रांची : चुगला दम खिसोटने अयलै ससुरारी में... पर झूमे लोग
Updated at : 23 Nov 2018 5:26 AM (IST)
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रांची : मातृभाषा से संस्कार जागृत होता है. इसलिए हर माता का यह कर्तव्य है कि अपने बच्चों को मातृभाषा की शिक्षा दें. यह बातें झारखंड मैथिली मंच द्वारा हरमू स्थित विद्यापति दालान में लोक पर्व सामा-चकेवा के कार्यक्रम में अवकाशप्राप्त पदाधिकारी अपराजिता झा ने कही. सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत भगवती वंदना जय-जय भैरवी…से हुई. […]
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रांची : मातृभाषा से संस्कार जागृत होता है. इसलिए हर माता का यह कर्तव्य है कि अपने बच्चों को मातृभाषा की शिक्षा दें. यह बातें झारखंड मैथिली मंच द्वारा हरमू स्थित विद्यापति दालान में लोक पर्व सामा-चकेवा के कार्यक्रम में अवकाशप्राप्त पदाधिकारी अपराजिता झा ने कही.
सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत भगवती वंदना जय-जय भैरवी…से हुई. इसके बाद रजनी झा ने भगवती गीत अहांक शरण में अयलहुं हे भवानी… प्रस्तुत किया. अनिता झा व अर्चना झा के युगल गीत चुगला दम खिसोटने अयलै ससुरारी में…, पाकल-पाकल दाढ़ी… पर लोग लोट-पोट हो गये. बबीता झा के गीत कातिके में अयलीह सामा चलु चलु पोखरि कात… सहित अन्य गीतों पर लोग देर रात तक झूमते रहे.
पूनम मिश्रा, बिट्टू झा, अंजू झा, कमला चौधरी, सुनीता झा ने भी सामा गीत प्रस्तुत किया. मंच संचालन वीणा झा ने किया. कार्यक्रम में 107 प्रतिभागियों द्वारा सुसज्जित डाला लाये गये. सुसज्जित डाला पुरस्कार प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार रश्मि झा, द्वितीय पुरस्कार आहना कृशा व तृतीय पुरस्कार शकुंतला झा को दिया गया.
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