रांची : सिंबल बदलता रहा, अपने दम पर भी प्रत्याशी साधते रहे हैं चुनावी जंग

Updated at : 17 Mar 2019 8:20 AM (IST)
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रांची : सिंबल बदलता रहा, अपने दम पर भी प्रत्याशी साधते रहे हैं चुनावी जंग

विवेक चंद्र भाजपा छोड़ कर चुनाव लड़ने वाले दो पूर्व मुख्यमंत्रियों ने जीता था चुनाव तीन बार के सांसद रहे जयपाल सिंह मुंडा को दल बदलने पर चखना पड़ा था हार का स्वाद रांची : झारखंड के संसदीय क्षेत्र में आधा दर्जन नेताओं ने अपने पहले का दल छोड़ कर चुनाव लड़ा और जीता भी. […]

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विवेक चंद्र
भाजपा छोड़ कर चुनाव लड़ने वाले दो पूर्व मुख्यमंत्रियों ने जीता था चुनाव
तीन बार के सांसद रहे जयपाल सिंह मुंडा को दल बदलने पर चखना पड़ा था हार का स्वाद
रांची : झारखंड के संसदीय क्षेत्र में आधा दर्जन नेताओं ने अपने पहले का दल छोड़ कर चुनाव लड़ा और जीता भी. इस तरह चुनाव लड़नेवाले नेताओं ने केवल िकसी दल के प्रत्याशी के रूप में ही नहीं, बल्कि निर्दलीय के रूप में भी झंडे गाड़े हैं. झारखंड के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों ने पहले का दल छोड़ कर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. दोनों ही पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी और मधु कोड़ा ने भाजपा छोड़ कर चुनाव लड़ा था.
श्री मरांडी झाविमो का गठन कर चुनाव लड़े थे. वहीं, मधु कोड़ा निर्दलीय लड़ कर जीते थे. इसी तरह झारखंड विधानसभा के स्पीकर रहे इंदर सिंह नामधारी ने भी निर्दलीय प्रत्याशी बन कर विजयी हुए थे. उनके पहले रीतलाल वर्मा और आरपी षाड़ंगी जैसे दिग्गज राजनीतिज्ञ भी दल छोड़ने के बावजूद चुनाव जीतने में कामयाब रहे हैं.
लेकिन, दल बदलना या पुराना दल छोड़ना जीत की गारंटी नहीं है. राज्य में ऐसे भी उदाहरण हैं कि जब कद्दावर नेताओं ने दल बदला और चुनाव हार गये. 1962 में जयपाल सिंह मुंडा इस क्षेत्र के बड़े नेता थे.
वह झारखंड पार्टी के टिकट पर चुनाव जीत कर सांसद बने थे. सांसद बनने के बाद जयपाल सिंह मुंडा कांग्रेस में शामिल हो गये. उन्होंने झारखंड पार्टी का भी कांग्रेस में विलय कर दिया था. लेकिन, झारखंड पार्टी दोबारा बनायी गयी. 1967 में हुए अगले ही चुनाव में झारखंड पार्टी के एनइ होरो ने चुनाव लड़ा. श्री होरो ने तीन बार सांसद रहे जयपाल सिंह मुंडा को हरा दिया था.
रांची के वर्तमान सांसद रामटहल चौधरी भी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ चुके हैं. 1980 में रामटहल चौधरी ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में सांसद का चुनाव लड़ा और हार गये. रांची के ही पूर्व सांसद और केंद्रीय मंत्री रहे सुबोधकांत सहाय ने भी दल बदल कर चुनाव लड़ा है.
1991 में श्री सहाय ने जनता दल छोड़ा. वह समाजवादी जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़े. तत्कालीन सांसद रहे सुबोधकांत सहाय उस चुनाव में चौथे नंबर पर रहे थे. चतरा से दो बार भाजपा का सांसद रहे धीरेंद्र अग्रवाल 2004 में राजद के टिकट पर चुनाव लड़े और चतरा का सांसद बने.
नयी पार्टी के सिंबल पर जीतनेवाले
चुनाव का वर्ष नाम
1980 आरपी षाड़ंगी (जनता पार्टी से भाजपा )
1980 रीतलाल प्रसाद वर्मा (जनता पार्टी से भाजपा )
1999 नागमणि (भाजपा छोड़ राजद में आये थे )
2009 इंदर सिंह नामधारी (जदयू छोड़ा, निर्दलीय लड़े )
2009 बाबूलाल मरांडी ( भाजपा छोड़ा, झाविमो गठित कर चुनाव लड़ा )
2009 मधु कोड़ा (भाजपा छोड़ा, निर्दलीय लड़े)
पुरानी पार्टी छोड़ने के बाद जो हारे
वर्ष नाम
1967 जयपाल सिंह मुंडा (झापा छोड़ कांग्रेस चले गये थे)
1980 रामटहल चौधरी (निर्दलीय लड़े थे)
1991 सुबोधकांत सहाय (जनता दल छोड़ समाजवादी जनता पार्टी से लड़े)
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