नहीं लौटे पारा शिक्षक, कैबिनेट में उठा मामला

Updated at : 20 Nov 2018 9:56 PM (IST)
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नहीं लौटे पारा शिक्षक, कैबिनेट में उठा मामला

नहीं लौटे पारा शिक्षक, कैबिनेट में उठा मामला सरकार का स्टैंड : किसी राज्य में स्थायीकरण का प्रावधान नहींप्रभात खबर टोली इंट्रो : राज्य के स्थापना दिवस से आंदोलनरत पारा शिक्षक मंगलवार को भी काम पर नहीं लौटे़ सरकार द्वारा अल्टीमेटम भी मंगलवार को समाप्त हो गया़ इधर कैबिनेट की बैठक में भी पारा शिक्षकों […]

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नहीं लौटे पारा शिक्षक, कैबिनेट में उठा मामला

सरकार का स्टैंड : किसी राज्य में स्थायीकरण का प्रावधान नहीं
प्रभात खबर टोली

इंट्रो : राज्य के स्थापना दिवस से आंदोलनरत पारा शिक्षक मंगलवार को भी काम पर नहीं लौटे़ सरकार द्वारा अल्टीमेटम भी मंगलवार को समाप्त हो गया़ इधर कैबिनेट की बैठक में भी पारा शिक्षकों के आंदोलन का मामला उठा़ मंत्री सरयू राय ने यह मामला उठाते हुए पूरे मामले में कैबिनेट के स्तर से पक्ष रखे जाने की बात की़ शाम में सरकार के आधिकारिक सूत्रों की ओर से पारा शिक्षकों की मांगों पर पक्ष रखा गया़ सरकार ने कहा : देश के किसी राज्य में पारा शिक्षक के स्थायीकरण का प्रावधान नहीं है़ सरकार पारा शिक्षक के हड़ताल को देखते हुए वैकल्पिक तैयारी शुरू कर दी है़ अवकाश के बाद भी बुधवार को शिक्षा विभाग का कार्यालय खोला गया है़ जैक से टेट सफल अभ्यर्थियों का नाम ले लिया गया है़
छत्तीसगढ़ व झारखंड में नियुक्ति प्रक्रिया में एकरूपता नहीं

झारखंड के पारा शिक्षक अलग-अलग राज्यों का हवाला देकर अपने लिए वेतनमान व स्थायीकरण की मांग कर रहे हैं. पर अलग-अलग राज्यों में इनकी नियुक्ति प्रक्रिया में समानता नहीं है. झारखंड सरकार के अधिकारिक सूत्रों के अनुसार जिस छत्तीसगढ़ को आधार बना कर पारा शिक्षक स्थायीकरण की मांग कर रहे हैं, वहां पूरी नियुक्ति प्रक्रिया विज्ञापन निकाल कर की गयी है. मध्यप्रदेश में व्यापम से नियुक्ति हुई है. उत्तर प्रदेश में पारा शिक्षकों को 10 हजार मानदेय मिलता है, वह भी 11 माह के लिए. झारखंड में 12 माह का मानदेय दिया जाता है. झारखंड को छोड़ कर हर राज्य में नियुक्ति में आरक्षण का प्रावधान किया गया था. राज्य में नियुक्ति ग्राम शिक्षा समिति के माध्यम से हुई थी. इसमें आरक्षण का पालन नहीं किया गया. किसी भी राज्य में पारा शिक्षकों को स्थायी करने का प्रावधान नहीं है. देश में झारखंड ही एक मात्र ऐसा राज्य है, जहां शिक्षक नियुक्ति में पारा शिक्षकों को 50 प्रतिशत आरक्षण मिलता है. झारखंड में अब तक 10 हजार पारा शिक्षक नियमित हो चुके हैं. पारा शिक्षकों को स्थायी करने से राज्य सरकार पर 3123 करोड़ हर साल वित्तीय बोझ बढ़ेगा. नि: शुल्क एवं बाल अधिकार अधिनियम 2009 के तहत एनसीटीइ द्वारा निर्धारित योग्यता के तहत मान्यता प्राप्त संस्थान से प्रशिक्षण एवं शिक्षक पात्रता परीक्षा पास होना अनिवार्य है. झारखंड में अधिकांश पारा शिक्षक इस योग्यता को नहीं रखते हैं.
छत्तीसगढ़ में पारा शिक्षकों की नियुक्ति का प्रावधान

राज्य के पारा शिक्षक जिस छत्तीसगढ़ राज्य को आधार बना कर स्थायीकरण व वेतनमान की मांग कर रहे हैं, वहां की नियुक्ति प्रक्रिया झारखंड से बिल्कुल अलग है. छत्तीसगढ़ में दो तरह से शिक्षकों की नियुक्ति होती है. एक तो सरकार सीधे शिक्षकों की नियुक्ति करती है, तो दूसरी ओर पंचायत स्तर पर भी शिक्षकों की नियुक्ति होती है. दोनों के वेतनमान में काफी अंतर है. पंचायत स्तर पर भी जो नियुक्ति होती है, उसमें भी प्रक्रिया का पालन होता है. विज्ञापन जारी कर नियुक्ति प्रक्रिया का पालन किया जाता है. यह नियमावली छत्तीसगढ़ में 2004 से प्रभावी है.
उत्तर प्रदेश में क्या है स्थिति

उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 में पारा शिक्षकों को वेतनमान दिया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के आदेश को निरस्त कर दिया. सुप्रीम कोर्ट का कहना था कि उसके लिए यूपी के 1.7 लाख पारा शिक्षक से महत्वपूर्ण राज्य के बच्चे हैं. इस तरह का मामला झारखंड हाइकोर्ट में भी चल रहा है.
पारा शिक्षकों की मांग जो सरकार ने मानी

– अब पारा शिक्षक 60 साल की उम्र तक नौकरी कर सकेंगे.
-कल्याण कोष की राशि पांच करोड़ से बढ़ा कर 10 करोड़ कर दी गयी है.

-शिक्षक पात्रता परीक्षा के प्रमाण पत्र की मान्यता की अवधि पांच साल से बढ़ा कर सात साल कर दी गयी है.
– मानदेय में की गयी है बढ़ोतरी.

कैबिनेट में सरयू राय ने कहा : पक्ष रखे सरकार, 15 नवंबर को कैसे हंगामा हुआ जिम्मेवारी तय हो

रांची : मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में पारा शिक्षकों का मामला उठा. मंत्री सरयू राय ने कहा कि पारा शिक्षकों को लेकर सरकार को अपना रूख स्पष्ट करना चाहिए. कैबिनेट को इस पर अाधिकारिक पक्ष रखना चाहिए. इस मुद्दे पर कैबिनेट के अंदर 10 मिनट तक चर्चा हुई. श्री राय ने यह भी कहा कि 15 नवंबर को मोरहाबादी में जो घटना हुई उस पर भी सरकार को प्रशासनिक स्तर पर संज्ञान लेना चाहिए. इसके लिए केवल एक पक्षीय पारा टीचर को दोष देकर नहीं टाला जा सकता. प्रशासनिक तैयारी में चूक हुई है. जब मंच पर राज्यपाल,मुख्यमंत्री मौजूद हों तो फिर आंदोलनकारी वहां तक कैसे पहुंच गये. खुफिया रिपोर्ट क्या थी और सुरक्षा व्यवस्था को क्यों नहीं सुनिश्चित किया गया. श्री राय ने कैबिनेट के अंदर यहां तक कहा कि जिम्मेवार अधिकारियों को चिन्हित कर कार्रवाई की जाये.
तब सरकार की ओर से मंत्रियों के समक्ष बताया गया कि अन्य राज्यों में पारा शिक्षकों के बाबत रिपोर्ट मंगायी गयी है. किसी भी राज्य पारा शिक्षकों को स्थायी नहीं किया गया है. झारखंड सरकार अन्य राज्यों से बेहतर सुविधा पारा शिक्षकों को दे रहे हैं. बैठक में इस पर सहमति बनी कि सरकार के एक अधिकारी इस पर मीडिया के समक्ष अपना पक्ष रखेंगे.

सरकार की तैयारी : काम पर नहीं लौटे पारा शिक्षक, 50 हजार टेट सफल अभ्यर्थियों का लिस्ट तैयार
रांची. पारा शिक्षकों के लिए काम पर लौटने का अल्टीमेटम समाप्त होने के बाद भी 67 हजार पारा शिक्षकों में से लगभग 64 हजार पारा शिक्षक (19नवंबर तक) काम पर नहीं लौटे. पारा शिक्षकों की हड़ताल से निबटने के लिए बुधवार से प्रतिनियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी जायेगी. राज्य शिक्षा परियोजना ने मंगलवार को इसकी तैयारी शुरू कर दी. झारखंड एकेडमिक काउंसिल ने सरकार को शिक्षक पात्रता परीक्षा सफल अभ्यर्थियों का नाम भेज दिया. जैक द्वारा 50 हजार टेट सफल अभ्यर्थियों का नाम विभाग को भेजा गया है. इसके अलावा शिक्षा परियोजना ने शिक्षक प्रशिक्षण व प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे अभ्यर्थियों की लिस्ट तैयार कर ली है. अवकाश के बाद भी मंगलवार को कार्यालय खोला गया है. जिलों को शिक्षक पात्रता परीक्षा सफल अभ्यर्थियों का नाम भेजा जायेगा. जिलों से भेजी गयी रिपोर्ट के अनुसार रांची में पारा शिक्षकों की हड़ताल का सबसे कम असर है. रांची में 69 फीसदी पारा शिक्षक हड़ताल पर हैं. देवघर, दुमका, गिरिडीह, गोड्डा, हजारीबाग, सिमडेगा, पूर्वी सिंहभूम में हड़ताल का सबसे अधिक असर है.

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