भूमि अधिग्रहण बिल के खिलाफ आदिवासी संगठनों का धरना कल
Updated at : 15 Jul 2018 2:10 AM (IST)
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रांची : भूमि अधिग्रहण बिल को रद्द करने की मांग को लेकर विभिन्न आदिवासी संगठन 16 जुलाई को राजभवन के समक्ष धरना देंगे. शनिवार को यह जानकारी आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधियों ने संवाददाता सम्मेलन में दी. धरना में केंद्रीय सरना समिति, आदिवासी जनपरिषद, झारखंड आदिवासी संघर्ष मोर्चा, संयुक्त सांगा पड़हा समिति सहित अन्य संगठनों के […]
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रांची : भूमि अधिग्रहण बिल को रद्द करने की मांग को लेकर विभिन्न आदिवासी संगठन 16 जुलाई को राजभवन के समक्ष धरना देंगे. शनिवार को यह जानकारी आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधियों ने संवाददाता सम्मेलन में दी. धरना में केंद्रीय सरना समिति, आदिवासी जनपरिषद, झारखंड आदिवासी संघर्ष मोर्चा, संयुक्त सांगा पड़हा समिति सहित अन्य संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे.
इसके अलावा पांच अगस्त को पाही बैंक्वेट हॉल मोरहाबादी में सामाजिक संगठनों अौर बुद्धिजीवियों का सेमिनार होगा. नौ अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस पर आदिवासी समाज के प्रतिनिधि गुमला के घाघरा में होनेवाली महारैली में भाग लेंगे.
आदिवासी जनपरिषद के कार्यकारी अध्यक्ष प्रेमशाही मुंडा ने कहा कि राज्य की वर्तमान राजनीतिक अौर सामाजिक परिस्थिति आदिवासी जनभावना के अनुरूप नहीं है. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के दौरे से आदिवासियों के प्रति नकारात्मक रवैया सामने आया है. न उन्होंने सीएनटी, एसपीटी जैसे मुद्दों पर बात की अौर न ही पेसा कानून के तहत ग्राम सभा को शक्ति प्रदान की. आदिवासियों की हड़पी हुई जमीन कैसे वापस होगी, यह भी उनके एजेंडे में शामिल नहीं था.
केंद्रीय सरना समिति के अजय तिर्की ने कहा कि सरकार भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक को बैक डेट से यानी एक जून 2014 से लागू करना चाहती है. इसका सीधा सा अर्थ है कि आदिवासियों की जो जमीनें हड़पी गयी है, उसे कानूनी स्वरूप दिया जाये. एलएम उरांव ने कहा कि भाजपा सरकार ने झारखंड के सौहार्दपूर्ण वातावरण को बिगाड़ दिया है. प्रेस कॉन्फ्रेंस में सोमा मुंडा, एलएम उरांव, दीपक भगत, संतोष तिर्की, पीयूष बेक, सुबोध दांगी, उमेश लोहरा सहित अन्य मौजूद थे.
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