रांची : आइवीआरसीएल को कार्य देने के समय सीएम नहीं थे मधु कोड़ा, वसूली का आरोप निराधार

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हाइकोर्ट में प्रार्थी की ओर से वरीय अधिवक्ता आरएस मजूमदार ने रखा पक्ष मामला ठेका दिलाने के नाम पर 11.4 करोड़ रुपये की अवैध वसूली का मामले की अगली सुनवाई 16 जून को होगी रांची : झारखंड हाइकोर्ट के जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में मंगलवार को ठेका दिलाने के नाम पर 11.4 करोड़ रुपये […]

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हाइकोर्ट में प्रार्थी की ओर से वरीय अधिवक्ता आरएस मजूमदार ने रखा पक्ष
मामला ठेका दिलाने के नाम पर 11.4 करोड़ रुपये की अवैध वसूली का
मामले की अगली सुनवाई 16 जून को होगी
रांची : झारखंड हाइकोर्ट के जस्टिस राजेश शंकर की अदालत में मंगलवार को ठेका दिलाने के नाम पर 11.4 करोड़ रुपये की अवैध वसूली मामले में दायर क्वैशिंग याचिका पर सुनवाई हुई. अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए सीबीआइ को लॉ प्वाइंट पर तैयारी कर आने को कहा. मामले की अगली सुनवाई 16 जून को होगी.
इससे पूर्व प्रार्थी की अोर से पूर्व महाधिवक्ता सह वरीय अधिवक्ता आरएस मजूमदार ने पक्ष रखते हुए अदालत को बताया कि आइवीआरसीएल को ग्रामीण विद्युतीकरण के लिए 740 करोड़ रुपये का कार्य देने के समय मधु कोड़ा मुख्यमंत्री नहीं थे.
बाद में यह कार्य 1001 करोड़ रुपये का हो गया. पूर्व मुख्यमंत्री पर लगाया गया अवैध वसूली का आरोप पूरी तरह से गलत व निराधार है. उन पर विनोद सिन्हा के माध्यम से 11.4 करोड़ रुपये रिश्वत लेने के आरोपों की जांच कोर्ट के आदेश पर निगरानी से सीबीआइ को ट्रांसफर (19 अक्तूबर 2011) हुआ था.
जांच में सीबीआइ को कोई सबूत नहीं मिला. सीबीआइ ने मामले की गहराई से जांच करने के बाद वर्ष 2013 में ही क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर मामले को बंद करने का आग्रह किया था. इस पर सीबीआइ की विशेष अदालत ने कहा था कि निगरानी अदालत ने संज्ञान लिया था. चार्ज फ्रेम के समय क्लोजर रिपोर्ट को देखा जायेगा. इसके बाद हाइकोर्ट ने 24 अप्रैल 2018 को निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी. रोक स्वत: हटने के बाद सीबीआइ अदालत ने बिना संज्ञान लिये ही चार्ज फ्रेम कर दिया. श्री मजूमदार ने कहा कि पूर्व में निगरानी ने मामले की जांच कर चार्जशीट दायर की थी.
फिर अदालत ने संज्ञान लिया था. उसके बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच सीबीआइ से कराने की अधिसूचना जारी की थी. उसके बाद यह मामला निगरानी से सीबीआइ को ट्रांसफर हो गया. सीबीआइ अदालत बिना संज्ञान लिये कैसे चार्ज फ्रेम कर सकती है. यह विधिसम्मत नहीं है. उल्लेखनीय है कि प्रार्थी विनोद कुमार सिन्हा ने क्वैशिंग याचिका दायर कर निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी है.
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