झारखंड : दिव्यांगों को स्वावलंबी बना रहे नि:शक्त धनीजीत राम चांद

Updated at : 29 Nov 2018 6:42 PM (IST)
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झारखंड : दिव्यांगों को स्वावलंबी बना रहे नि:शक्त धनीजीत राम चांद

।। गुरुस्वरूप मिश्रा ।। धनीजीत राम चांद (44 वर्ष) दिव्यांग हैं. शरीर से बिल्कुल लाचार हैं. उन्हें देखकर उनके जज्बे पर आप यकीन नहीं कर पायेंगे. उनका आत्मविश्वास आपका भ्रम तोड़ देगा. अपने बुलंद हौसले के कारण न सिर्फ वह आत्मनिर्भर हैं, बल्कि करीब 10 दिव्यांगों को वह स्वावलंबी भी बना रहे हैं. हौसले से […]

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।। गुरुस्वरूप मिश्रा ।।

धनीजीत राम चांद (44 वर्ष) दिव्यांग हैं. शरीर से बिल्कुल लाचार हैं. उन्हें देखकर उनके जज्बे पर आप यकीन नहीं कर पायेंगे. उनका आत्मविश्वास आपका भ्रम तोड़ देगा. अपने बुलंद हौसले के कारण न सिर्फ वह आत्मनिर्भर हैं, बल्कि करीब 10 दिव्यांगों को वह स्वावलंबी भी बना रहे हैं.

हौसले से दिव्यांगता को दे रहे मात

चार वर्ष की उम्र से ही रांची जिले के बरियातू स्थित चेशायर होम में रह रहे धनीजीत राम चांद यूं तो छत्तीसगढ़ के मूल निवासी हैं, लेकिन पिछले 40 साल से वह रांची में ही हैं. मैट्रिक पास धनीजीत को किसी पर निर्भर रहना या बोझ बने रहना कतई पसंद नहीं था. लिहाजा उन्होंने कुछ करने की ठानी. आखिरकार वर्ष 1998 में उन्होंने स्वरोजगार के लिए कदम आगे बढ़ाया. चेशायर होम समेत अन्य समाजसेवियों के सहयोग से उनकी योजना ने मूर्त रूप लिया और मशीन से कॉपी बनाने का काम शुरू कर दिया. इसके साथ ही छह दिव्यांगों को रोजगार मिल गया. वैसे यह काम भी उतना आसान नहीं था. अपर बाजार से रॉ मेटेरियल लेने एवं स्कूलों का भ्रमण करने को लेकर उन्हें रोजाना तीस किमी ट्राई साइकिल चलानी पड़ती थी. इस संघर्ष के बाद उनकी राह आसान हुई थी.

स्वरोजगार से आत्मनिर्भरता

सात-आठ साल बाद प्रिंटिंग का काम शुरू हुआ. किताब, कॉपी, कवर, पंपलेट, नोटबुक एवं फॉर्म समेत अन्य सामग्रियों की प्रिंटिंग की जाने लगी. काम बढ़ा, तो अन्य दिव्यांगों को भी रोजगार मिला. धनीजीत बताते हैं कि आज 10 दिव्यांगों को रोजगार मिल गया है. इससे वह आत्मनिर्भर बन गये हैं. सभी को करीब छह हजार रूपये की मासिक आमदनी हो जाती है. वह कहते हैं कि कोकर के डॉन बॉस्को स्कूल की कैंटीन का भी संचालन कर रहे हैं. यहां भी चार लोगों को रोजगार दे रहे हैं.

स्कूलों में किताब-कॉपी की बिक्री पर रोक से बढ़ी परेशानी

धनीजीत कहते हैं कि स्कूलों में ही उनकी किताब व कॉपी की बिक्री होती थी. इस पर रोक से उनकी बिक्री यकायक प्रभावित हो गयी. दिव्यांगों द्वारा निर्मित कॉपी की स्कूलों में बिक्री का आदेश जारी करने को लेकर वह राज्यपाल समेत अन्य पदाधिकारियों से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई पहल नहीं की गयी है.

दिव्यांगों को रोजगार देने की योजना

मिक्सचर प्लांट एवं हल्दी पीसने वाली मशीन लगाकर दिव्यांगों को स्वरोजगार देने की भावी योजना है. धनीजीत कहते हैं कि सबकुछ ठीक रहा, तो जल्द ही इसकी शुरुआत की जायेगी.

हुनर से आत्मनिर्भर बनाना है मकसद- धनीजीत

दिव्यांग धनीजीत राम चांद कहते हैं कि वह दिव्यांग हैं. शारीरिक रूप से लाचार हैं. इसका मतलब ये नहीं कि वह मन से दिव्यांग हैं. उनका हौसला ही उनकी असली ताकत है. किसी पर निर्भर रहने की बजाए वह दिव्यांगों को हुनर से आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश में लगे रहते हैं.

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