झारखंड हाइकोर्ट ने लगाई फटकार, कहा- 15 दिन में सुधारें ट्रैफिक सिग्नल की टाइमिंग, अभी भगवान भरोसे

Updated at : 04 Jan 2019 7:57 AM (IST)
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झारखंड हाइकोर्ट ने लगाई फटकार, कहा- 15 दिन में सुधारें ट्रैफिक सिग्नल की टाइमिंग, अभी भगवान भरोसे

रांची : झारखंड हाइकोर्ट के जस्टिस राजेश कुमार की अदालत ने गुरुवार को राजधानी रांची की नयी ट्रैफिक व्यवस्था को गंभीरता से लेते हुए ट्रैफिक सिग्नल की टाइमिंग में सुधार करने का निर्देश दिया. अदालत ने इसके लिए 15 दिन का समय दिया. अदालत ने ट्रैफिक सिस्टम को लेकर माैखिक रूप से कड़ी टिप्पणी की. […]

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रांची : झारखंड हाइकोर्ट के जस्टिस राजेश कुमार की अदालत ने गुरुवार को राजधानी रांची की नयी ट्रैफिक व्यवस्था को गंभीरता से लेते हुए ट्रैफिक सिग्नल की टाइमिंग में सुधार करने का निर्देश दिया. अदालत ने इसके लिए 15 दिन का समय दिया.
अदालत ने ट्रैफिक सिस्टम को लेकर माैखिक रूप से कड़ी टिप्पणी की. अदालत ने कहा : ऐसा लगता है कि राजधानी की ट्रैफिक व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है. किस डाटा के आधार पर रांची के चाैक-चाैराहों पर ट्रैफिक सिग्नल लगाया गया है, उसकी स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पा रही है? गुरुवार काे ट्रैफिक सिग्नल की वजह से शहर की कई सड़कों में लंबा जाम लग गया था. इस जाम में हाइकाेर्ट की गाड़ी भी फंस गयी थी.
क्रॉस ट्रैफिक भी खाेल दिया जाता है : महाधिवक्ता अजीत कुमार व ट्रैफिक एसपी अजीत पीटर डुंगडुंग से डाटा की जानकारी नहीं मिलने पर अदालत ने कहा : ट्रैफिक का कोई डाटा ही नहीं है? बिना डाटा के ही ट्रैफिक सिस्टम लागू कर दिया गया?
डाटा जरूरी है. इसके बिना कोई कार्य नहीं हो सकता है. पांच-पांच मिनट का डाटा होना चाहिए. अदालत ने कहा कि प्राय: दिन के 9.30 बजे से लेकर 11 बजे तक ट्रैफिक डायनेमिक रहती है. इसके बाद से ट्रैफिक स्टेटिक हो जाती है. फिर तीन बजे से ट्रैफिक डायनेमिक होने लगती है
ऐसा लगता है कि बिना अध्ययन के ही ट्रैफिक सिग्नल व्यवस्था लागू की गयी है. रांची में ट्रैफिक का दबाव देखें : अदालत ने कहा : रांची में इंटरनेशनल आधार पर ट्रैफिक सिग्नल की टाइमिंग सेट नहीं की जा सकती है. स्थानीय स्तर पर ट्रैफिक के दबाव को देखते हुए इसे सेट किया जाना चाहिए. गांव के लोग भी आज टेक्नोलॉजी में स्वयं को अप-टू-डेट करने का प्रयास कर रहे हैं. अदालत ने सुनवाई के दाैरान उपस्थित ट्रैफिक एसपी अजीत पीटर डुंगडुंग से पूछा कि जो ट्रैफिक सिस्टम व सिग्नल लागू किया गया है, वह किस डाटा बेस के आधार पर है? किस डाटा बेस के आधार पर सिग्नल की टाइमिंग सेट की गयी है?
ट्रैफिक एसपी ठोस जवाब नहीं दे पाये : अदालत के सवालों का ट्रैफिक एसपी ठोस जवाब नहीं दे पाये. उन्होंने कहा कि वे स्थल निरीक्षण कर उसमें सुधार करेंगे. अदालत ने ट्रैफिक एसपी को 15 दिनों का समय देते हुए डाटा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया. साथ ही मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 जनवरी को शाम चार बजे का समय तय किया. अदालत ने मामले में अधिवक्ता विभास सिन्हा को एमीकस क्यूरी बनाया.
इसलिए ट्रैफिक एसपी काे बुलाया
इससे पूर्व पहले सत्र में सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार से जानना चाहा कि ट्रैफिक की नयी व्यवस्था में चाैक-चौराहों पर किस समय, किस दिशा से यातायात का फ्लो क्या होगा, क्या इसका डाटा तैयार किया गया है? संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर शाम चार बजे ट्रैफिक एसपी को सशरीर उपस्थित होने का निर्देश दिया था.
अदालत ने कहा
बिना डाटा के ही नया ट्रैफिक सिस्टम लागू कर दिया गया है
चाैराहाें पर ट्रैफिक का लाेड कितना, इसका अध्ययन जरूरी
ट्रैफिक सिग्नल की गलत टाइमिंग के कारण लग रहा जाम
ट्रैफिक सिग्नल की टाइमिंग में जल्द आवश्यक सुधार करें
ट्रैफिक सिग्नल की टाइमिंग वाहनों के फ्लो से सेट हो
कोर्ट ने कहा कि प्राय: यह देखा जाता है कि करमटोली चाैक सहित अन्य चाैक-चौराहों पर लाल सिग्नल के कारण एक तरफ वाहनों की लंबी कतार लग जा रही है, जबकि हरा सिग्नलवाले रास्ते पर वाहन कम दिखते हैं. क्रॉस ट्रैफिक भी खोल दिया जाता है. इससे चौराहों पर जाम लग जाता है.
अदालत ने कहा कि ट्रैफिक सिग्नल की टाइमिंग सड़क पर व चाैक-चाैराहों पर यातायात के फ्लो को देखते हुए सेट की जानी चाहिए. चौक-चौराहों पर यातायात का दवाब किस दिशा से कितना है, इसका पूरा अध्ययन किया जाना चाहिए. इसके बाद ही रेड, येलो व ग्रीन लाइट की टाइमिंग सेट की जानी चाहिए.
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