कांग्रेस की तीन साल से नहीं हो सकी वर्किंग कमेटी की बैठक, अलग-थलग पड़े हैं बड़े नेता

Updated at : 04 Oct 2018 6:44 AM (IST)
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कांग्रेस की तीन साल से नहीं हो सकी वर्किंग कमेटी की बैठक, अलग-थलग पड़े हैं बड़े नेता

रांची : आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने तैयारी शुरू कर दी है. प्रमुख राजनीतिक दल कार्यकर्ताओं को एकजुट करने को लेकर मैदान में उतर गये हैं. इधर प्रदेश कांग्रेस कमेटी कमरे में कैद है. पिछले तीन साल से प्रदेश वर्किंग कमेटी की बैठक तक नहीं हुई है. तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष सुखदेव भगत […]

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रांची : आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने तैयारी शुरू कर दी है. प्रमुख राजनीतिक दल कार्यकर्ताओं को एकजुट करने को लेकर मैदान में उतर गये हैं. इधर प्रदेश कांग्रेस कमेटी कमरे में कैद है.
पिछले तीन साल से प्रदेश वर्किंग कमेटी की बैठक तक नहीं हुई है. तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष सुखदेव भगत के कार्यकाल में वर्ष 2015 में प्रदेश कांग्रेस वर्किंग कमेटी की आखिरी बैठक हुई थी. इसके बाद अगस्त 2017 में झारखंड में पीसीसी डेलिगेट की बैठक हुई थी. इसमें सोनिया गांधी को एआइसीसी का मेंबर व राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाये जाने पर सहमति बनी थी. इसके बाद नवंबर 2017 में डॉ अजय कुमार को प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया.
इनके कार्यकाल का भी एक वर्ष पूरा होने जा रहा है, लेकिन अब तक प्रदेश कमेटी का विस्तार नहीं किया गया है. फिलहाल कांग्रेस की सारी गतिविधियां मोर्चों व विभागों के सहारे चल रही है. इनकी ओर से कांग्रेस के बड़े नेता अपने-अपने क्षेत्र में ही मौजूद हैं. प्रदेश नेतृत्व को लेकर इनकी नाराजगी की चर्चा भी चल रही है. पिछली कई बैठकों में पार्टी के शीर्ष नेताओं ने प्रदेश अध्यक्ष व प्रभारी के प्रति नाराजगी का इजहार भी किया था. इसके बाद प्रदेश प्रभारी रांची आये और वे भी मोर्चा व विभागों के साथ बैठक कर वापस लौट गये. पार्टी के शीर्ष नेताओं की नाराजगी को दूर करने के लिए कोई पहल नहीं की गयी.
अलग-थलग पड़े हैं कांग्रेस के बड़े नेता
लोकसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस के बड़े नेता अपने-अपने क्षेत्र में डटे हुए हैं. इनकी राजनीति सिर्फ अपने-अपने लोकसभा व विधानसभा तक सिमट गयी है. लोकसभा व विधानसभा चुनाव में अपना टिकट सुनिश्चित करने को लेकर इनकी ओर से प्रयास किया जा रहा है. प्रदेश नेतृत्व की ओर से पूछ नहीं होने पर पार्टी के बड़े नेता संगठन से अलग-थलग पड़े हुए हैं.
कांग्रेस कार्यालय में भी पहले की तरह ज्यादा गहमागहमी देखने को नहीं मिल रही है. जब प्रदेश अध्यक्ष रांची आते हैं, तो मोर्चा व विभागों के पदाधिकारी प्रदेश कार्यालय में जुटते हैं. अन्यथा नियमित तौर पर पार्टी के गिने-चुने नेता व पदाधिकारी कार्यालय पहुंचते हैं.
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