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भाजपा के गढ़ में यूपीए को सहयोगी दलों का सहारा, चारों सीट भाजपा के पास, तीन पर बदले चेहरे, जमीन बचाने की चुनौती

Updated at : 18 Apr 2019 8:15 AM (IST)
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भाजपा के गढ़ में यूपीए को सहयोगी दलों का सहारा, चारों सीट भाजपा के पास, तीन पर बदले चेहरे, जमीन बचाने की चुनौती

लोस चुनाव के दूसरे चरण में होगा रांची, खूंटी, हजारीबाग व कोडरमा में मतदान रांची : राज्य में लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण में चार सीटों के लिए छह मई को मतदान होना है़ रांची, खूंटी, हजारीबाग और कोडरमा में चुनावी बिसात बिछ चुकी है़ प्रमुख पार्टियों के उम्मीदवार नामांकन के बाद पूरे दम-खम से […]

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लोस चुनाव के दूसरे चरण में होगा रांची, खूंटी, हजारीबाग व कोडरमा में मतदान
रांची : राज्य में लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण में चार सीटों के लिए छह मई को मतदान होना है़ रांची, खूंटी, हजारीबाग और कोडरमा में चुनावी बिसात बिछ चुकी है़ प्रमुख पार्टियों के उम्मीदवार नामांकन के बाद पूरे दम-खम से मैदान में उतर गये है़ं वोटरों को गोलबंद करने के लिए एनडीए-यूपीए का प्रचार तंत्र सक्रिय हो गया है.
हर सीट पर मुकाबला कड़ा है़ दूसरे फेज की चारों सीटें फिलहाल भाजपा के कब्जे में है़ं भाजपा को जमीन बचाने की चुनौती है़ तीन सीटों पर भाजपा ने पुराने चेहरे बदले है़ं खूंटी से कड़िया मुंडा की जगह पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा उम्मीदवार हैं, तो राजधानी रांची में रामटहल चौधरी की जगह पर संजय सेठ को भाजपा ने मोरचे पर खड़ा किया है़. कोडरमा में रवींद्र राय भी आउट हुए़
उनकी जगह राजद छोड़ कर आयीं, अन्नपूर्णा देवी भाजपा की उम्मीदवार बनायी गयी है़ं हजारीबाग में भाजपा ने पुराने चेहरे केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा पर ही दावं लगाया है़ उधर यूपीए को महागठबंधन में शामिल दलों का सहारा है़ चार में से तीन सीटों पर रांची, खूंटी और हजारीबाग में कांग्रेस के उम्मीदवार महागठबंधन की ओर से मैदान में है़ं उधर कोडरमा में झाविमो के बाबूलाल मरांडी भाजपा और माले के खिलाफ मोरचा लेंगे़ आनंद मोहन की रिपोर्ट..
रांची : संजय सेठ व रामटहल के बीच सुबोध जुटे गोलबंदी में
रांची संसदीय सीट पर मुकाबला रोमांचक हो गया है़ भाजपा प्रत्याशी संजय सेठ अपना पहला चुनाव लड़ रहे है़ं संजय सेठ पर भाजपा ने राजधानी की प्रतिष्ठित सीट पर दावं लगाया है़ इधर उम्र को आधार बना कर वर्तमान सांसद रामटहल चौधरी का पार्टी ने टिकट काटा, तो तनातनी के मूड में रामटहल भी भाजपा की मुश्किलें बढ़ाने के लिए मैदान में उतर गये हैं. रामटहल के मैदान में आने के बाद रांची सीट पर चुनावी समीकरण टटोले जा रहे है़ं नफा-नुकसान का आकलन हो रहा है़ भाजपा सेंधमारी रोकने के लिए रणनीति बना रही है़ उधर कांग्रेस के प्रत्याशी सुबोधकांत सहाय को अपने परंपरागत वोट पर भरोसा है़ वह रामटहल के मैदान में उतरने के बाद वोटों की गोलबंदी में लग गये है़ं
खूंटी : जमीन बचाने उतरे अर्जुन कांग्रेस परंपरागत वोट के सहारे
खूंटी भाजपा का मजबूत गढ़ रहा है़ खूंटी से कड़िया मुंडा आठ बार सांसद रह चुके है़ं कड़िया और भाजपा की इस जमीन को बचाने के लिए भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा को मैदान में उतारा है़ उधर यह सीट यूपीए गठबंधन में कांग्रेस के खाते में है़ कांग्रेस की ओर से कालीचरण मुंडा प्रत्याशी है़ं
भाजपा इस क्षेत्र में अपने पुराने जनाधार की घेराबंदी में लगी है़ वहीं कांग्रेस अपने परंपरागत आधार के साथ-साथ भाजपा के वोट बैंक पर सेंधमारी की कोशिश में है़ कांग्रेस अल्पसंख्यक वोटरों के साथ-साथ दूसरे वोट बैंक में भी पैठ बनाने की कोशिश कर रही है़ पिछले वर्ष खूंटी क्षेत्र में चले आंदोलनों का अंडरकरंट भी पार्टियां समझने की कोशिश कर रही है़ं
हजारीबाग : गोपाल व भुवनेश्वर के बीच जयंत रास्ता निकालने में जुटे
हजारीबाग सीट पर कांग्रेस ने बहुत मशक्कत के बाद उम्मीदवार उतारा़ कांग्रेस ने गोपाल साहू पर दावं लगाया है़ गोपाल साहू क्या गुल खिलायेंगे, यह समय बतायेगा, लेकिन इस सीट पर जयंत सिन्हा की मौजूदगी चुनाव को अहम बनाती है़ भाजपा के केंद्रीय मंत्री जयंत सिन्हा दुबारा चुनाव लड़ रहे है़ं हजारीबाग भाजपा की परंपरागत सीट रही है़
यहां वोटों का ध्रुवीकरण करने में भाजपा सफल रही है़ उधर भाकपा के भुवनेश्वर मेहता को अपने परंपरागत वामपंथी आधार पर भरोसा है़ गोपाल साहू और भुवनेश्वर के बीच वोटों की झीनाझपटी होगी़ इसमें जयंत सिन्हा को रास्ता निकालना है़ भाजपा को अपने वोट की गोलबंदी बेहतर तरीके से करनी होगी़
कोडरमा : मुकाबला रोचक, बाबूलाल, अन्नपूर्णा व राजकुमार में फंसी है सीट
कोडरमा में चुनावी मुकाबला रोमांचकारी है़ यह सीट त्रिकोणीय मुकाबले में फंसता दिख रहा है़ झाविमो नेता व पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी को अपनी साख बचानी है़ बाबूलाल को यूपीए गठबंधन के वोट समीकरण पर भरोसा है़ं वहीं अन्नपूर्णा देवी पर भाजपा ने भरोसा जताया है़
रवींद्र राय का टिकट काटने के बाद पैदा हुई परिस्थितियों के बीच अन्नपूर्णा को रास्ता निकालना है़ हालांकि रवींद्र राय पूरी तरह से पार्टी के साथ है़ं भाजपा का इस सीट पर आधार रहा है़ जातीय गोलबंदी कराने में पहले भाजपा सफल रही है़ उधर माले के राजकुमार यादव इस सीट पर पिछले तीन-चार चुनाव से प्रभावी प्रदर्शन करते रहे है़ं राजकुमार पिछले चुनाव में ढ़ाई लाख से ज्यादा वोट लाये थे.
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