रस्किन बांड को सुनने के लिए उमड़ी युवाओं की भीड़, बोले, ''किताबों को बनाएं दोस्‍त''

By Prabhat Khabar Digital Desk
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रांची : राजधानी रांची स्थित आड्रे हाउस में युवा साहित्‍यप्रेमियों की भीड़ अचानक उस समय उमड़ पड़ी जब उनके पसंदिदा लेखक और कहानीकार पद्मश्री रस्किन बांड स्‍टेज पर आये. दरअसल बांड 'टाटा स्‍टील झारखंड लिटरेरी मीट' में शामिल होने के लिए रांची आये और इस समारोह के दोनों दिन अपने चहेतों को अपने बारे और अपनी लेखनी के बारे में बताया.

लिटरेरी मीट के दूसरे दिन बांड ने 'ग्रोइंग अप विथ रस्किन' ओपन सेशन में अपनी कहानियों और रचनाओं के बारे में बताया. उन्‍होंने इस दौरान युवाओं और साहित्‍यप्रेमियों के सवालों के जवाब भी दिया. रस्किन ने बताया कि उन्‍हें कहानी लिखने की प्रेरणा प्रकृति और उनके आप-पास के लोगों से मिलती है.

वो महज 17 साल की उम्र से लिखना शुरू कर दिया था. उन्‍होंने पहला उपन्‍यास 'रूम ऑन द रूफ' लिखा था, जो काफी चर्चित हुआ और उसे प्रतिष्ठित जॉन लेवेनिन राइस अवॉर्ड से भी नवाजा गया.

रस्किन बांड को सुनने के लिए उमड़ी युवाओं की भीड़, बोले, ''किताबों को बनाएं दोस्‍त''

500 से अधिक ज्‍यादा शॉट स्‍टोरी, निबंध, उपन्‍यास और 50 से अधिक बच्‍चों की किताबें लिख चुके बांड ने बताया कि जब वो बच्‍चों की किताबें लिखते हैं तो वो उसमें खुद को पाते हैं. बांड ने कहा, किताबों को अपना सच्‍चा दोस्‍त बनाना चाहिए.

बांड से जब पूछा गया कि वो घोस्‍ट पर कितना विश्‍वास करते हैं, तो उन्‍होंने कहा, मैं घोस्‍ट पर जरा भी विश्‍वास नहीं करता, हां मेरी रचना में घोस्‍ट जरूर मिलते हैं, क्‍योंकि ऐसी कहानियों को अधिक से अधिक लोग सुनना चाहते हैं. बांड ने घोस्‍ट ऑफ ए पीपल ट्री शीर्षक से कहानी लिखी है जो काफी पसंद किया जाता है.

19 मई 1934, जामनगर कसौली, हिमाचल प्रदेश में जन्‍में बांड ने युवाओं को लिखने की आदत बनाने की सलाह दी. उन्‍होंने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को कहा कि बच्‍चों में किताबें पढ़ने की आदत डालनी चाहिए.

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