रांची : छोटे बांध से सिंचाई का खर्च बड़े बांध की तुलना में दस गुना कम : मेघनाथ
Updated at : 20 Jan 2019 6:35 AM (IST)
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मंडल डैम से उठते सवाल विषय पर झारखंड इंडिजिनस पीपुल्स फोरम व जनसंघर्ष समिति, लातेहार गुमला की परिचर्चा रांची : झारखंड इंडिजिनस पीपुल्स फोरम व जन संघर्ष समिति, लातेहार गुमला ने मंडल डैम से उठते सवाल विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पांच जनवरी को पलामू प्रवास के दौरान इस डैम […]
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मंडल डैम से उठते सवाल विषय पर झारखंड इंडिजिनस पीपुल्स फोरम व जनसंघर्ष समिति, लातेहार गुमला की परिचर्चा
रांची : झारखंड इंडिजिनस पीपुल्स फोरम व जन संघर्ष समिति, लातेहार गुमला ने मंडल डैम से उठते सवाल विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पांच जनवरी को पलामू प्रवास के दौरान इस डैम का ऑनलाइन उदघाटन किया था. इस परिचर्चा में फिल्मकार सह एक्टिविस्ट मेघनाथ ने कहा कि इस डैम की योजना सूखा मुक्ति के नाम पर बनी थी, पर इस डैम के बनने से झारखंड का बहुत कम क्षेत्र ही सिंचित होगा़
1991 में उनके एक प्रयोग में यह बात सामने आयी थी कि छोटे बांध से प्रति हेक्टेयर सिंचाई का खर्च बड़े बांधों की तुलना में दस गुना कम आता है़ बड़े बांधों की जरूरत नहीं है़ सरकारी पदाधिकारियों को इन सवालों पर जनता से सीधा संवाद करना चाहिए़ यह आयाेजन शनिवार को पुरुलिया रोड स्थित लोयला ट्रेनिंग सेंटर में हुआ़
जनसंघर्ष समिति के केंद्रीय महासचिव जेरोम जेराल्ड कुजूर ने कहा कि इस डैम के पानी से बिहार के पांच लोकसभा क्षेत्र सिंचित होंगे़ वहां वोट बैंक के कारण यहां की राजनीतिक पार्टियों ने इस मुद्दे पर मौन साध रखा है़
इस डैम से झारखंड की जमीन डूबेगी व इसे मात्र 18 प्रतिशत ही पानी मिलेगा, जबकि 82 प्रतिशत पानी बिहार को मिलेगा. इस क्षेत्र का एक भी गांव विस्थापित नहीं होना चाहिए़
मानवाधिकार कार्यकर्ता ग्लैडसन डुंगडुंग ने कहा कि झारखंड में कई बड़े-छोटे डैम बनाये गये, पर किसी ने अपना उद्देश्य पूरा नहीं किया है़
लोगों में ऐसी एकजुटता होनी चाहिए कि कोई भी सरकार रहे, गलतियां करने पर उसे कठघरे में खड़ा कर सके़ं अनिल अंशुमन ने कहा कि यह देखना भी महत्वपूर्ण है कि राजनीतिक तौर पर किस दल का समर्थन करते है़ं क्या वह वाकई इसका हकदार है? छत्तीसगढ़ में सत्ता परिवर्तन के बाद भी दमन नहीं रुका़ मध्य प्रदेश में अवैध खनन जारी है़ हर क्षेत्र के आंदोलनकारियों को एकजुट होना चाहिए़
राकेश रोशन किड़ो ने बताया कि इस डैम के लिए 38508.21 एकड़ जमीन की जरूरत होगी़ इसमें 3044.38 एकड़ रैयती जमीन, 12756.51 एकड़ गैर मजरुआ जमीन व 2266. 72 एकड़ वनभूमि जलमग्न होगी़
इससे 19 गांवों के 6013 लोग विस्थापित होंगे़ इसमें गढ़वा जिले के भंडरिया प्रखंड के 16 गांव व लातेहार जिले के बरवाडीह प्रखंड के तीन गांव के 5002 आदिवासी, 330 दलित और 681 अन्य जाति के लोग शामिल है़ं
फादर स्टैन स्वामी ने कहा कि जो हो रहा है, उसके खिलाफ बोलना भी अपराध माना जाता है़ गणतंत्र को बचाना हम सबका कर्तव्य है़ इस अवसर पर आदिवासी फिल्मकार बीजू टोप्पो की फिल्म ‘एक हादसा और भी’ का प्रदर्शन किया गया़ टीएसी सदस्य रतन तिर्की, आदिवासी बुद्धिजीवी मंच के अध्यक्ष प्रेम चंद मुर्मू, ललित मुर्मू, वाल्टर कंडुलना सहित अन्य लोग मौजूद थे़
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