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रांची : बीएयू में उपकरण खरीद में वित्तीय अनियमितता

Updated at : 15 Feb 2019 9:36 AM (IST)
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रांची  : बीएयू में उपकरण खरीद में वित्तीय अनियमितता

कुलपति सहित अन्य अफसरों पर लगे हैं गंभीर आरोप, एसीबी में की गयी है शिकायत रांची : बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) में विभिन्न पदों पर अनुबंध पर हुई नियुक्ति के साथ ही उपकरण और फर्नीचर आदि की खरीद में वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाते हुए उत्तम कुमार नामक व्यक्ति ने एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) में […]

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कुलपति सहित अन्य अफसरों पर लगे हैं गंभीर आरोप, एसीबी में की गयी है शिकायत

रांची : बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (बीएयू) में विभिन्न पदों पर अनुबंध पर हुई नियुक्ति के साथ ही उपकरण और फर्नीचर आदि की खरीद में वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाते हुए उत्तम कुमार नामक व्यक्ति ने एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) में शिकायत की है. इसमें बीएयू के कुलपति सहित अन्य अफसरों पर गंभीर आरोप लगाये गये हैं.

कहा गया है कि बिना राज्यपाल सचिवालय और कृषि विभाग की अनुमति के बिना विभिन्न पदों पर नियुक्ति की गयी और गैर योजना के विविध मद से वेतन आदि का भुगतान किया गया. डॉ डीएन सिंह को नियम विरुद्ध निदेशक प्रशासन का अतिरिक्त प्रभार दिया, जबकि कृषि विवि के अधिनियम के अनुसार निदेशक प्रशासन व नियंत्रक को सरकार द्वारा प्रतिनियुक्त किया जाता है.

कुलपति ने प्रभारी निदेशक प्रशासन डॉ डीएन सिंह एवं सहायक निदेशक प्रशासन (नियुक्ति) अवधेश सिंह को यूपी काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चर रिसर्च में व अनुबंध में कार्यरत डॉ पुष्पेंद्र सरोज को उप निदेशक ट्रेनिंग एक्सटेंशन के पद पर दो वर्षों के लिए प्रतिनियुक्त कर दिया. यह नियुक्ति प्रतिनियुक्ति बिना विज्ञापन निकाले और बोर्ड ऑफ मैनेजमेंट से पास कराये की गयी. वहीं डॉ पी सरोज को शिक्षण का अनुभव नहीं होने के बाद भी तिलका मांझी कृषि महाविद्यालय गोड्डा का प्रभारी अधिष्ठाता बना दिया गया. साथ ही बिना लास्ट पे सर्टिफिकेट के ही निदेशक शिक्षा एवं प्रसार द्वारा वेतन का भुगतान कर दिया गया.

कुलपति, निदेशक अनुसंधान, निदेशक शिक्षा एवं प्रसार आइसीएआर नोडल अधिकारी एवं नियंत्रक द्वारा विवि, जेडीआरएस (दुमका, दारीसाइ एवं चियांकी) व गौरयाकरमा, हजारीबाग में मशीन और फर्नीचर आदि की खरीद की गयी, जबकि इसकी उपयोगिता ही नहीं थी. कृषि अनुसंधान, मुर्गी पालन और बकरी पालन में भी बिना उपयोगिता के और बिना खरीदारी के फर्जी बिल के आधार पर राशि आवंटित कर दी गयी, जिसका उल्लेख पूर्व निदेशक प्रशासन के पत्र में किया गया है.

आइसीएआर, कृषि मंत्रालय नयी दिल्ली और कृषि विभाग, झारखंड के अनुमोदन व बजट स्वीकृति के बिना 12 दिसंबर 2017 को हाइरिंग ऑफ कंसल्टेंट फॉर वर्क का विज्ञापन निकाला गया और वाइएमएस मुंबई को इसके लिए चुना गया. उक्त कार्य के लिए राशि का विचलन कर कुलपति एवं नियंत्रक द्वारा आइसीएआर के डेवलपिंग फंड से भुगतान किया जा रहा है. विवि में वर्क्स एंड प्लांट का विभाग होने के बाद भी कुलपति द्वारा परचेज ऑफिसर के साथ मिल कर परचेज डिपार्टमेंट से टेंडर निकाला गया, ताकि अपने लोगों को लाभ पहुंचाया जा सके. बिरसा कृषि विवि के अधीन महाविद्यालयों के लिए फर्नीचर खरीद में भी नियम का उल्लंघन किया गया. परविंदर कौशल वर्ष 2005 में जब बिरसा कृषि विवि के वानिकी संकाय के डीन थे, तब भी उन पर वित्तीय अनियमितता एवं भ्रष्टाचार का आरोप लगा था. एंटी करप्शन ब्यूरो में परिवाद संख्या 39/14 लंबित है.

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