मार्च में रुपया रह सकता है उतार-चढ़ाव में, मिडिल ईस्ट तनाव और महंगा तेल बढ़ा रहे दबाव

Updated at : 14 Mar 2026 3:55 PM (IST)
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Ruppe vs Dollor

मार्च में करेंसी में रह सकता है भारी उतार-चढ़ाव (फोटो क्रेडिट- mint )

Rupee vs Dollar: रुपये की चाल पर विदेशी निवेश (FPI) का भी बड़ा असर पड़ता है. अगर विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकालते हैं या वैश्विक बाजार में जोखिम बढ़ता है, तो रुपये में और कमजोरी आ सकती है.

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Rupee vs Dollar: भारतीय रुपया आने वाले दिनों में काफी उतार-चढ़ाव (वोलेटाइल) में रह सकता है. यूनियन बैंक के रिपोर्ट के मुताबिक मार्च महीने में वैश्विक हालात और भू-राजनीतिक तनाव की वजह से रुपये पर दबाव बना रह सकता है. हाल ही में 13 मार्च को रुपया 92.48 प्रति डॉलर के स्तर तक गिर गया था, जो अब तक का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है. इससे साफ है कि अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का असर भारतीय करेंसी पर भी पड़ रहा है.

मिडिल ईस्ट तनाव से बढ़ा खतरा

रिपोर्ट में कहा गया है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव रुपये के लिए बड़ा जोखिम बन सकता है. अगर वहां हालात और बिगड़ते हैं तो तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं. भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयात करने वाले देशों में से एक है. ऐसे में जब तेल महंगा होता है तो देश को ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं. इससे ट्रेड डेफिसिट और करेंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ने का खतरा रहता है और रुपये पर दबाव आता है.

विदेशी निवेश भी करेगा असर

रुपये की चाल पर विदेशी निवेश (FPI) का भी बड़ा असर पड़ता है. अगर विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकालते हैं या वैश्विक बाजार में जोखिम बढ़ता है, तो रुपये में और कमजोरी आ सकती है.

रिपोर्ट के मुताबिक मार्च में रुपये की दिशा कई चीजों पर निर्भर करेगी, जैसे

  • डॉलर की मजबूती
  • मिडिल ईस्ट के हालात
  • कच्चे तेल की कीमत
  • विदेशी निवेशकों का रुख
  • मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार से राहत

हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत के पास अच्छा विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेक्स रिजर्व) है. इसलिए रुपये में बहुत तेज या अचानक गिरावट की संभावना कम है. अभी के समय में रुपया एक तय दायरे में ही कारोबार कर रहा है. जब डॉलर की कीमत ज्यादा होती है तो कई निर्यातक डॉलर बेचते हैं, जिससे रुपये को थोड़ी राहत मिल जाती है.

महंगा तेल बढ़ा सकता है चालू खाते का घाटा

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर कच्चे तेल की औसत कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रहती है, तो वित्त वर्ष 2027 में भारत का चालू खाते का घाटा (Current Account Deficit) GDP के 2% से ज्यादा तक जा सकता है. फिलहाल चालू वित्त वर्ष में यह घाटा GDP के 1% से भी कम रहने का अनुमान है. लेकिन तेल की कीमतों में तेजी और युद्ध जैसी स्थिति वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर सकती है, जिससे भारत की आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ सकता है.

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Abhishek Pandey

लेखक के बारे में

By Abhishek Pandey

अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।

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