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रांची : जांच में हुआ खुलासा, बंद प्रेस में छप रही हैं बच्चों की किताबें

Updated at : 13 Jul 2018 7:48 AM (IST)
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रांची : जांच में हुआ खुलासा, बंद प्रेस में छप रही हैं बच्चों की किताबें

सुनील कुमार झा रांची : राज्य के सरकारी विद्यालयों के बच्चों को दी जानेवाली नि:शुल्क किताब के टेंडर में गड़बड़ी का खुलासा हुआ है. किताबें बंद प्रेस में छापने का मामला सामने आया है. किताब छपाई के लिए जिन प्रकाशकों को टेंडर मिला है, उनके प्रेस के भौतिक सत्यापन का आदेश स्कूली शिक्षा व साक्षरता […]

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सुनील कुमार झा

रांची : राज्य के सरकारी विद्यालयों के बच्चों को दी जानेवाली नि:शुल्क किताब के टेंडर में गड़बड़ी का खुलासा हुआ है. किताबें बंद प्रेस में छापने का मामला सामने आया है.

किताब छपाई के लिए जिन प्रकाशकों को टेंडर मिला है, उनके प्रेस के भौतिक सत्यापन का आदेश स्कूली शिक्षा व साक्षरता विभाग के प्रधान सचिव एपी सिंह ने दिया था. प्रकाशकों को दिये गये कार्यादेश के अनुसार किताबों की छपाई उनके प्रेस में हो रही है कि नहीं, इसका प्रमाण देना था. विभागीय सचिव के आदेश पर मेसर्स बुर्दा ड्रक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ग्रेटर नोएडा की जांच के लिए विभाग के उप निदेशक मिथलेश कुमार सिन्हा को भेजा गया.

जांच में प्रेस का पता सही पाया गया, पर वहां किताब की छपाई प्रमाणित नहीं हो सकी. पूछे जाने पर मेसर्स बुर्दा ड्रक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर ने बताया कि कक्षा तीन, सात व आठ की किताबों की छपाई अंकित पते पर की जा रही है. पर जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि इसकी सत्यता प्रमाणित नहीं की गयी.

जांच में पाया गया कि प्रेस बंद था. किसी भी कक्षा की पाठ्य पुस्तक की छपाई होते नहीं पायी गयी. प्रेस के गोदाम में प्लास्टिक से पैक विषयवार किताब का बंडल पाया गया. इससे प्रमाणित होता है कि इन पुस्तकों की छपाई अन्य प्रेस में होने के बाद यहां फिनिंसिंग एवं पैकिंग का कार्य किया जा रहा था.

कक्षा आठ की किताब की आपूर्ति नहीं : जांच पदाधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि प्रकाशक की ओर से अब तक कक्षा सात के लिए मात्र 45 फीसदी किताबों की ही आपूर्ति की गयी है. कक्षा आठ के लिए किताब की आपूर्ति की प्रक्रिया शुरू ही नहीं हुई है. ऐसे में समय पर किताब की आपूर्ति करना संभव नहीं लगता.

तीन से चार आदमी कर रहे थे फिनिसिंग कार्य : रिपोर्ट में कहा गया है कि समय पर किताब की आपूर्ति हो, इसके लिए प्रेस में कोई गतिविधि नहीं देखी गयी. प्रेस में मात्र तीन से चार आदमी फिनिसिंग का कार्य करते पाये गये. 10 से 12 व्यक्ति वर्गवार किताबों की पैकिंग कर रहे थे. बैंक गारंटी की मूल प्रति नहीं होने के कारण उसकी जांच नहीं हो सकी.

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