर्ती : रिम्स में इलाज नहीं होने पर मरीज को लेकर परिजन बरियातू के एक निजी कार्डियोलॉजिस्ट के पास गये. वहां भी डॉक्टर नहीं मिले. मरीज दोबारा कार्डियक इमरजेंसी पहुंचा, लेकिन वहां डॉक्टर नहीं थे. रात के करीब नौ बजे मरीज आलम अस्पताल पहुंचा, वहां भी कार्डियोलॉजिस्ट नहीं मिले. इसके बाद मरीज मेडिका पहुंचा. वहां उसे भर्ती तो ले लिया गया, लेकिन देर रात मरीज की मौत हो गयी.
निदेशक की सारी कवायद फेल : रिम्स निदेशक डॉ दिनेश कुमार सिंह भले ही रिम्स की चिकित्सा व्यवस्था को सुधारने में लगे हैं, लेकिन व्यवस्था सुधर नहीं रही है.
कार्डियोलॉजी में डीएम की पढ़ाई शुरू हो और हार्ट के गंभीर मरीजों को तत्काल बेहतर इलाज हो, इसके लिए करीब 10 दिन पहले कार्डियेक इमरजेंसी काे शुरू कराया. डॉक्टरों की ड्यूटी तय करायी. इमरजेेंसी में जूनियर डॉक्टर व इसीजी टेक्निशियन को नियुक्त किया, लेकिन कोई काम नहीं कर रहा है. मरीजों को सेंट्रल इमरजेंसी व कार्डियेक इमरजेंसी का चक्कर लगाना पड़ रहा है.
हमें भी ऐसी सूचना मिली है. कार्डियोलॉजी से जानकारी मांगी गयी है. डाॅक्टर ड्यूटी नहीं कर रहे हैं, लेकिन ड्यूटी तो करनी पड़ेगी. प्रबंधन को कड़ाई करनी होगी. इस मामले में जो भी दोषी होंगे, कार्रवाई की जायेगी.
डॉ डीके सिंह, निदेशक, रिम्स
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