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सरयू व सुशील ने खोली थी अलकतरा घोटाले की पोल

Updated at : 29 Sep 2018 1:55 AM (IST)
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सरयू व सुशील ने खोली थी अलकतरा घोटाले की पोल

रांची : बहुचर्चित अलकतरा घोटाले में बिहार के पूर्व मंत्री इलियास हुसैन को सीबीआइ कोर्ट ने चार वर्ष की सजा सुनायी है़ अलकतरा घोटाला को उजागर करने और न्यायालय की चौखट तक लाने और फिर सजा तक का लंबा सफर रहा है. इस मामला के सामने आने के 22 वर्षों बाद फैसला आया है. झारखंड […]

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रांची : बहुचर्चित अलकतरा घोटाले में बिहार के पूर्व मंत्री इलियास हुसैन को सीबीआइ कोर्ट ने चार वर्ष की सजा सुनायी है़ अलकतरा घोटाला को उजागर करने और न्यायालय की चौखट तक लाने और फिर सजा तक का लंबा सफर रहा है. इस मामला के सामने आने के 22 वर्षों बाद फैसला आया है.
झारखंड में वर्तमान में मंत्री सरयू और बिहार के मंत्री सुशील कुमार मोदी ने इस घोटाले की परत दर परत खोली है. तब सरयू राय पार्टी के एकीकृत बिहार के प्रवक्ता और सुशील कुमार मोदी बिहार विधानसभा में सचेतक हुआ करते थे. इन दोनों नेताओं को सूचना मिली कि रोड बनाने के लिए आवंटित अलकतरा निजी कंपनियों को भेजा जा रहा है.
उस समय ट्रांसपोर्टरों, माफियाओं और सत्ता का मजबूत गठजोड़ था. इस मामले पर कोई हाथ नहीं लगाना चाहता था. सरयू राय और सुशील मोदी मामले की तह तक पहुंचे. फिर केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय तक गये. इन लोगों ने निदेशक स्तर के अधिकारी से मिल कर बिहार को आवंटित अलकतरा के वर्षवार आंकड़े इकट्ठा किये. इसके बाद राज्य सरकार के विभाग से सड़क निर्माण, चौड़ीकरण, मरम्मत सभी तरह के कार्यों में प्रयोग होनेवाले अलकतरा की खपत की जानकारी ली.
दोनों ही नेताओं ने तब अप्रैल 1996 में पटना हाइकोर्ट में घोटाले की जांच को लेकर याचिका दायर की. हाइकोर्ट में मामला आने के बाद कई तथ्य उजागर हुए. ट्रांसपोर्टर अलकतरा उठा कर निजी लोगों के हाथों बेच रहे थे. करोड़ों का खेल हाे रहा था. लंबी सुनवाई के बाद कोर्ट ने पूरे मामले की जांच सीबीआइ को सौंप दी. इसके बाद कई घोटालेबाज सामने आये. मंत्री तक की संलिप्तता सामने आयी. माफिया मंत्री-अधिकारी को पैसा पहुंचा रहे थे़
तत्कालीन वित्त सचिव वीएस दुबे ने एजी को लिखा था पत्र : एकीकृत बिहार में वीएस दुबे तत्कालीन वित्त सचिव थे. श्री राय और श्री मोदी ने वित्त सचिव को भी सरकारी पैसे में लूट की जानकारी दी. वित्त सचिव ने तब एजी को पत्र लिख कर जानकारी मांगी. वित्त सचिव रहे श्री दुबे ने एजी से जानना चाहा था कि कितने की सामग्री खरीदी गयी और कितने का बुक ट्रांसफर हुआ. उन्होंने नकद हस्तांतरण के लिए एजी को पत्र लिखा था़
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