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मुरी : हिंडाल्को फैक्ट्री चलाने का आदेश रद्द फोन से होगा मलबे में दबे की पहचान, कंपनी ने कहा, चार लोग घायल, एक लापता

Updated at : 11 Apr 2019 7:46 AM (IST)
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मुरी : हिंडाल्को फैक्ट्री चलाने का आदेश रद्द फोन से होगा मलबे में दबे की पहचान, कंपनी ने कहा, चार लोग घायल, एक लापता

जांच अधिकारी शुभ्रा वर्मा ने कहा : लोग दबे हैं, पर इसकी चिंता प्रबंधन को नहीं है कंपनी ने कहा : हादसे में चार लोग घायल, एक लापता है प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने हिंडाल्को का सीटीओ रद्द किया, सीटीओ के बिना नहीं चल सकती फैक्ट्री सुनील/प्रणव/विष्णु रांची : मुरी स्थित हिंडाल्को के कास्टिक तालाब धंसने […]

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  • जांच अधिकारी शुभ्रा वर्मा ने कहा : लोग दबे हैं, पर इसकी चिंता प्रबंधन को नहीं है
  • कंपनी ने कहा : हादसे में चार लोग घायल, एक लापता है
  • प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने हिंडाल्को का सीटीओ रद्द किया, सीटीओ के बिना नहीं चल सकती फैक्ट्री
सुनील/प्रणव/विष्णु
रांची : मुरी स्थित हिंडाल्को के कास्टिक तालाब धंसने के 30 घंटे बाद भी राहत और बचाव कार्य आरंभ नहीं हो सका है. बुधवार को दोपहर बाद केवल डंपिंग स्थल तक जाने के लिए रास्ता बनाने का शुरू हो सका है. अब तक न तो कंपनी की ओर से और न ही सरकार की तरफ से मलबा हटाने का काम आरंभ किया गया है.
स्थानीय लोगों ने मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका जतायी है. वहीं, कॉल डंप (मोबाइल लोकेशन) तकनीक से मलबे में दबे लोगों की पहचान की जायेगी. इधर सरकार ने कंपनी को सील कर दिया है. इसके बाद बुधवार को हिंडाल्को कारखाने में कामकाज पूरी तरह से ठप रहा. दिन भर हादसे के स्थल के पास लोगों का आना-जाना लगा रहा. रेलवे द्वारा पटरी से मलबा हटाने का काम चलाया जा रहा था. दूसरी ओर एनडीआरएफ की टीम बीती रात से ही डंपिंग स्थल के पूर्वी छोर पर कैंप किये हुए है.
कंपनी के अधिकारियों के बीच लगातार बैठकों को दौर जारी है. पर राहत और बचाव कार्य की दिशा में कोई प्रगति नहीं हुई है. इस बीच झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने बुधवार को आदेश जारी कर हिंडाल्को का कंसेट टू अॉपरेट (सीटीओ) रद्द करने का आदेश जारी कर दिया है.
पर्षद ने अपने आदेश में कहा है कि रेड मड डंप करने की जब तक कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जाती है, तब तक फैक्ट्री का अॉपरेशन पूरी तरह बंद रहेगा. राज्य सरकार की ओर से नियुक्त जांच अधिकारी आयुक्त शुभ्रा वर्मा समेत एसडीओ रांची, ग्रामीण एसपी, मुख्य कारखाना निरीक्षक व अन्य अधिकारी वहां कैंप किये हुए हैं.
रांची डीसी ने हिंडाल्को को नोटिस भेजा : जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकार के अध्यक्ष एवं रांची के डीसी राय महिमापत रे ने कास्टिक तालाब की चहारदीवारी धंसने से आसपास के क्षेत्रों में मिट्टी भर जाने के मामले में हिंडाल्को प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी किया है.
कंपनी प्रबंधन को डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट के तहत नोटिस जारी किया गया है. उपायुक्त ने प्रबंधन को 48 घंटे के भीतर जवाब देने को कहा गया है. नोटिस के जरिये प्रबंधन से कहा गया है कि लापरवाही बरतने के कारण कंपनी पर क्यों न कानूनी कार्रवाई की जाये. उपायुक्त ने कई बिंदुओं पर हिंडाल्को प्रबंधन से जवाब मांगा है. उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने शिकायत की है कि उनके कुएं का पानी भी खराब हो गया है. इसे गंभीरता से लेते हुए डीसी ने प्रदूषण व पेयजल विभाग को निर्देश दिया कि सभी कुआें के पानी की जांच करायें. डीसी ने प्रबंधन से घटना का कारण और इसके प्रभाव पर भी रिपोर्ट मांगी है.
इसमें यह बताने को कहा गया है कि ऐसी घटना न हो, इसके लिए क्या इंतजाम पहले से किये गये थे. सुरक्षा के जो मानक हैं, उसका पालन किया गया था कि नहीं. अगर पालन किया गया था तो कितना पालन किया गया. डीसी ने कहा है कि घटना से लोगों के स्वास्थ्य पर असर पड़ने की आशंका है. ऐसे में प्रबंधन को आवश्यक कदम उठाया जाना चाहिए. आवश्यकता पड़ने पर आसपास की आबादी को सुरक्षित स्थान पर ले जाने और पर्यावरण को बचाने के लिए उचित कदम उठाने का निर्देश उपायुक्त ने दिया है.
