झारखंड में बिना जीपीएस मॉनिटरिंग के चल रहे हैं अनाज ढोने वाले 600 वाहन
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 17 Dec 2018 10:01 AM
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संजय ट्रैकिंग व मॉनिटरिंग नहीं होने से कालाबाजारी की संभावना रांची : खाद्य आपूर्ति विभाग के तहत चल रहे वाहनों (ट्रकों) की ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) के जरिये ट्रैकिंग नहीं हो रही है. इससे भारतीय खाद्य निगम (एफसीआइ) के डिपो से राज्य खाद्य निगम (एसएफसी) के 252 गोदामों सहित एसएफसी गोदाम से पीडीएस डीलर तक […]
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संजय
ट्रैकिंग व मॉनिटरिंग नहीं होने से कालाबाजारी की संभावना
रांची : खाद्य आपूर्ति विभाग के तहत चल रहे वाहनों (ट्रकों) की ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) के जरिये ट्रैकिंग नहीं हो रही है. इससे भारतीय खाद्य निगम (एफसीआइ) के डिपो से राज्य खाद्य निगम (एसएफसी) के 252 गोदामों सहित एसएफसी गोदाम से पीडीएस डीलर तक चावल, चीनी व नमक पहुंचाने वाले करीब 600 वाहनों (ट्रकों) की मॉनिटरिंग का काम ठप है. वाहनों की ट्रैकिंग व मॉनिटरिंग न होने से अनाज व चीनी की कालाबाजारी की संभावना बनी हुई है.
गौरतलब है कि प्रति बोरी अनाज व चीनी में कमी की शिकायत लंबे समय से होती रही है. पीडीएस डीलरों व इनके एसोसिएशन की अोर से बार-बार यह कहा जाता है कि उन्हें प्रति बोरी चावल व चीनी कम मात्रा में मिलती है.
इससे वे भी लाभुकों को पूरा अनाज नहीं देते. अनाज, चीनी व नमक के परिवहन में गड़बड़ी की शिकायत के बाद ही झारखंड एजेंसी फॉर प्रमोशन अॉफ आइटी (जैप-आइटी) ने विभाग के लिए जीपीएस ट्रैकिंग का टेंडर निकाला था. इसके बाद गुड़गांव, हरियाणा की कंपनी रोजमेर्टा टेक्नोलॉजी लिमिटेड का चयन किया गया.
इस कंपनी के साथ 451 रुपये प्रति वाहन प्रति माह की दर पर दो वर्षों के लिए जीपीएस लगाने तथा वाहनों की मॉनिटरिंग का एकरारनामा विभाग ने अक्तूबर-2016 में किया. इसके साथ ही जीपीएस लगाने वाली कंपनी को तीन माह का एक्सटेंशन देकर इसका अवधि विस्तार जनवरी-2019 तक कर दिया गया था.
इधर, जुलाई-2018 में पुराने परिवहन अभिकर्ताअों (वाहन ठेकेदारों) की कार्य अवधि पूरी हो गयी तथा नये अभिकर्ता आ गये. पर इनके वाहनों तथा इनके नंबर की जानकारी जीपीएस लगाने वाली कंपनी को नहीं मिल रही है. लिहाजा जुलाई-2018 से जीपीएस ट्रैकिंग का काम ठप है. गौरतलब है कि राज्य भर के गोदामों में व जन वितरण प्रणाली के डीलरों के पास प्रति माह करीब 14.40 लाख क्विंटल अनाज तथा 23 हजार क्विंटल चीनी की ढ़ुलाई होती है.
जीपीएस से लाभ
अनाज लदे वाहन यदि अपने रूट से अलग इधर-उधर जाते हैं, तो जीपीएस से इसे ट्रैक किया जा सकता है. इससे कहीं जाकर अनाज निकाल लेने या बेच देने जैसी घटना रोकी जा सकती है. विभागीय अधिकारी भी शक के आधार पर किसी वाहन का रूट चार्ट मांग सकते हैं. रोजमेर्टा का ट्रैकिंग स्टेशन गोल चक्कर, धुर्वा के पास स्थित खाद्य निदेशालय में स्थित है.
कई वाहनों में जीपीएस निकाल देने या इसे किसी दूसरे वाहन में लगा देने की शिकायत मिलती रही है. हमारे लोग जब किसी वाहन की जांच करते थे, तो पता चलता था कि उसके जीपीएस के साथ छेड़छाड़ की गयी है. अभी करीब 200 ट्रकों में जीपीएस लगा हुआ है. पर उनका रूट चार्ट हमलोग नहीं जानते. उनकी ट्रैकिंग भी नहीं हो रही है.
रोजमेर्टा टेक्नोलॉजी का एक अधिकारी (नाम न छापने की शर्त पर)
पुराने वाहनों से निकाल कर नये अभिकर्ता के ट्रकों में जीपीएस लगाने का निर्देश दिया गया था. कितने ट्रकों में यह लगा है, इसकी जानकारी लेकर दूंगा. मुझे एक-दो दिनों का समय दें.
अमिताभ कौशल, सचिव, खाद्य आपूर्ति
(सोमवार को सचिव से हुई बात के बाद शनिवार तक जीपीएस लगे वाहनों की जानकारी नहीं मिली)
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