बागियों में बाबूलाल और कोड़ा ने ही दिखाया है दम

Updated at : 13 Apr 2019 2:14 AM (IST)
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बागियों में बाबूलाल और कोड़ा ने ही दिखाया है दम

मनोज सिंह, रांची : भाजपा से चार बार के सांसद रहे रामटहल चौधरी बागी हो गये हैं. उन्हें पार्टी ने 75 साल से अधिक उम्र का बता कर टिकट नहीं दिया है. इसके बावजूद चुनाव लड़ने का दावा किया है. वह 16 अप्रैल को नामांकन करेंगे. ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि वह जीतते हैं […]

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मनोज सिंह, रांची : भाजपा से चार बार के सांसद रहे रामटहल चौधरी बागी हो गये हैं. उन्हें पार्टी ने 75 साल से अधिक उम्र का बता कर टिकट नहीं दिया है. इसके बावजूद चुनाव लड़ने का दावा किया है. वह 16 अप्रैल को नामांकन करेंगे.

ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि वह जीतते हैं या हारते हैं. वैसे भी राज्य में पार्टी से बागी होने का पुराना इतिहास रहा है. कभी लोस तो कभी विस चुनाव के समय नेता बागी हो जाते हैं.
कभी-कभी तो किसी कारणवश पार्टी छोड़कर बागी हो जाते हैं या नयी पार्टी बना लेते हैं. अगर बागियों के चुनावी इतिहास पर नजर डालें तो बाबूलाल मरांडी और मधु कोड़ा को छोड़ कोई भी लोकसभा चुनाव में सफल नहीं हुआ है.
दोनों नेता विधानसभा चुनाव से पूर्व बागी हुए थे. पूर्व सीएम बाबूलाल ने भाजपा से नाराज होकर नयी पार्टी झाविमो बना ली थी. इसी पार्टी की टिकट से कोडरमा से चुनाव लड़े और भाजपा प्रत्याशी को हराया. इसी तरह पूर्व सीएम मधु कोड़ा को पार्टी ने 2005 में टिकट नहीं दिया था.
निर्दलीय लड़े. चुनाव जीते और मुख्यमंत्री बने. बाद में (2009 में) वह सिंहभूम सीट से चुनाव लड़े. श्री कोड़ा ने भाजपा के प्रत्याशी बड़कुंवर गगरई को हराया था. इनके अलावा भी चुनाव के दौरान कई बागी हुई हैं, लेकिन उनका प्रदर्शन ठीक नहीं रहा है.
बागी होकर लड़े, छठे स्थान पर रहे थे चार बार के विधायक : 2005 में भाजपा ने मधु कोड़ा, रामजीलाल सारडा, दिनेश उरांव, चंद्रेश उरांव, रामचंद्र नायक आदि विधायकों का टिकट काट दिया था.
इसमें मधु कोड़ा बागी प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीते थे, जबकि चार बार के विधायक रहे रामजीलाल सारडा 6328 वोट लाकर हटिया विधानसभा सीट पर छठे स्थान पर थे.
लेकिन, यहां से भाजपा प्रत्याशी हार गये थे. कांग्रेस के विधायक चुने गये थे. रामचंद्र नायक ने चुनाव नहीं लड़ा था. इसी तरह जब मधु कोड़ा निर्दलीय उम्मीदवार होकर जगन्नाथपुर से जीते थे, तो भाजपा प्रत्याशी जवाहर बानरा पांचवें स्थान पर चले गये थे.
इतिहास रहा है राजनीति में बागी होने का : संयुक्त बिहार के समय झारखंड में वनांचल आंदोलन को गति देनेवाले कई नेताओं को 1990-91 में लालू प्रसाद ने अपने पाले में कर लिया था. भाजपा से बगावत कर समरेश सिंह, इंदर सिंह नामधारी जैसे कई नेताओं ने संपूर्ण क्रांति दल बना लिया था. इसमें विधायक बनने के पूर्व से रामचंद्र नायक भी शामिल थे.
इन नेताओं ने विधानसभा चुनाव भी लड़ा लेकिन शायद ही कोई विधायक बन पाया. बाद में इसका विलय जनता दल में हो गया थे. इनमें से कुछ जनता दल में गये, कुछ भाजपा में आ गये.
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