जांच अधिकारी लोगों से मिली, कंपनी से हुईं नाराज : इधर राज्य सरकार की ओर से नियुक्त जांच अधिकारी दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल की आयुक्त शुभ्रा वर्मा समेत एसडीओ गरिमा सिंह, ग्रामीण एसपी आशुतोष शेखर समेत श्रम विभाग, वन एवं पर्यावरण विभाग के पदाधिकारी भी वहां कैंप किये हुए हैं. श्रीमती वर्मा हिंडाल्को के अफसरों के रुख से नाराज भी हुई हैं. उन्होंने ग्रामीणों से बात की और रास्ता बनवाने देने का आग्रह किया. इसके बाद एनडीआरएफ के अधिकारियों से बात की.
उन्होंने रजिस्टर न दिये जाने पर कंपनी के एक असिस्टेंट मैनेजर के प्रति नाराजगी भी जतायी और कंपनी पर कार्रवाई की बात कही. उनका कहना था कि यदि मलबे में लोग दबे हैं, तो सरकार का प्रयास है कि पहले उन्हें निकाला जाये, कुछ लोग जिंदा भी हो सकते हैं. पर उस जगह तक पहुंचना संभव नहीं है. मलबा हटाये बिना राहत व बचाव कार्य आरंभ नहीं हो सकता. पर कंपनी इसमें सहयोग नहीं कर रही है.
हिंडाल्को ने कहा: चार लोग घायल, एक लापता
मुंबई : हिंडाल्को इंडस्ट्रीज ने मुरी में स्थित अपने एलुमिना संयंत्र में हादसे के बाद परिचालन अस्थायी तौर पर बंद कर दिया. कंपनी ने बुधवार को यह जानकारी दी. कंपनी ने कहा है कि संयंत्र से जुड़े लाल कीचड़ भंडारण क्षेत्र (बॉक्साइट के अवशेष स्थल) के धंस जाने से चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गये और एक संविदा कर्मी लापता है.
इसके बाद कंपनी ने परिचालन बंद कर दिया है. इधर हिंडाल्को ने बंबई शेयर बाजार को बताया कि मंगलवार (9 अप्रैल 2019) को मुरी स्थित एलुमिना संयंत्र से जुड़े लाल अवशेष भंडारण क्षेत्र में एक हादसा हुआ.
यह हादसा मलबे के धंसने से हुआ. कंपनी ने कहा कि एहतियात बरतते हुए स्थिति का जायजा लेने के लिए परिचालन को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है. हिंडाल्को ने कहा कि शुरुआती जांच में पर्यावरण या संपत्ति पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ने के संकेत मिले हैं. मलबे को हटाने के लिए प्रयास जारी है. कंपनी ने कहा कि घायलों का इलाज कराया जा रहा है और एक ठेका कर्मी लापता है. हादसे का कंपनी के प्रदर्शन पर कोई प्रभाव पड़ने की आशंका नहीं है.
कॉल डंप तकनीक से इसकी सच्चाई पता लगाने की योजना
बालाकोट के प्रयोग को मुरी में भी आजमाया जायेगा
मुरी स्थित हिंडाल्को के कास्टिक तालाब हादसे में कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका है. स्थानीय लोग ऐसा दावा कर रहे हैं. जबकि कंपनी के अनुसार केवल एक मजदूर लापता है. अब रांची के उपायुक्त ने कॉल डंप तकनीक से इसकी सच्चाई पता लगाने की योजना बनायी है. यानी जिस तरह से भारतीय सेना ने बालाकोट में आतंकवादियों के मोबाइल लोकेशन की जानकारी लेकर सटीक जगह पर हमला किया था.
ठीक उसी तकनीक से मुरी में मलबे में दबे लोगों की पहचान की जायेगी. डीसी ने हादसे के समय कितने मोबाइल एक्टिव थे और घटना के बाद उस क्षेत्र में कितने मोबाइल फोन बंद हैं, उसकी डंप रिपोर्ट मांगी है. इससे यह पता चल सकेगा कि बंद फोन किसका है. इसके आधार पर नंबर की पहचान कर उनके परिजनों से बात की जायेगी.
रास्ता बनाने का काम आरंभ
बुधवार की सुबह जब एनडीआरएफ की टीम डंप स्थल पर जाने के लिए रास्ता बनाने का काम शुरू करने ही जा रही थी कि स्थानीय लोगों ने विरोध किया. लोगों का कहना था कि रास्ता तभी बनाने देंगे, जब उनकी जमीन का मुआवजा दिया जाये. इस बात को लेकर एसडीओ गरिमा सिंह के साथ लोगों की कहा-सुनी भी हुई. एनडीआरएफ का कहना था कि डंपिंग स्थल तक डंफर को ले जाने के लिए अस्थायी रास्ता बनाने की जरूरत है.
तभी मलबा हटाने का काम किया जा सकता है. बाद में पूर्व विधायक सुदेश महतो भी आये. ग्रामीणों के साथ बैठक के बाद पूर्वी छोर से झारखंड-पश्चिम बंगाल सीमा से लगे स्वर्णरेखा नदी की ओर से रास्ता बनाने का काम आरंभ हुआ. यहां पोकलेन से रास्ता बनाया जा रहा था. बताया गया कि इसमें एक से दो दिन का समय लग सकता है. इसके बाद मलबा हटाने का काम शुरू होगा. मलबा बड़े हिस्से में फैल गया है. गांव में घरों तक मलबा फैला हुआ है.इसे हटाने में काफी समय लग सकता है. मलबे को कहां डंप करना है, इसकी व्यवस्था भी नहीं की गयी है.
प्रदूषण फैलने की आशंका
स्थानीय लोगों ने कहा है कि मलबे से अजीब तरह की गंध आ रही है. रह-रह कर धुआं भी निकल रहा है. ऐसे में उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. कई लोगों ने कुएं व चापानल से पानी गंदा निकलने की शिकायत की है. लोगों ने यह शिकायत जांच अधिकारी से की.
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