लोकमंथन : प्रश्नों को प्रोत्साहित करने की आजादी केवल भारतीय सभ्यता में ही है : हृदय नारायण दीक्षित

Updated at : 28 Sep 2018 6:16 AM (IST)
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लोकमंथन : प्रश्नों को प्रोत्साहित करने की आजादी केवल भारतीय सभ्यता में ही है : हृदय नारायण दीक्षित

राष्ट्रबोध. भारत की आत्मा को देखने का समग्र दृष्टिकोण है भारत बोध रांची : खेलगांव में आयोजित लोकमंथन कार्यक्रम के प्रथम सत्र में बीज वक्तव्य प्रदान करते हुए यूपी विधानसभा के अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने कहा कि भारत बोध भारत की आत्मा को देखने का समग्र दृष्टिकोण है. अपनी दृष्टि को व्यापक रूप में […]

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राष्ट्रबोध. भारत की आत्मा को देखने का समग्र दृष्टिकोण है भारत बोध
रांची : खेलगांव में आयोजित लोकमंथन कार्यक्रम के प्रथम सत्र में बीज वक्तव्य प्रदान करते हुए यूपी विधानसभा के अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने कहा कि भारत बोध भारत की आत्मा को देखने का समग्र दृष्टिकोण है.
अपनी दृष्टि को व्यापक रूप में देखने के बाद हम अपनी समृद्ध विरासत और उससे जुड़े तथ्यों को समग्र रूप में देखते हैं तो वह भारत बोध को प्रतिरूपित करता है. श्री दीक्षित ने कहा : भारत का दृष्टिकोण प्राचीन काल से ही वैज्ञानिक रहा है. प्रश्नों को प्रोत्साहित करने की आजादी केवल भारतीय सभ्यता में ही है. दुनिया की दूसरी सभ्यताओं में प्रश्न करने की इजाजत नहीं है. इसके उलट भारतीय दर्शन में प्रश्नों के आधार पर ही राष्ट्रीयता का बोध और शोध होता है.
परंपरा की कोख से आधुनिकता का जन्म होता है : डॉ दीक्षित ने कहा : भारतीय दर्शन मूल्य बोध कराता है. इसी भारतीय मूल्य बोध का नाम हिंदुत्व है.
यूनानी दर्शनशास्त्रियों से हजारों वर्ष पहले ही भारत के ऋषि-मुनियाें ने वेदों में दुनिया की उत्पत्ति का सिद्धांत बता दिया था. प्रसिद्ध वैज्ञानिक स्टीफन हाकिंग्स ने जो कहा, वह हमारे वेदों में बहुत पहले ही लिख दिया गया था. विज्ञान का साक्ष्य दुनिया को सबसेपहले ऋग्वेद ने दे दिया था. उन्होंने कहा कि भारत किसी पर शासन नहीं करना चाहता, पर अजेय जरूर बना रहना चाहता है.
भारतीय बोध में सब कुछ है. जो दिखता है. जो हो रहा है और जो होने वाला है. भारतीय दर्शन कहता है कि सृष्टि अखंड है. इसे टुकड़ों में नहीं बांटा जाना चाहिए. आज आधुनिकता पर बहस होती है. भारतीय दर्शन का मानना है कि कुछ भी नया-पुराना नहीं है. परंपरा की कोख से आधुनिकता का जन्म होता है.
देश का इतिहास उसके आंतरिक साक्ष्यों के आधार पर लिखा जाना चाहिए : इसके उपरांत प्रो रामेश्वर मिश्रा ने आचार्य धर्मपाल के जीवन और कृतित्व पर अपने विचारों को साझा करते हुए श्रोताओं को उनके जीवन आदर्शों से परिचित करवाया. उन्होंने कहा कि जिन्हें अक्षर ज्ञान नहीं होता है उन्हें अनपढ़ कहा जाता है परंतु भारत के गांवों में अक्षर ज्ञान से अनभिज्ञ बहुत सारे ज्ञानी हैं जिन्हें विभिन्न विषयों का गूढ़ ज्ञान प्राप्त है.
कबीर इसके उदाहरण हैं. 18वीं सदी के ब्रिटिश अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में लिखा था कि भारत के हर एक गांव में एक विद्यालय है. बड़े गांवों में एक से अधिक विद्यालय हैं और शहरों में ज्यादा संख्या में विद्यालय हैं. प्रत्येक विद्यालय में हर एक जाति के लोग पढ़ते हैं और हर एक जाति के अध्यापक पढ़ाते भी हैं. परंतु बेकार में आत्म गौरव की भावना जागृत ना हो इसके लिए इसे दबा दिया गया.
किसी भी देश का इतिहास उसके आंतरिक साक्ष्यों के आधार पर लिखा जाना चाहिए. परंतु भारत में छात्रों को ऐसा इतिहास पढ़ाया जाता है जो पाश्चात्य चिंतकों के मतों के आधार पर निर्मित किया गया है. तृतीय वक्ता के रूप में आशीष कुमार गुप्ता ने श्री रवींद्र गुरुजी और चतुर्थ वक्ता के रूप में श्री प्रशांत पोले ने अमृतलाल वेगड़ के जीवन के विभिन्न पक्षों और उनकी स्मृतियों को सभा के समक्ष उदघाटित किया.
रांची : उपराष्ट्रपति रवाना, राज्यपाल व मुख्यमंत्री ने विदाई दी
रांची : उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू गुरुवार को रांची से शाम छह बजे गोवा के लिए रवाना हो गये. उन्हें एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री सहित अन्य ने विदाई दी. रांची एयरपोर्ट पर राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू , मुख्यमंत्री रघुवर दास, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा , विधायक नवीन जायसवाल, डॉ जीतू चरण राम, अनंत अोझा, दीपक प्रकाश, संजय सेठ, सुबोध सिंह गुड्डू, सीमा शर्मा सहित अन्य उपस्थित थे. मालूम हो कि उपराष्ट्रपति के आगमन को लेकर हिनू चौक से एयरपोर्ट तक कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गयी थी.
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