मिशनरीज ऑफ चैरिटी ने वर्ष 2016 में सिर्फ चार नवजात की दिखायी इंट्री, 32 का पता नहीं, जांच में खुलासा

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 12 Jul 2018 7:25 AM

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रांची : जिला प्रशासन की जांच में इस बात का खुलासा हुआ है कि मिशनरीज ऑफ चैरिटी में वर्ष 2016 में मार्च से दिसंबर के बीच 36 बच्चों का जन्म हुआ था. इनमें सिर्फ चार बच्चों को ही सीडब्ल्यूसी को दिखाया गया. शेष 32 बच्चे अभी कहां हैं, इसका कोई पता नहीं. जिला समाज कल्याण […]

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रांची : जिला प्रशासन की जांच में इस बात का खुलासा हुआ है कि मिशनरीज ऑफ चैरिटी में वर्ष 2016 में मार्च से दिसंबर के बीच 36 बच्चों का जन्म हुआ था. इनमें सिर्फ चार बच्चों को ही सीडब्ल्यूसी को दिखाया गया.
शेष 32 बच्चे अभी कहां हैं, इसका कोई पता नहीं. जिला समाज कल्याण पदाधिकारी कंचन सिंह ने बताया, प्रशासन इस मामले की भी जांच करेगा. पूर्व में सूचना दी गयी थी कि अप्रैल 2016 से दस्तावेज गायब हैं. लेकिन, मार्च 2016 के पहले के दस्तावेज नहीं मिल पाये हैं, जिसकी तलाश जारी है. यही नहीं, जिन दो बच्चों की मौत बतायी गयी है, उसकी भी जांच प्रशासन की ओर से की जायेगी.
जिला प्रशासन ने इन दोनों बच्चों के परिजनों से बात की, तो चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. परिजनों का कहना था कि उन्हें बताया गया था कि बच्चा जन्म लेते ही मर चुका है. लेकिन, उन्हें बच्चे नहीं दिखाये गये. प्रशासन अब दोनों बच्चों की मौत की भी जांच करेगा. यह पता लगायेगा कि दोनों की मौत हुई थी, या इन्हें बेच दिया गया था.
कोकर से एक और बच्ची मिली, निर्मल हृदय केंद्र ने बेचा था
मिशनरीज ऑफ चैरिटी के निर्मल हृदय केंद्र से बेचा गया एक और बच्ची कोकर से बरामद की गयी है. वह डॉन बास्को स्कूल के पास शैलेजा तिर्की के पास थी. बच्चाी लातेहार के महुआडांड़ निवासी युवती का है.
उसका जन्म एक साल पहले सदर अस्पताल में हुआ था. कोतवाली इंस्पेक्टर एसएन मंडल ने बताया : निर्मल हृदय केंद्र की सिस्टर कोंसीलिया और कर्मचारी अनिमा इंदवार ने ही इस बच्ची को भी 50 हजार में शैलेजा तिर्की को बेचा था. देर शाम कोतवाली थाने की पुलिस ने बच्चे को सीडब्ल्यूसी के समक्ष प्रस्तुत किया. बाद में बच्ची को करुणा अनाथालय में भेज िदया गया.
धरने पर बैठी दोनों मां, अबोध नव्या का क्या कसूर!
अबोध नव्या का क्या कसूर है़ मां के रहते वह अनाथ कैसे हो सकती है? जन्म देनेवाली मां ने सौदा किया, तो इसमें मासूम की क्या गलती है़ अनाथालय की दीवारों में वह कैद क्यों हो़ कोकर की शैलेजा तिर्की के पास नव्या को बेचा गया़ अब वह अपने कलेजे के टुकड़े के लिए गुहार लगा रही है़ पालनेवाली मां शैलेजा कह रही है : नव्या मेरे बिना नहीं रह सकती़
कोई हमारी सुननेवाला नही़ं मेरे बिना नव्या न खायेगी और न ही सोयेगी़ पर कोई भी हमारी बात नहीं समझ रहा़ यह कह कर वह बार-बार रोने लगती है़ बच्ची को जन्म देनेवाली मां और पालनेवाली मां शैलेजा तिर्की करुणा आश्रम पहुंची और बच्ची को उन्हें सौंपने के लिए धरना देने लगी़ पर उन्हें कहा गया कि गुरुवार को सीडब्ल्यूसी में अपनी बात रखे़ं करुणा अनाथालय में बच्ची की नानी और मौसी भी पहुंची थी़ नानी ने कहा : बच्ची को 50 हजार रुपये में बेचे जाने की बात गलत है़
इधर करुणा आश्रम में शैलेजा तिर्की का पूरा परिवार पहुंचा था़ शैलेजा तिर्की की मां ने कहा कि फबिओला तिर्की ने बताया था कि वह मिशनरी ऑफ चैरिटी की मेंबर है़ हर शनिवार और रविवार को निर्मल हृदय केंद्र जाती थी. इसी क्रम में बच्ची की मां से उसका संपर्क हुआ था़ एक दिन उसने अपना बच्चा अच्छी परवरिश के लिए उन्हें देने का वादा किया था़ 14 जून 2017 को बच्ची का जन्म सदर अस्पताल में हुआ था़ जन्म के बाद ही बच्ची को शैलेजा के परिवार को दे दिया गया था़ जन्म देनेवाली मां और पालनेवाली मां की सहमति से बच्ची का नामकरण हुआ था़ बच्ची नव्या तेरेसा का जन्म प्रमाण पत्र अब तक नहीं बनाया गया है़
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