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रांची : हाइटेक होंगे हमारे किसान, स्मार्टफोन के लिए दिये जायेंगे 2000 रुपये

Updated at : 17 Feb 2019 7:45 AM (IST)
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रांची : हाइटेक होंगे हमारे किसान, स्मार्टफोन के लिए दिये जायेंगे 2000 रुपये

राजेश कुमार नयी जानकारियों से अपडेट करने के लिए सरकार ने बनायी योजना रांची : किसानों को चालू वित्तीय वर्ष में कृषि सहित कई नयी जानकारियों से अपडेट करने के लिए सरकार ने स्मार्टफोन के लिए पैसा देने की योजना बनायी है. सरकार किसानों के बैंक खातों में प्रति किसान 2,000 रुपये डीबीटी के माध्यम […]

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राजेश कुमार
नयी जानकारियों से अपडेट करने के लिए सरकार ने बनायी योजना
रांची : किसानों को चालू वित्तीय वर्ष में कृषि सहित कई नयी जानकारियों से अपडेट करने के लिए सरकार ने स्मार्टफोन के लिए पैसा देने की योजना बनायी है. सरकार किसानों के बैंक खातों में प्रति किसान 2,000 रुपये डीबीटी के माध्यम से भेजेगी. कृषि निदेशक रमेश घोलप ने झारखंड राज्य कृषि विपणन पर्षद की सचिव सुनीता चौरसिया को पत्र लिख कर सभी पंजीकृत किसानों के आधार लिंक्ड बैंक खाते की विवरणी व आधार नंबर की जानकारी मांगी है. पत्र में उल्लेख किया गया है कि प्रति किसान 2,000 रुपये दिये जाने हैं. इसके लिए सारी जानकारी दें.
बोर्ड ने 21,878 की जगह 14,287 किसानों का ही डाटा दिया : पूर्व में पंजीकृत किसानों की जानकारी मांगे जाने पर मार्केटिंग बोर्ड ने विभाग को 21,878 पंजीकृत किसानों की जगह मात्र 14,287 किसानों का ही डाटा उपलब्ध कराया. अब तक 7,591 किसानों का डाटा उपलब्ध नहीं कराया गया है. कृषि निदेशक ने एक बार फिर पत्र लिख कर सभी किसानों का डाटा मांगा है.
बोर्ड ने लिखा पत्र : इधर, कृषि निदेशक का पत्र मिलने के बाद मार्केटिंग बोर्ड ने रांची, जमशेदपुर, धनबाद, हजारीबाग, रामगढ़, डालटेनगंज, बोकारो, गिरिडीह, गढ़वा, देवघर, चाकुलिया, गुमला, सिमडेगा, लोहरदगा, कोडरमा, साहेबगंज, पाकुड़, दुमका एवं चाईबासा के पणन सचिव एवं प्रभारी पणन सचिव को पत्र लिखा है. यह पत्र 14 फरवरी को भेजा गया है. बोर्ड ने पत्र के माध्यम से लिखा है कि वैसे किसान, जिनका आधार नंबर, बैंक खाता नंबर व आइएफसी कोड नहीं है, उनकी सारी जानकारी एक सप्ताह के अंदर उपलब्ध करायें.
किसानों का डाटा एकत्र करने में छूट रहे पसीने
सूत्रों के अनुसार, पंजीकृत किसानों का डाटा एकत्र करने में बाजार समितियों के अधिकारियों के पसीने छूट रहे हैं. प्रारंभ में पंजीयन के समय आधार कार्ड और बैंक केवाइसी को अनिवार्य नहीं किया गया था.
बिना केवाइसी के प्रारंभ में नाम, मोबाइल नंबर और पता के आधार पर पंजीकरण किया गया. इनमें कई किसानों की सूची आत्मा संस्था से ली गयी थी. बाद में इसमें बदलाव किया गया और बैंक खाता और आधार की जानकारी ली गयी. अब वैसे किसान, जिनके नाम, मोबाइल नंबर और पता लिये गये थे, उनसे संपर्क करना मुश्किल हो रहा है.
  • किसानों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से राशि भेजेगी सरकार
  • 7,591 पंजीकृत किसानों का डाटा मार्केटिंग बोर्ड ने अब तक नहीं दिया
  • कृषि निदेशक ने दोबारा पत्र लिख कर किसानों का डाटा मांगा है
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