रांची : 31 मार्च को समाप्त हो रहा है मुख्य सचिव का एक्सटेंशन, लगायी जा रही हैं अटकलें, इन्हें मिल सकता है मौका
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :05 Mar 2019 7:48 AM (IST)
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रांची : राज्य के मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी को दूसरी बार दी गयी सेवा विस्तार की अवधि 31 मार्च को समाप्त हो रही है. श्री त्रिपाठी 30 सितंबर 2018 को सेवानिवृत्त हुए थे. उसके बाद राज्य सरकार की अनुशंसा पर उनको दो बार तीन-तीन महीने का एक्सटेंशन प्रदान किया गया. जानकार बताते हैं कि अब […]
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रांची : राज्य के मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी को दूसरी बार दी गयी सेवा विस्तार की अवधि 31 मार्च को समाप्त हो रही है. श्री त्रिपाठी 30 सितंबर 2018 को सेवानिवृत्त हुए थे. उसके बाद राज्य सरकार की अनुशंसा पर उनको दो बार तीन-तीन महीने का एक्सटेंशन प्रदान किया गया.
जानकार बताते हैं कि अब एक बार फिर से उनको एक्सटेंशन प्रदान करने में मुश्किल हो सकती है. वर्ष 2018 में संपन्न हुए चार राज्यों (मप्र, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मिजोरम) के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर चुनाव आयोग ने निर्देश दिया था कि ऐसे व्यक्ति को चुनाव से जुड़े कामों में नहीं लगाया जा सकता, जो एक्सटेंशन पर है या रिटायरमेंट के बाद राज्य सरकार द्वारा उसे दोबारा संविदा सेवा या अन्य किसी काम में लगाया गया है. आयोग के इस निर्देश को लेकर राज्य के प्रशासनिक हलके में मुख्य सचिव को लेकर कई तरह की अटकलें लगायी जा रही हैं.
मुख्य सचिव चुनाव से अलग नहीं रह सकते : चुनाव आयोग द्वारा जारी किये गये सर्कुलर का हवाला देते हुए जानकार कहते हैं कि किसी भी सूरत में मुख्य सचिव चुनाव से अलग नहीं रह सकते. चुनाव कार्यों में उनका इनवॉल्वमेंट होता ही है. सेवानिवृत्ति के बाद दोबारा सेवा में आये अफसरों से किसी संसदीय सीट, क्षेत्र या जिले में चुनावी कार्य नहीं लिया जा सकता है.
यहां यह भी उल्लेखनीय है कि 2018 में विधानसभा चुनाव के दौरान राजस्थान में मुख्य सचिव रहे एनसी गोयल और मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव रहे बीपी सिंह को भी एक्सटेंशन देने की कवायद की गयी थी. लेकिन, दोनों में से किसी को भी एक्टेंशन नहीं दिया जा सका था.
लेनी होगी चुनाव आयोग की अनुमति
राज्य में वर्तमान मुख्य सचिव सुधीर त्रिपाठी को एक्सटेंशन देने या नया मुख्य सचिव बहाल करने, दोनों ही स्थिति में चुनाव आयोग की अनुमति लेनी होगी.
मार्च के पहले सप्ताह में ही चुनाव की घोषणा संभावित है. चुनाव की घोषणा होते ही आचार संहिता लागू हो जायेगी. उस स्थिति में बिना अायोग की अनुमति के मुख्य सचिव के पद पर किसी को पदस्थापित नहीं किया जा सकेगा. नये मुख्य सचिव के चयन के लिए चुनाव आयोग को पैनल भेजना होगा. पैनल में अंकित अधिकारियों में से चुनाव आयोग एक काे मुख्य सचिव बनाने की अनुशंसा करेगा.
... तो इन्हें मिल सकता है मौका
सुधीर त्रिपाठी को एक्सटेंशन नहीं मिलने की स्थिति में कई अधिकारियों को मौका मिल सकता है. विकास आयुक्त डीके तिवारी, वित्त विभाग के अपर मुख्य सचिव सुखदेव सिंह, वन विभाग के अपर मुख्य सचिव इंदू शेखर चतुर्वेदी, केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर चल रहे एनएन सिन्हा व राजीव कुमार, जल संसाधन विभाग के अपर मुख्य सचिव अरुण कुमार सिंह व कार्मिक विभाग के अपर मुख्य सचिव केके खंडेलवाल मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी हैं. इनमें से किसी भी अधिकारी को सरकार मुख्य सचिव के रूप में पदस्थापित कर सकती है.
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