रांची : डीलरों के पास 100 करोड़ से अधिक बकाया

Published at :12 Mar 2019 9:02 AM (IST)
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रांची : डीलरों के पास 100 करोड़ से अधिक बकाया

अकेले रांची में करीब 600 बकायेदार पीडीएस डीलर रांची : राज्य भर के पीडीएस डीलरों के पास बकाया अनाज का न तो समायोजन हुआ है अौर न ही उनसे उसकी कीमत वसूली गयी है. जिला आपूर्ति कार्यालय के अनुसार अकेले रांची में बकायेदार डीलरों की संख्या करीब 600 है, जिनके पास 10 क्विंटल से लेकर […]

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अकेले रांची में करीब 600 बकायेदार पीडीएस डीलर
रांची : राज्य भर के पीडीएस डीलरों के पास बकाया अनाज का न तो समायोजन हुआ है अौर न ही उनसे उसकी कीमत वसूली गयी है. जिला आपूर्ति कार्यालय के अनुसार अकेले रांची में बकायेदार डीलरों की संख्या करीब 600 है, जिनके पास 10 क्विंटल से लेकर एक हजार क्विंटल तक अनाज है, जो लाभुकों के बीच बांटा नहीं जा सका था.
इसकी कीमत चार हजार रुपये प्रति क्विंटल की सरकारी दर से 40 हजार से लेकर 40 लाख रुपये तक होती है. दरअसल, खाद्य आपूर्ति विभाग ने मार्च-अप्रैल 2018 तक के क्लोजिंग बैलेंस का हिसाब लिया, तो पता चला था कि राज्य भर के डीलरों के पास सौ करोड़ से अधिक कीमत का अनाज है, जो बांटा नहीं गया है. सबसे ज्यादा अनाज रांची, जमशेदपुर, धनबाद, बोकारो व गिरिडीह अनुभाजन क्षेत्र के डीलरों के पास बचा है. करीब 20 फीसदी डीलरों के पास अनाज का बड़ा स्टॉक है.
इधर, इस संबंध में 20 जुलाई 2018 को डीलर प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में विभागीय मंत्री ने कहा था कि जितना अनाज डीलरों के पास स्टॉक में दिख रहा है, उसके क्लियर होने तक पीडीएस दुकानदारों को सरकार से कोई आवंटन नहीं मिलेगा. पर अब तक बहुत कम अनाज का समायोजन हो सका है.
क्या है मामला
राज्य भर के 25,468 पीडीएस डीलरों के माध्यम से करीब 57.10 लाख परिवारों को रियायती दर पर अनाज मिलता है. सरकार इन गरीब परिवारों को दो रुपये प्रति किलो की दर से चावल तथा तीन रुपये प्रति किलो की दर से गेहूं उपलब्ध कराती है. ई-पॉश मशीन सहित अन्य तकनीक के इस्तेमाल तथा इसमें आनेवाली अड़चन के कारण कई लाभुकों को अनाज नहीं मिल पाता है.
वहीं बड़ी संख्या में समृद्ध लोगों का भी गुलाबी व पीला राशन कार्ड बन गया है. ऐसे लोग लाइन लग कर अनाज नहीं लेते, पर आयुष्मान भारत योजना का लाभ लेने के लिए कार्ड सरेंडर नहीं कर रहे हैं. इस तरह डीलरों को आवंटित अनाज की एक बड़ी मात्रा वितरण न होने से बची हुई है, जिसका हिसाब मई 2018 से पहले का नहीं हुआ है.
बनी हुई है समस्या
इधर एनआइसी द्वारा पीडीएस डीलरों के पास हर माह बच रहे अनाज की मात्रा अब भी पूरी तरह प्रदर्शित नहीं हो रही है. आहार पोर्टल पर डीलरों द्वारा वितरित अनाज तो दिखता है, पर उनके पास बचा अनाज नहीं दिखता.
यह समस्या कमोबेश अब भी बनी हुई है, जिससे अनाज बचने पर इसका आकलन न हो पाने की समस्या बरकरार है. गौरतलब है कि इस समस्या को लेकर जिला आपूर्ति पदाधिकारी, रांची ने 12 अप्रैल 2018 को एनआइसी को पत्र लिखा था कि स्थिति सुधारी जाये, ताकि डीलर अनाज की कालाबाजारी नहीं कर सकें.
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