आदर्श आचार संहिता से जुड़े वो महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधान, जो आपके लिए जानना है जरूरी

Updated at : 18 Apr 2019 10:54 PM (IST)
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आदर्श आचार संहिता से जुड़े वो महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधान, जो आपके लिए जानना है जरूरी

रांची : अपर मुख्‍य निर्वाचन पदाधिकार विनय कुमार चौबे ने बताया कि स्वच्छ, शांतिपूर्ण एवं निष्‍पक्ष निर्वाचन के संचालन के लिए विभिन्‍न अधिनियमों के अंतर्गत कई विधिक प्रावधान किये गये हैं. ये प्रावधान आदर्श आचार संहिता के प्रवर्तन एवं स्वच्छ निर्वाचन के संचालन को सुनश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण टूल्स हैं. इन प्रावधानों का […]

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रांची : अपर मुख्‍य निर्वाचन पदाधिकार विनय कुमार चौबे ने बताया कि स्वच्छ, शांतिपूर्ण एवं निष्‍पक्ष निर्वाचन के संचालन के लिए विभिन्‍न अधिनियमों के अंतर्गत कई विधिक प्रावधान किये गये हैं. ये प्रावधान आदर्श आचार संहिता के प्रवर्तन एवं स्वच्छ निर्वाचन के संचालन को सुनश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण टूल्स हैं. इन प्रावधानों का संक्षिप्‍त विवरण निम्‍नवत है –

उल्‍लंघन : लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम 1951 की धारा 125 – विभिन्‍न वर्गों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना. कोई भी व्यक्ति चुनाव के दौरान भारत के नागरिकों के विभिन्‍न वर्गों के बीच धर्म, मूल वंश, जाति, समुदाय या भाषा के आधार पर शत्रुता को बढ़ावा देता है या देने का प्रयत्न करता है.

सजा का प्रावधान : आईपीसी की धारा 153 एवं 505 (2) भी उपरोक्त संदर्भ में प्रभावी है. तीन वर्ष तक के कारावास या जुर्माना अथवा दोनों का भागी हो सकता है.

उल्‍लंघन : लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम 1951 की धारा 126 (1) – मतदान की समाप्ति के लिए नियत किये गये समय के पूर्व 48 घंटे की अवधि के दौरान किसी भी व्यक्ति के द्वारा (क) निर्वाचन के संबंध में किसी भी तरह के सार्वजनिक सभा या जुलूस का आयोजन नहीं किया जायेगा. (ख) चलचित्र, टेलीविजन आदि के माध्यम से चुनाव प्रचार नहीं किया जायेगा. (ग) जनता को आकर्षित करने हेतु कोई संगीत समारोह या कोई नाट्य अभिनय या कोई अन्य मनोरंजन आयोजित करके जनता के समक्ष चुनाव प्रचार नहीं किया जायेगा.

सजा का प्रावधान : धारा 126 (2) – उपरोक्त उपबंधों के उल्लंघन पर दो वर्ष तक के कारावास या जुर्माना या दोनों का प्रावधान है.

उल्‍लंघन : लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम 1951 की धारा 126 क (1) – कोई भी व्यक्ति निर्वाचन आयोग द्वारा अधिसूचित अवधि के दौरान एक्जिट पोल का संचालन, एक्जिट पोल सर्वेक्षण के परिणाम का प्रिंट या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से प्रकाशन या प्रचार अथवा किसी भी अन्य तरीके से प्रसार नहीं करेगा.

सजा का प्रावधान : धारा 126 क (3) – उक्त धारा का उल्लंघन करने पर दो वर्ष तक के कारावास या जुर्माना या दोनों के दंड का प्रावधान है.

मीडिया के लिए : लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम 1951 की धारा 126 (क) में निहित प्रावधानों के आलोक में भारत निर्वाचन आयोग द्वारा लोकसभा निर्वाचन 2019 के लिए पहले चरण के मतदान की तारीख 11 अप्रैल 2019 को पूर्वाह्न 7 बजे से लेकर अंतिम चरण के मतदान की तारीख 19 मई 2019 को अपराह्न 6:30 बजे तक की अवधि के दौरान किसी भी प्रकार के एक्जिट पोल के संचालन तथा प्रिंट या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया द्वारा इसके प्रकाशन या प्रचार अथवा किसी भी अन्य तरीके से उसके प्रसार पर प्रतिबंध लगाया गया है.

लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम 1951 की धारा 127 – कोई व्यक्ति ऐसी सार्वजनिक सभा में, जिसके संबंध में यह धारा लागू है, उसमें उपद्रव करने या दूसरों को उपद्रव के लिए प्रेरित करने पर छः माह तक के कारावास या जुर्माना अथवा दोनों दंड का भागी होगा.

लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम 1951 की धारा 127 (क) – कोई भी व्यक्ति ऐसी निर्वाचन पुस्तिका या पोस्टर, जिसके मुख्य पृष्ठ पर उसके मुद्रक और प्रकाशक का नाम या पता न हो, मुद्रित या प्रकाशित नहीं करेगा और न ही मुद्रित या प्रकाशित करायेगा.

यहां पर आईपीसी की धारा 171 (भ) का उल्लेख करना भी प्रासंगिक है. धारा 171 (भ) किसी उम्मीदवार की अनुमति के बगैर किसी व्यक्ति द्वारा चुनाव में उस उम्मीदवार की संभावनाओं को पोषित करने से संबंधित विज्ञापन या सर्कुलर आदि के प्रकाशन पर व्यय को प्रतिबंधित करता है.

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