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महात्‍मा गांधी ही वह विकल्प हैं जिनसे दुनिया बच सकती है : हरिवंश

Updated at : 26 Jan 2019 8:07 PM (IST)
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महात्‍मा गांधी ही वह विकल्प हैं जिनसे दुनिया बच सकती है : हरिवंश

रांची : अंगुलिमाल का दिल जैसे बुद्ध ने बदला था वैसे ही खुद पर हमला करनेवाले मीर अली का दिल महात्मा गांधी ने उसे माफ कर बदल दिया. इस युग में गांधी ही वह विकल्प हैं जिनसे दुनिया बच और ठहर सकती है. शनिवार को यह बातें राज्यसभा के उपसभापति और वरिष्ठ पत्रकार हरिवंश ने […]

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रांची : अंगुलिमाल का दिल जैसे बुद्ध ने बदला था वैसे ही खुद पर हमला करनेवाले मीर अली का दिल महात्मा गांधी ने उसे माफ कर बदल दिया. इस युग में गांधी ही वह विकल्प हैं जिनसे दुनिया बच और ठहर सकती है. शनिवार को यह बातें राज्यसभा के उपसभापति और वरिष्ठ पत्रकार हरिवंश ने कही.

वे युवा पत्रकार संजय कृष्ण के संपादन में पुनर्प्रकाशित ‘महावीर’ के सत्याग्रह अंक के लोकार्पण और भवानी दयाल संन्यासी के जीवन पर आयोजित परिचर्चा समारोह में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे. कार्यक्रम का आयोजन रांची प्रेस क्लब के सभागार में किया गया था.

बौद्धिक विमर्श का केंद्र बने रांची प्रेस क्लब

हरिवंश ने कहा कि गांधीजी दुनिया के लिए विकल्प नहीं मजबूरी हैं. मैं यह बताना चाहता हूं कि संजय कृष्ण के काम का महत्व क्या है. चर्चिल ने दूसरे विश्वयुद्ध में जब ब्रिटेन पराजय की स्थिति में था तो उसकी नियति बदल दी. उनका कहना था कि जितनी दूर तक हम अपने अतीत को याद करते हैं उतना ही आगे हम भविष्य बना सकते हैं.

इतिहास का यह धर्म और काम ही है कि वह भविष्य को ताकत दे. इसी से इतिहास का महत्व भी है. संजय कृष्ण ने इतिहास की धरोहर को सहेजा है. कार्यक्रम में उन्होंने रांची प्रेस क्लब को बौद्धिक परामर्श का केंद्र बनाने की सलाह दी. महात्मा गांधी ने मानव इतिहास को रास्ता दिया है. कार्यक्रम में उन्होंने भवानी दयाल संन्यासी के जीवन पर प्रकाश डाला.

गांधीजी देश की मूल विचारधारा के प्रतीक : अशोक भगत

कार्यक्रम में पद्मश्री अशोक भगत ने कहा कि गांधीजी इस देश की मूल विचारधारा के प्रतीक हैं. गांधीजी के सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों का कोई विकल्प नहीं है. महात्मा गांधी की हम जब भी चर्चा करते हैं तो अपने अस्तित्व से एकाकार होते हैं. वहीं महावीर के सत्याग्रह अंक के संपादक संजय कृष्ण ने बताया कि महावीर का सत्याग्रह विशेषांक 1931 में निकला था. यह पत्रिका पटना से निकला करती थी और छह साल तक इसका जीवनकाल रहा.

रांची के नामी साहित्यकार राधाकृष्ण ने इसी पत्रिका से अपनी पत्रकारिता की शुरुआत की थी. यह पत्रिका सत्याग्रह आंदोलन का जीवंत दस्तावेज है. पत्रिका मुझे संतुलाल पुस्तकालय में मिली. बिहार में भी यह पत्रिका उपलब्ध नहीं है. इसके पुनर्प्रकाशन से इतिहास की यह धरोहर नष्ट होने से बच गयी.

प्रभात प्रकाशन ने इसे प्रकाशित किया है और यह ऑनलाइन भी उपलब्ध है. कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष राजेश सिंह ने किया. वहीं, धन्यवाद ज्ञापन प्रभात प्रकाशन के राजेश शर्मा ने किया. कार्यक्रम में खादी बोर्ड के अध्यक्ष संजय सेठ, रांची प्रेस क्लब के महासचिव शंभुनाथ चौधरी समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित थे.

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