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लक्षण पर नहीं, समस्या के मूल कारण पर चिंतन करें

Updated at : 05 Dec 2018 9:00 AM (IST)
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लक्षण पर नहीं, समस्या के मूल कारण पर चिंतन करें

फादर अशोक कुजूर एक महात्मा ने किसी गांव में कुछ दिनों के लिए अपना डेरा जमाया़ गांव के कुछ लोग उनके पास एक समस्या लेकर पहुंचे़ उन्होंने कहा- महाराज, गांव में एक कुआं है, जिससे बहुत बदबू आ रही है़ महात्मा ने बदबू का कारण पूछा़ गांव वालों ने बताया कि तीन कुत्ते लड़ते-लड़ते उस […]

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फादर अशोक कुजूर
एक महात्मा ने किसी गांव में कुछ दिनों के लिए अपना डेरा जमाया़ गांव के कुछ लोग उनके पास एक समस्या लेकर पहुंचे़ उन्होंने कहा- महाराज, गांव में एक कुआं है, जिससे बहुत बदबू आ रही है़ महात्मा ने बदबू का कारण पूछा़ गांव वालों ने बताया कि तीन कुत्ते लड़ते-लड़ते उस कुएं में गिर गये और निकल नहीं पाने के कारण उसी में मर गये. महात्मा ने कुछ सोचते हुए कहा-एक काम करो, किसी तीर्थस्थल से लाये जल को कुंए में डाल दो़ लोगों ने वैसा ही किया, लेकिन समस्या का समाधान नहीं निकला़
लोग दूसरी बार महात्मा के पास पहुंचे़ इस बार महात्मा ने उनसे धार्मिक कार्यक्रम करने के लिए कहा़ ऐसा करने पर भी समस्या जस की तस बनी रही़
तीसरी बार महात्मा ने लोगों से कहा कि वे कुएं में कोई सुगंधित द्रव्य डाल दे़ं सुगंधित द्रव्य डाला गया, किंतु नतीजा वही रहा़ बदबू अभी भी कुएं के पानी से नहीं गयी. चौथी बार महात्मा खुद कुएं को देखने के लिए आये. उन्होंने लोगों से पूछा- तुम लोगों ने और सब तो कर लिया, पर क्या मरे हुए कुत्तों को कुएं से निकाला? लोगों ने कहा- इस बारे में तो आपने कहा ही नहीं. संत बोले- जब तक उन्हें नहीं निकालोगे, इन उपायों का कोई लाभ नहीं होगा़
यह हमारे जीवन की कहानी है़ इस शरीर नामक कुएं के अंत:करण में लोभ, क्रोध व व्यभिचार के तीन कुत्ते लड़ते-झगड़ते गिर गये हैं. हमारा जीवन इन्हीं की वजह से प्रदूषित है़ आगमन काल हमें यह चुनौती देता है कि हम पाप होने के मूल कारणों को जीवन से निकालने का प्रयास करे़ं
अगर हमारा अंत:करण ही दूषित है, तो तीर्थयात्रा, त्याग-तपस्या, दान-पुण्य, विनती-प्रार्थना का कोई सार्थक परिणाम नहीं निकलेगा़ सबसे पहले हम अपना पाप स्वीकार करें और पाप कर्मों को छोड़ देने का दृढ़ संकल्प लें. लक्षण पर नहीं, बल्कि पाप करने के मूल कारण पर प्रहार करे़ं
लेखक डॉन बॉस्को यूथ एंड एजुकेशनल सर्विसेज बरियातू के निदेशक हैं.
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