रांची : चार नवांगीभूत कॉलेज के शिक्षकों की सेवा गणना पद सृजन की तिथि से होगी मान्य
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :25 Oct 2018 12:59 AM (IST)
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महाधिवक्ता ने रांची विश्वविद्यालय को लौटायी फाइल, दी राय रांची : रांची विश्वविद्यालय के चार नवांगीभूत कॉलेजों के शिक्षकों की नियुक्ति तिथि निर्धारित करने के मामले में महाधिवक्ता ने अपनी राय विवि को दे दी है. रांची विवि ने इस मामले में महाधिवक्ता से राय मांगी थी. महाधिवक्ता ने यह कहते हुए फाइल वापस कर […]
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महाधिवक्ता ने रांची विश्वविद्यालय को लौटायी फाइल, दी राय
रांची : रांची विश्वविद्यालय के चार नवांगीभूत कॉलेजों के शिक्षकों की नियुक्ति तिथि निर्धारित करने के मामले में महाधिवक्ता ने अपनी राय विवि को दे दी है. रांची विवि ने इस मामले में महाधिवक्ता से राय मांगी थी.
महाधिवक्ता ने यह कहते हुए फाइल वापस कर दी है कि शिक्षकों की सेवा की गणना पद सृजन की तिथि से ही की जा सकती है. रांची विवि इस मामले में नियम अनुरूप निर्णय ले.
महाधिवक्ता की राय के बाद अब प्रस्ताव फिर से सिंडिकेट की बैठक में रखा जायेगा. रांची विवि के चार नवांगीभूत कॉलेजों के शिक्षक काफी दिनों से नियुक्ति की तिथि से सेवा की गणना की मांग कर रहे हैं.
शिक्षक इस मामले में न्यायालय के आदेश का भी हवाला दे रहे हैं.सरकार द्वारा इन कॉलेजों में 30 अप्रैल 1986 से पद सृजन किया गया है. पद सृजन से संबंधित पत्र राज्य सरकार ने वर्ष 2008 में जारी की है, जबकि कॉलेज के शिक्षकों का कहना है कि वे पद सृजन की तिथि के पूर्व से कार्यरत हैं.
कॉलेज के शिक्षक 1986 के पहले से कार्यरत होने का दावा कर रहे हैं और 1984-85 से ही सेवा की गणना करने की मांग कर रहे हैं. इस मामले को लेकर विवि भी अब तक कोई अंतिम निर्णय नहीं ले सका है.
विवि का भी अब तक यही मानना रहा है कि जिस विषय में 1986 से पहले पद ही नहीं था, उनकी सेवा की गणना पहले से कैसे की जा सकती है. महाधिवक्ता की राय के बाद अब इस पर अंतिम निर्णय सिंडिकेट की बैठक में ली जायेगी.
जानकारों का कहना है कि शिक्षकों की सेवा की गणना पद सृजन की तिथि के पहले से करने पर सहमति बनना आसान नहीं होगा. पहले की सिंडिकेट की बैठक में भी इस पर आम सहमति नहीं बन पायी थी.
शिक्षकों को नहीं मिला है कालबद्ध प्रोन्नति का लाभ
कॉलेज के शिक्षकों की नियुक्ति तिथि पर अंतिम निर्णय नहीं होने के कारण प्रोन्नति का मामला भी लंबित है.नवांगीभूत कॉलेजों के शिक्षकों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में योगदान की तिथि से सेवा गणना के आधार पर प्रोन्नति की अनुशंसा की जानी है. शिक्षकाें की कालबद्ध प्रोन्नति की अंतिम तिथि 22 नवंबर 1995 है. ऐसे में नियुक्ति की गणना 1986 से होने से उन्हें 22 नवंबर 1995 तक की प्रोन्नति का लाभ नहीं मिल सकेगा.
इन कॉलेजों के शिक्षकों का है मामला
विवि के बीएनजे कॉलेज सिसई, मांडर कॉलेज मांडर, केसीबी कॉलेज बेड़ो व पीपीके कॉलेज बुंडू के शिक्षकों का मामला है. कॉलेज के शिक्षक काफी दिनों से अपनी मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं.
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