रांची : वाहनों के बढ़ने व पेड़ों की कटाई से विकास तो हुआ, पर पर्यावरण का नाश हो गया

Updated at : 17 Dec 2018 10:01 AM (IST)
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रांची : वाहनों के बढ़ने व पेड़ों की कटाई से विकास तो हुआ, पर पर्यावरण का नाश हो गया

पर्यावरण पाठशाला-2018 का समापन, बोले मंत्री सरयू राय नामकुम/रांची : युगांतर भारती व नेचर फाउंडेशन ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय पर्यावरण पाठशाला-2018 का समापन रविवार को हुआ. इस मौके पर खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने कहा कि जाने-अनजाने में वायु प्रदूषण हमारे जीवन पर गहरा असर डाल रहा है. शहरों में […]

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पर्यावरण पाठशाला-2018 का समापन, बोले मंत्री सरयू राय
नामकुम/रांची : युगांतर भारती व नेचर फाउंडेशन ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय पर्यावरण पाठशाला-2018 का समापन रविवार को हुआ. इस मौके पर खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय ने कहा कि जाने-अनजाने में वायु प्रदूषण हमारे जीवन पर गहरा असर डाल रहा है.
शहरों में गाड़ियों के बढ़ने तथा पेड़ों की कटाई से विकास तो हुआ, पर पर्यावरण का नाश हो गया है.
अगर वायु प्रदूषण से होने वाली बीमारियों तथा रोगियों की संख्या की गिनती है, तो इससे आर्थिक नुकसान का भी पता चल जायेगा. राजनीतिक दलों को अपने घोषणा पत्र में पर्यावरण संरक्षण तथा प्रदूषण नियंत्रण की बातों को शामिल करना चाहिए, ताकि पर्यावरण संरक्षण व आम लोगों के स्वास्थ्य के संबंध में उनकी मंशा लोगों तक पहुंच सके.
बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ परविंदर कौशल ने प्रदूषण नियंत्रण के कार्यक्रमों को वृहद पैमाने पर आयोजित करने पर बल दिया. उन्होंने दैनिक दिनचर्या में बदलाव लाने के साथ-साथ ऐसे पौधों को लगाने का आग्रह किया, जिससे प्रदूषण की मात्रा में कमी आये.
विनोद बिहारी महतो विवि के कुलपति प्रो अंजनी कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि धनबाद व आसपास के क्षेत्र में खनन के कारण प्रदूषण का स्तर काफी ऊंचा है. झरिया के विस्थापितों के लिए हजारों आवास बनाये गये तथा बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई की गयी है. यह क्षेत्र आज भी वीरान है तथा यहां भूगर्भ जल की स्थिति भयावह हो गयी है. इन इलाकों में प्रदूषण के कारण मृत्यु दर में भी काफी वृद्धि हुई है.
पूर्व पीसीसीएफ डॉ डीके श्रीवास्तव, एसएन सिन्हा इंस्टीट्यूट अॉफ बिजनेस मैनेजमेंट के निदेशक प्रो एनपी सिंह, अभाविप के प्रांत मंत्री युगबल शुक्ला तथा 20 सूत्री समिति के सदस्य राकेश भास्कर ने भी पर्यावरण की दशा व समस्याओं के निराकरण पर अपनी बातें रखीं.
इस मौके पर प्रतिभागियों को पर्यावरण कानून के संदर्भ में जानकारी दी गयी. इस दौरान झारखंड रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय के प्रो सिद्धांत चंद्र ने भारतीय संविधान के अनुच्छेदों तथा अधिकारों की जानकारी दी. समापन सत्र में मंच का संचालन प्रवीण सिंह ने किया. वहीं संस्था के कार्यकारी अध्यक्ष अंशुल शरण ने युगांतर भारती का वार्षिक प्रतिवेदन एवं लेखा-जोखा प्रस्तुत किया. कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र व पौधा देकर सम्मानित किया गया.
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