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सफाई पर हर महीने खर्च हो रहे तीन करोड़ रुपये, फिर भी कचरे के ढेर पर खड़ी है रांची

Updated at : 03 Oct 2018 4:38 AM (IST)
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सफाई पर हर महीने खर्च हो रहे तीन करोड़ रुपये, फिर भी कचरे के ढेर पर खड़ी है रांची

रांची : राजधानी की सफाई के लिए रोजाना 2500 से ज्यादा सफाईकर्मी लगाये जा रहे हैं. वहीं, 500 वाहन (350 वाहन रांची एमएसडब्ल्यू और 150 वाहन रांची नगर निगम के) शहर से निकलने वाला कचरा उठाकर झिरी स्थित डंपिंग यार्ड तक पहुंचाते हैं. इस पूरी कवायद पर रांची नगर निगम हर महीने करीब तीन करोड़ […]

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रांची : राजधानी की सफाई के लिए रोजाना 2500 से ज्यादा सफाईकर्मी लगाये जा रहे हैं. वहीं, 500 वाहन (350 वाहन रांची एमएसडब्ल्यू और 150 वाहन रांची नगर निगम के) शहर से निकलने वाला कचरा उठाकर झिरी स्थित डंपिंग यार्ड तक पहुंचाते हैं. इस पूरी कवायद पर रांची नगर निगम हर महीने करीब तीन करोड़ रुपये खर्च कर रहा है. इसके बावजूद राजधानी कचरे के अंबार पर खड़ी दिख रही है.
सफाई के सवाल पर रांची नगर निगम के अधिकारी तरह-तरह के दावे तो करते हैं, लेकिन सच्चाई इससे बिल्कुल उलट है. मुख्य सड़कों को छोड़ दें, तो गली-मोहल्लों की हालत अब भी बदतर है. महीनों तक कचरे का उठाव नहीं हो रहा है.
कचरा जमा होने के कारण नालियां बजबजा रही हैं. इस कारण मच्छर-मक्खियों का प्रकोप भी बढ़ता जा रहा है. गौरतलब है कि करीब चार साल पहले शहर के 55 वार्डों की सफाई एटूडेड नामक कंपनी कर रही थी. उस समय पूरे शहर की सफाई कराने में रांची नगर निगम को प्रतिमाह 85-90 लाख रुपये खर्च करने पड़ते थे. उस लिहाज से आज रांची नगर निगम क्षेत्र की सफाई का खर्च करीब चारगुना बढ़ गया है. बावजूद इसके शहर में कहीं सफाई नहीं दिख रही है.
इन क्षेत्रों का सबसे बुरा हाल
शहर के मधुकम, खादगढ़ा, चुटिया, लोअर चुटिया, कुरैशी मोहल्ला, सामलौंग, हरिजन बस्ती कांटाटोली, इसलाम नगर, आजाद बस्ती, करबला चौक, हिंदपीढ़ी, खेत मोहल्ला, नेजाम नगर, पुरानी रांची बस्ती, अपर बाजार, पहाड़ी टोला, हातमा, एदलहातू, बूटी बस्ती, बड़गाईं, न्यू नगर, बांधगाड़ी आदि मोहल्ले ऐसे हैं, जहां खुली जगहों पर कचरे का ढेर लगा रहता है. यहां दिन भर सूअरों और अन्य आवारा पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है.
सरकारी कार्यक्रम में पहुंचने के लिए ‘बापू’ को लेनी पड़ी लिफ्ट
गांधी जयंती पर मोरहाबादी में आयोजित कार्यक्रम में यह कलाकार बापू का रूप धर कर शामिल हुआ. राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने इनके साथ बैठ कर चरखा चलाया. पर आयोजन स्थल तक जाने के लिए इन्हें प्रशासन ने वाहन तक उपलब्ध नहीं कराया. इन्हें दूसरों से लिफ्ट लेकर बाइक से जाना पड़ा.
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