मार्च में रुपया रह सकता है उतार-चढ़ाव में, मिडिल ईस्ट तनाव और महंगा तेल बढ़ा रहे दबाव

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मार्च में करेंसी में रह सकता है भारी उतार-चढ़ाव (फोटो क्रेडिट- mint )

Rupee vs Dollar: रुपये की चाल पर विदेशी निवेश (FPI) का भी बड़ा असर पड़ता है. अगर विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकालते हैं या वैश्विक बाजार में जोखिम बढ़ता है, तो रुपये में और कमजोरी आ सकती है.

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Rupee vs Dollar: भारतीय रुपया आने वाले दिनों में काफी उतार-चढ़ाव (वोलेटाइल) में रह सकता है. यूनियन बैंक के रिपोर्ट के मुताबिक मार्च महीने में वैश्विक हालात और भू-राजनीतिक तनाव की वजह से रुपये पर दबाव बना रह सकता है. हाल ही में 13 मार्च को रुपया 92.48 प्रति डॉलर के स्तर तक गिर गया था, जो अब तक का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है. इससे साफ है कि अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का असर भारतीय करेंसी पर भी पड़ रहा है.

मिडिल ईस्ट तनाव से बढ़ा खतरा

रिपोर्ट में कहा गया है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव रुपये के लिए बड़ा जोखिम बन सकता है. अगर वहां हालात और बिगड़ते हैं तो तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिससे कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं. भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयात करने वाले देशों में से एक है. ऐसे में जब तेल महंगा होता है तो देश को ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं. इससे ट्रेड डेफिसिट और करेंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ने का खतरा रहता है और रुपये पर दबाव आता है.

विदेशी निवेश भी करेगा असर

रुपये की चाल पर विदेशी निवेश (FPI) का भी बड़ा असर पड़ता है. अगर विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकालते हैं या वैश्विक बाजार में जोखिम बढ़ता है, तो रुपये में और कमजोरी आ सकती है.

रिपोर्ट के मुताबिक मार्च में रुपये की दिशा कई चीजों पर निर्भर करेगी, जैसे

  • डॉलर की मजबूती
  • मिडिल ईस्ट के हालात
  • कच्चे तेल की कीमत
  • विदेशी निवेशकों का रुख
  • मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार से राहत

हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत के पास अच्छा विदेशी मुद्रा भंडार (फॉरेक्स रिजर्व) है. इसलिए रुपये में बहुत तेज या अचानक गिरावट की संभावना कम है. अभी के समय में रुपया एक तय दायरे में ही कारोबार कर रहा है. जब डॉलर की कीमत ज्यादा होती है तो कई निर्यातक डॉलर बेचते हैं, जिससे रुपये को थोड़ी राहत मिल जाती है.

महंगा तेल बढ़ा सकता है चालू खाते का घाटा

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर कच्चे तेल की औसत कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रहती है, तो वित्त वर्ष 2027 में भारत का चालू खाते का घाटा (Current Account Deficit) GDP के 2% से ज्यादा तक जा सकता है. फिलहाल चालू वित्त वर्ष में यह घाटा GDP के 1% से भी कम रहने का अनुमान है. लेकिन तेल की कीमतों में तेजी और युद्ध जैसी स्थिति वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर सकती है, जिससे भारत की आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ सकता है.

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अभिषेक पाण्डेय

लेखक के बारे में

By अभिषेक पाण्डेय

अभिषेक पाण्डेय पिछले तीन वर्षों से प्रभात खबर में डिजिटल जर्नलिस्ट के तौर पर काम कर रहे हैं। वे बिजनेस और अर्थव्यवस्था से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने का काम करते हैं। शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, MSME, कृषि और इंडस्ट्री जैसे विषयों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे रिसर्च के साथ ऐसी खबरें और एक्सप्लेनर तैयार करते हैं, जिन्हें आम लोग भी आसानी से समझ सकें। इसके अलावा यूटिलिटी न्यूज और सक्सेस स्टोरीज लिखने में भी उनकी खास रुचि है।

पत्रकारिता अनुभव

अभिषेक ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से की है, जिसे पत्रकारिता की दुनिया में 'दादा माखनलाल की बगिया' भी कहा जाता है।

करियर की शुरुआत उन्होंने राजस्थान पत्रिका के साथ की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को करीब से समझा। इसके बाद वे प्रभात खबर से जुड़े और पिछले तीन वर्षों से डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में काम कर रहे हैं।

इस दौरान उन्होंने बिजनेस, शेयर बाजार, पर्सनल फाइनेंस, बैंकिंग, बजट, सरकारी योजनाएं, कृषि, MSME और अर्थव्यवस्था से जुड़े कई अहम विषयों पर रिपोर्टिंग और रिसर्च आधारित लेख लिखे हैं। इसके अलावा वे वीडियो स्क्रिप्टिंग, एक्सप्लेनर स्टोरी, डेटा स्टोरी और डिजिटल कंटेंट पर भी लगातार काम करते हैं। उनकी कोशिश रहती है कि जटिल आर्थिक और वित्तीय विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों और दर्शकों तक पहुंचाया जाए।

शिक्षा

अभिषेक पाण्डेय ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU), भोपाल से पत्रकारिता एवं जनसंचार की पढ़ाई की है। यहां उन्होंने रिपोर्टिंग, डिजिटल मीडिया, न्यूज़ राइटिंग, वीडियो प्रोडक्शन और मल्टीमीडिया जर्नलिज्म की बारीकियां सीखीं, जिनका इस्तेमाल वे आज अपनी पत्रकारिता में कर रहे हैं।

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