रांची : अशोक सिंह के फोन करने पर आरा गये थे व्यवसायी चित्तरंजन सिंह
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :06 Mar 2019 8:06 AM (IST)
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रांची : अपर बाजार, रांची के अपहृत व्यवसायी चित्तरंजन सिंह कहां है? 120 घंटे से वे ट्रेसलेस हैं. उनकी खोज में बिहार की आरा पुलिस लगातार दबिश दे रही है. लेकिन अब तक सफलता हाथ नहीं लगी है. उधर, पुलिस ने सीडीआर के आधार पर उस शख्स को खोज निकाला है, जिसके फोन करने के […]
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रांची : अपर बाजार, रांची के अपहृत व्यवसायी चित्तरंजन सिंह कहां है? 120 घंटे से वे ट्रेसलेस हैं. उनकी खोज में बिहार की आरा पुलिस लगातार दबिश दे रही है. लेकिन अब तक सफलता हाथ नहीं लगी है. उधर, पुलिस ने सीडीआर के आधार पर उस शख्स को खोज निकाला है, जिसके फोन करने के बाद 28 फरवरी को रांची से आरा के लिए व्यवसायी चित्तरंजन सिंह रवाना हुए थे.
उसका नाम अशोक सिंह है और वह चित्तरंजन सिंह का गोतिया है. अशोक सिंह और चित्तरंजन सिंह का पैतृक गांव आरा के गजराज गंज थाना क्षेत्र के मसाढ़ में है. घटना की जानकारी मिलने पर गजराज गंज पुलिस अशोक सिंह को लगातार बुला रही थी, लेकिन वह किसी न किसी बहाने नहीं आ रहा था.
सोमवार को जब वह थाने आया, तो पूछताछ में उसने चित्तरंजन सिंह को फोन करने की बात से इनकार किया. लेकिन सीडीआर से साफ हो गया कि उसने ही चित्तरंजन सिंह को फोन किया था. उसके सिवा व्यवसायी ने किसी और को जानकारी नहीं दी थी कि वे आरा आ रहे हैं.
उल्लेखनीय है कि पत्नी पूजा सिंह को अरजेंट काम की बात कह कर तिवारी मोटर की बस से आरा के लिए चित्तरंजन सिंह रवाना हुए थे. अगले दिन एक मार्च की सुबह 6:33 बजे पत्नी को फोन कर जानकारी दी थी कि वे आरा पहुंच गये हैं. इसके बाद से उनसे किसी का संपर्क नहीं हुआ.
120 घंटे से लापता व्यवसायी की खोज में लगी है पुलिस, अशोक सिंह हिरासत में
जमीन का एग्रीमेंट करानेवाला दलाल कल्लू एक मार्च से घर से है गायब
पुलिस की पड़ताल में यह बात भी सामने आयी है कि जिन चार लोगों ने पूर्व में व्यवसायी चित्तरंजन सिंह से जबरन जमीन का एग्रीमेंट कराया था, उनमें से एक जमीन दलाल एक मार्च से ही अपने घर से गायब है. वह भी व्यवसायी के पैतृक गांव मसाढ़ का ही रहनेवाला है. वह संदेहास्पद चरित्र का बताया जाता है.
व्यवसायी के दोनों सौतेले भाई को पुलिस ने अारा में ही रोका
पूरे प्रकरण में एक बात सामने आयी है कि इस परिवार का गजराज गंज में करीब 90 डिसमिल जमीन है. इस जमीन में चित्तरंजन सिंह का आधा हिस्सा है और जमीन के आधे हिस्से में इनके दो सौतेले भाईयों का हक है. पहले इस जमीन की कीमत काफी कम थी. लेकिन इस गांव से राष्ट्रीय राजमार्ग निकल जाने पर जमीन की कीमत करोड़ों में हो गयी है.
दोनों सौतेले भाई भी रांची के अपर बाजार में ही रहते हैं. वे उक्त जमीन को बेचने के लिए आरा गये हुए थे. लेकिन इसकी जानकारी दोनों में से किसी ने चित्तरंजन सिंह को नहीं दी थी. अशोक सिंह ने 28 फरवरी को चित्तरंजन सिंह को जानकारी दी थी कि तुम्हारे दोनों भाई अपने हिस्से की जमीन बेचने आरा आये हुए हैं.
हो सकता है कि तुम्हारे हिस्से की जमीन भी वे बेच दें. इसके बाद ही चित्तरंजन सिंह आनन-फानन में आरा गये थे. यह बात भी सामने आ रही है कि दोनों सौतेले भाइयों ने अपने हिस्से की जमीन किसी और को एक मार्च को रजिस्ट्री कर दी है. मामले में गजराज गंज पुलिस ने दोनों से पूछताछ की है.
उसके बाद से दोनों के आरा से बाहर जाने पर रोक लगा दी गयी है. दोनों को आरा में तब तक रहने को कहा गया है, जब तक चित्तरंजन सिंह सामने नहीं आ जाते. पुलिस इस मामले में विभिन्न बिंदुओं पर छानबीन कर रही है. इसके बाद ही सही तथ्य सामने आयेंगे.
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