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रांची : नहीं पहुंचे डॉक्टर, नवजात की मौत थैले में शव लेकर भटकता रहा दंपती, महिला ने ट्रेन में बच्चे को दिया था जन्म

Updated at : 14 Feb 2019 7:48 AM (IST)
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रांची : नहीं पहुंचे डॉक्टर, नवजात की मौत थैले में शव लेकर भटकता रहा दंपती, महिला ने ट्रेन में बच्चे को दिया था जन्म

तमिलनाडु से रांची आ रही महिला ने ट्रेन में बच्चे को दिया जन्म रांची : लोहरदगा निवासी सेतरो खेरवार तमिलनाडु से गर्भवती पत्नी इंद्रमनी के साथ एलेप्पी एक्सप्रेस से रांची लौट रहे थे. बुधवार सुबह छह बजे जब ट्रेन हटिया स्टेशन के अाउटर सिग्नल पर पहुंची, तभी इंद्रमनी ने ट्रेन की बर्थ पर ही बच्चे […]

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तमिलनाडु से रांची आ रही महिला ने ट्रेन में बच्चे को दिया जन्म
रांची : लोहरदगा निवासी सेतरो खेरवार तमिलनाडु से गर्भवती पत्नी इंद्रमनी के साथ एलेप्पी एक्सप्रेस से रांची लौट रहे थे. बुधवार सुबह छह बजे जब ट्रेन हटिया स्टेशन के अाउटर सिग्नल पर पहुंची, तभी इंद्रमनी ने ट्रेन की बर्थ पर ही बच्चे को जन्म दे दिया.
समय पर इलाज नहीं होने के कारण नवजात की मौत हो गयी. पति सेतरो खेरवार ने हेल्पलाइन नंबर पर फोन कर सहायता मांगी, तो डॉक्टर को छोड़ कर अन्य रेलकर्मी आये. रेलकर्मियों ने दंपती से कहा : रांची में ही समुचित इलाज मिलेगा, इसलिए वहीं चले जाइए.
खेरवार दंपती हटिया रेलवे स्टेशन से उसी ट्रेन से रांची रेलवे स्टेशन पहुंचे. यहां डॉक्टरों ने महिला और बच्चे की जांच की, जिसमें बच्चे को मृत बताया गया. इसके बाद रांची रेलवे स्टेशन के अधिकारियों ने एंबुलेंस उपलब्ध कराकर दंपती को सदर अस्पताल भेज दिया. दंपती ने अपने जिगर के टुकड़े को एक झोले में डाल दिया.
दोनों एंबुलेंस से सुबह करीब 10 बजे सदर अस्पताल पहुंचे, लेकिन जानकारी के अभाव में महिला का समुचित इलाज शुरू नहीं हो पाया.
पंजीयन काउंटर से डांटकर पति को हटा दिया : पति सेतरो खेरवार ने बताया कि वह एक बार पत्नी को दिखाने के लिए पर्ची कटाने के लिए लाइन में लगा था.
लेकिन, काउंटर पर बैठे कर्मचारी को उसकी बात समझ में नहीं आयी और उसने उसे डांट कर लाइन से बाहर कर दिया. बच्चे की मौत के बाद वैसे ही उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी, इसलिए वह कुछ बोल भी नहीं पा रहा था. वह कभी पत्नी को संभालता, तो कभी झोले में रखे अपने बच्चे के शव को देखता. वहीं, उसकी पत्नी भी खामोशी से सब देख रही थी. दोपहर करीब 12:15 बजे अस्पताल प्रबंधन को इस घटना की जानकारी मिली, तो प्रसूता को भर्ती कर उसके इलाज किया जाने लगा.
रेलवे का बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने का दावा फेल
प्रसूता को रांची रेल मंडल की एंबुलेंस से सदर अस्पताल लाया गया था. एंबुलेंस कर्मी को ही प्रसूता को अस्पताल में भर्ती कराया जाना चाहिए था. बच्चे की मौत हो चुकी थी. जैसे ही हमें घटना की जानकारी मिली, हमने तत्काल प्रसूता को भर्ती कर उसका समुचित इलाज शुरू करा दिया.
डॉ एके झा, उपाधीक्षक, सदर अस्पताल, रांची
नवजात का जन्म ट्रेन में हुआ था. इंद्रमनी देवी के पति द्वारा सूचना देने पर डॉ मनीषा वर्मा हटिया स्टेशन गयी थी. उन्होंने इलाज किया. और मरीज को यहां उतर कर इलाज कराने को कहा, पर वे रांची चले गये. रांची स्टेशन पर डॉ संजीव ने उन्हें देखा और सदर अस्पताल भेज दिया.
वीके गुप्ता, मंडल रेल प्रबंधक, हटिया
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