जेनरल कैटेगरी में बाहरी को नहीं रोक सकते, झारखंड के विद्यार्थी भी दूसरे राज्य में जाकर करते हैं नौकरी : नीरा यादव

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 21 Nov 2018 7:20 AM

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रांची : शिक्षा मंत्री डॉ नीरा यादव ने मंगलवार को प्रभात खबर से कहा कि राज्य में प्लस टू शिक्षक नियुक्ति में आधे से अधिक पद रिक्त रह गये. अगर आज भी अभ्यर्थी मिलें, तो उनकी नियुक्ति की जा सकती है. ऐसे में झारखंड को छोड़ बाहरी लोगों की नियुक्ति की बात कहना गलत है. […]

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रांची : शिक्षा मंत्री डॉ नीरा यादव ने मंगलवार को प्रभात खबर से कहा कि राज्य में प्लस टू शिक्षक नियुक्ति में आधे से अधिक पद रिक्त रह गये. अगर आज भी अभ्यर्थी मिलें, तो उनकी नियुक्ति की जा सकती है. ऐसे में झारखंड को छोड़ बाहरी लोगों की नियुक्ति की बात कहना गलत है.
नियुक्ति के प्रावधान के अनुरूप 50 फीसदी आरक्षित पद पर केवल झारखंड के अभ्यर्थियों की नियुक्ति हुई है. सामान्य वर्ग की अनारक्षित सीट पर बाहरी लोगों की नियुक्ति पर रोक नहीं लगा सकते हैं. झारखंड के विद्यार्थी भी सामान्य वर्ग की अनारक्षित सीट पर दूसरे राज्यों में नौकरी लेते हैं. जब सीट ही रिक्त रह गयी, तो यह कैसे कहा जा सकता है कि बाहरी लोगों की नियुक्ति हो रही है.
मामला. +2 शिक्षक नियुक्ति में दूसरे राज्यों के अभ्यर्थियों की बहाली का
इधर मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी ने सीएम को लिखा पत्र
बाहरी की नियुक्ति से झारखंड के युवाओं में असंतोष, सरकार की छवि पर असर
रांची : जल संसाधन, पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री चंद्रप्रकाश चौधरी ने मुख्यमंत्री रघुवर दास से नियोजन नीति, स्थानीय नीति व आरक्षण नीति में रह गयी त्रुटि को दूर करने और पीजीटी परीक्षा परिणाम की निष्पक्ष जांच कर जारी करने का आग्रह किया है.
उन्होंने मुख्यमंत्री से राज्य में जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा को अनिवार्य किये जाने का भी आग्रह किया है. मुख्यमंत्री को लिखे गये पत्र में चौधरी ने कहा है कि राज्य के अभ्यर्थियों को नियुक्तियों में ज्यादा से ज्यादा मौका देने के लिए नियोजन नीति की त्रुटियों को दूर करना होगा. त्रुटियों की वजह से ही राज्य के योग्य अभ्यर्थियों की अनदेखी हो रही है और नियुक्तियों में राज्य के बाहर के लोगों का चयन हो रहा है. पीजीटी परीक्षा में उत्तर प्रदेश, बिहार व बंगाल के अभ्यर्थियों का चयन हुआ है.
इससे राज्य के अभ्यर्थियों में भारी असंतोष है. बाहरी अभ्यर्थियों के चयन से सरकार की छवि भी धूमिल हुई है. मंत्री ने लिखा है कि पूर्व में भी नियोजन नीति, आरक्षण नीति और स्थानीय नीति की त्रुटियों को लेकर उनके द्वारा पत्र लिख कर मुख्यमंत्री का ध्यान आकृष्ट कराया गया था. उस पर ध्यान दिया गया होता, तो इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न नहीं होती. उन्होंने कहा है कि राज्य सरकार द्वारा जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के अलावा राज्य में नाममात्र के लिए बोली जाने वाली भाषाओं को भी परीक्षा में सम्मिलित कर दिया गया है.
इसी कारण अन्य राज्य के अभ्यर्थियों को चयन प्रक्रिया में फायदा हो रहा है. मामले पर गंभीरता से विचार कर विशेषज्ञों की एक समिति गठित कर त्रुटियों को दूर करने पर काम होना चाहिए.
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