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झारखंड के चार लोकसभा क्षेत्र में मतदान कल, चाईबासा व गिरिडीह में शांतिपूर्ण चुनाव कराना चुनौती

Updated at : 11 May 2019 2:21 AM (IST)
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झारखंड के चार लोकसभा क्षेत्र में मतदान कल, चाईबासा व गिरिडीह में शांतिपूर्ण चुनाव कराना चुनौती

रांची : लोकसभा के सातवें और झारखंड में तीसरे चरण में चार लोकसभा क्षेत्रों चाईबासा, गिरिडीह, धनबाद और जमशेदपुर में 12 मई को मतदान होना है. चारों लोकसभा क्षेत्रों में चाईबासा जिले में एक-दो थाना क्षेत्रों को छोड़ दिया जाये, तो अधिकांश थाना क्षेत्र नक्सल प्रभावित हैं. इनमें सोनुआ, गोइलकेरा, गुदरी, बड़गांव, किरीबुरू, जरायकेला, छोटा […]

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रांची : लोकसभा के सातवें और झारखंड में तीसरे चरण में चार लोकसभा क्षेत्रों चाईबासा, गिरिडीह, धनबाद और जमशेदपुर में 12 मई को मतदान होना है. चारों लोकसभा क्षेत्रों में चाईबासा जिले में एक-दो थाना क्षेत्रों को छोड़ दिया जाये, तो अधिकांश थाना क्षेत्र नक्सल प्रभावित हैं.

इनमें सोनुआ, गोइलकेरा, गुदरी, बड़गांव, किरीबुरू, जरायकेला, छोटा नागरा, मनोहरपुर, चिड़िया माइंस ओपी व टोंटो आदि थाना क्षेत्र अति नक्सल प्रभावित थाना क्षेत्रों की श्रेणी में आता है. इसी तरह गिरिडीह में पारसनाथ, उतरी डुमरी, निमियाघाट, पीरटांड़, कुकरा व मधुबन थाना क्षेत्र में भी नक्सलियों का ज्यादा प्रभाव माना जाता है.
वहीं, धनबाद में हरिहरपुर, राजगंज, तोपचांची, बनियाडीह, टुंडी, पूर्वी टुंडी व बरबड्डा नक्सल प्रभावित थाना क्षेत्रों की श्रेणी में आते हैं. जबकि जमशेदपुर में गुड़ाबांध समेत एक दो और थाना क्षेत्र नक्सलियों के आंशिक प्रभाव वाला माना जाता है.
विभागीय सूत्रों के मुताबिक चाईबासा जिले में फिलवक्त माओवादी पोलित ब्यूरो सदस्य और एक करोड़ के इनामी किशन दा, मिसिर बेसरा, अनल दा के अलावा सुरेश मुंडा और जीवन कंडुलना का दस्ता मौजूद है.
गिरिडीह की बात करें तो यहां पर नुनूचंद महतो, प्रशांत मांझी और बच्चन दा का दस्ता एक्टिव है. इसके पड़ोसी जिले धनबाद में भी नुनूचंद महतो दस्ता का प्रभाव माना जाता है. इसी तरह चाईबासा और सरायकेला जिले की सीमा पर हार्डकोर नक्सली विवेक उर्फ प्रयाग दा अपने दस्ते के साथ बताया जाता है.
ऐसे में लोकतंत्र के महापर्व को शांतिपूर्ण संपन्न कराना पुलिस प्रशासन के लिए भी चुनौतीपूर्ण है. खासकर चाईबासा और गिरिडीह लोकसभा के क्षेत्र में. वर्तमान में चाईबासा और गिरिडीह ही दो जिले ऐसे हैं, जहां पर प्रतिबंधित संगठन भाकपा माओवादियों का प्रभाव ज्यादा माना जाता है. ऐसे में सुरक्षाबलों को सतर्कता से विशेष रणनीति के तहत चुनाव के दौरान आने-जाने में सावधानी बरतनी होगी.
हालांकि इससे पूर्व 2014 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान उक्त चारों लोकसभा क्षेत्रों से किसी तरह की बड़ी वारदात नक्सलियों द्वारा किये जाने की खबर सामने नहीं आयी थी. अब तक पुलिस प्रशासन ने दो चरणों का चुनाव शांतिपूर्ण संपन्न कराने में सफलता पायी है. लिहाजा माना जाना चाहिए कि तीसरा चरण का चुनाव भी शांतिपूर्ण संपन्न होगा.
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