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रांची : साल दर साल सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट योजना का दायरा बढ़ा रही सरकार, लेकिन…

बिपिन सिंह रांची : सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए राजधानी रांची सहित राज्य के अन्य शहरी क्षेत्रों में कवायद तेज कर दी गयी है. ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के तहत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में रांची नगर निगम, देवघर, पाकुड़ नगर परिषद, सरायकेला व चाकुलिया नगर पंचायत में भी सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की योजनाओं को तेजी से […]

बिपिन सिंह
रांची : सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए राजधानी रांची सहित राज्य के अन्य शहरी क्षेत्रों में कवायद तेज कर दी गयी है. ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के तहत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में रांची नगर निगम, देवघर, पाकुड़ नगर परिषद, सरायकेला व चाकुलिया नगर पंचायत में भी सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की योजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है. इस कार्य को पूरा करने के लिए दूसरी किस्त के तौर पर 15 करोड़ से ज्यादा की राशि भी उपलब्ध करा दी गयी है.
हालांकि, मौजूदा स्थिति यह है कि रांची में ही अब तक सूखा और गीला कचरा अलग-अलग रखने की व्यवस्था दुरुस्त नहीं हुई है. एक दशक बाद भी न तो इसका उठाव ठीक ढंग से हो पा रहा है और न ही इन अपशिष्टों का ठीक से प्रबंधन हो रहा. सभी कचरों को एक साथ संग्रह कर इसे झिरी के पास डंपिंग यार्ड में फेंका जा रहा है. जबकि, प्रोजेक्ट के तहत शहर से जमा किये जानेवाले कचरे की रिसाइकल कर खाद व बिजली बनाने की योजना थी.
धीमी गति से चल रहे कार्य
सरकार ठोस कचरा प्रबंधन (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट) की दिशा में तेजी से हो रहे सुधार की लाख दुहाई दे, लेकिन स्थिति इस मामले में एकदम अलग है. राज्य के शहरी क्षेत्र में हर दिन कचरे का पहाड़ खड़ा हो रहा है, परंतु इसके निबटारे में सरकारी तंत्र फिसड्डी है. देवघर, गिरिडीह, गोड्डा और पाकुड़ में प्लांट तैयार करने का काम भी रुका हुआ है. कई जगहों पर प्लांट के लिए जगह की पहचान कर नगर निकाय को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया ही संपन्न करायी जा रही है.
क्या है ठोस अपशिष्ट प्रबंधन का सही तरीका
घरों से कचरा उठाने से पहले उसे कम से कम दो भाग जैविक और अजैविक कचरा के रूप में अलग-अलग करना है. पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप(पीपीपी) मोड पर ट्रांसपोर्टेशन, वेस्ट प्रोसेसिंग व साइंटिफिक लैंडफिलिंग का काम पूरा होना है. इसके बाद जमा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्लांट के एरिया के आसपास ग्रीन बेल्ट विकसित किया जाना है.
वैज्ञानिक तरीके से कचरे को निबटाना अभी दूर की कौड़ी
विभाग ने एक साल पहले 8.11 फीसदी कचरे की री-साइकलिंग, 11.3 फीसदी कचरे को ठोस और तरल कचरे के रूप में अलग करने तथा 1.19 फीसदी कचरे को वैज्ञानिक तरीके से निबटाने का लक्ष्य रखा था. हालांकि, वैज्ञानिक तरीके से कचरे को निबटाने में स्थिति शून्य है. शहरी क्षेत्र में ठोस कचरा प्रबंधन से जुड़ी सेवाओं के विस्तार की बात करें, तो यह महज 18.30 फीसदी आबादी तक ही सीमित है.
Prabhat Khabar Digital Desk
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